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नाराज भागवताचार्य देवकीनंदन बोले- नेताओं ने संसद में बैठकर समाज को बांट दिया, उन्हें क्या सिर्फ एससी-एसटी का वोट चाहिए

एससी-एसटी एक्ट संशोधन विधेयक के खिलाफ मुहिम शुरू करने वाले भागवताचार्य देवकीनंदन सरकार से नाराज हैं

Danik Bhaskar | Sep 05, 2018, 01:04 PM IST

ग्वालियर। एससी-एसटी एक्ट संशोधन विधेयक के खिलाफ मुहिम शुरू करने वाले भागवताचार्य देवकीनंदन ठाकुर देश के सभी राजनीतिक दलों के रवैए से नाराज हैं। मंगलवार को ग्वालियर में इस मुद्दे पर आयोजित जनसभा को संबोधित करने आ रहे देवकीनंदन से दैनिक भास्कर ने फोन पर बातचीत की।

सवाल : आप एससी-एसटी एक्ट के विरोध में क्यों हैं, आप तो संत हैं?

देवकीनंदन : देश के जो नेता हैं, वो समाजों को आपस में बांटने की राजनीति कर रहे हैं। संसद में इस कानून का विधेयक मंजूर हो गया और कोई भी एक नेता इसका विरोध करते हुए सामने नहीं आया। सभी ने मौन धारण कर सामाजिक ढांचे के विपरीत इस कानून काे स्वीकार क्यों कर लिया? नेताओं को इसका जवाब जरूर देना चाहिए। मैं समाज के बीच रहता हूं और हर अपनी जिम्मेदारी को पहचानते हुए इस मुहिम को शुरू किया।

सवाल : क्या संत व भागवताचार्यों को ऐसे आंदोलनों की अगुआई करनी चाहिए?

देवकीनंदन : क्यों नहीं? जब देश के राजनीतिज्ञ सिर्फ वोटों को ध्यान में रखकर सामाजिक न्याय की व्यवस्था के विपरीत जाकर निर्णय लें और लोगों के मानव अधिकारों का हनन करें, तो हम सभी का दायित्व है, उस अन्याय का विरोध करना।

सवाल : आपके भक्त/श्रोता तो सभी वर्गों से हैं, क्या आपके इस कदम से दूसरे वर्ग के लोगों में आपके प्रति गलत मैसेज नहीं जाएगा?

देवकीनंदन : बिल्कुल नहीं जाएगा। क्योंकि, हम सभी वर्ग-समाजों के लोगों को एकसमान व्यवस्था में साथ चलने के लिए कह रहे हैं। यदि, अभी भी ऐसी विसंगतियों को दूर कर सामाजिक ढांचा व न्याय व्यवस्था को नहीं सुधारा गया तो आने वाले समय में विभिन्न समाजों के लोग एक-दूसरे के साथ बैठना भी पसंद नहीं करेंगे।

सवाल : आपका मकसद एससी-एसटी एक्ट में संशोधन है या आरक्षण हटाना?

देवकीनंदन : इस पर मैं बाद में बोलूंगा। लेकिन, संसद में मौन रहकर सभी ने इस एक्ट को पास होने दिया। क्या इन सभी नेताओं को सिर्फ एससी/एसटी वर्ग का ही वोट चाहिए? यदि ऐसा है तो राजनीतिक दल घोषणा कर दें, कि उन्हें सवर्ण व दूसरे वर्गों के वोट नहीं चाहिए।

सवाल : यदि यह आंदोलन हिंसक हुआ, तो किसकी जिम्मेदारी होगी?

देवकीनंदन : हम लोग सरकार तक जनप्रतिनिधि व अफसरों के माध्यम से अपनी बात पहुंचा रहे हैं। इसमें हिंसक जैसा कुछ नहीं है और हम हर व्यक्ति से अहिंसक व कानून के दायरे में रहकर मुहिम को चलाने की बात कहते हैं।