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मध्यप्रदेश / लक्ष्मीगंज मुक्तिधाम में बच्चों के श्मशान घाट के लिए जगह कम, एक शव को दफनाने हटाना पड़ता है दूसरा



Disorder in Muktidham
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Disorder in Muktidham

  • मुरार मुक्तिधाम में बिजली-पानी का नहीं है इंतजाम, लाेगों ने कर रखे हैं कब्जे, अफसर बोले- मामला दिखवाएंगे

Dainik Bhaskar

Nov 11, 2018, 05:10 AM IST

ग्वालियर . लक्ष्मीगंज मुक्तिधाम में बच्चों का श्मशान घाट बुरे हाल में है। यहां पर जगह की कमी होने के चलते कई बार नवजात से लेकर 10 वर्ष तक के बच्चों के शव को दफन करने के लिए पहले से दफन दूसरे शव  को हटाना पड़ता है। इसी श्मशान से लगी हुई 5 बीघा शासकीय जमीन भी है, जिसका इस्तेमाल श्मशान के विस्तार में हो सकता है।

 

लेकिन इस भूमि पर कई लोगों ने अवैध कब्जे कर रखे हैं, जिसके कारण श्मशान का विस्तार नहीं हो पा रहा है। वहीं चार शहर का नाका स्थित मुक्तिधाम में बच्चों को दफनाने के लिए जगह तो पर्याप्त है, लेकिन बाउंड्रीवॉल न होने से कई बार यहां कुत्ते घुस आते हैं और दफन हुए बच्चों के शवों को खोद लेते हैं। मुरार श्मशान घाट में जहां बच्चों को दफनाया जाता है, वहां बिजली अौर सफाई की पर्याप्त व्यवस्था नहीं होने और नशेड़ियों के घुस आने से परेशानी होती है।

स्थानीय पार्षद मुकेश परिहार ने बताया कि पिछले 35 साल से मुक्तिधाम का विस्तार नहीं हुआ है। गौरतलब है कि दो दिन पूर्व गुढ़ा स्थित श्मशान घाट से सतीश गौड़ के छह माह के बच्चे का शव गायब हो गया था। इस मामले में चौकीदार भी कुछ नहीं बता सका था। परिजन ने इसकी शिकायत पुलिस और क्षेत्रीय विधायक से की थी।

 

अलग-अलग समाज के श्मशान घाट में सर्व समाज के बच्चों का शव दफन होना भी उपाय : लक्ष्मीगंज मुक्तिधाम के आसपास ही मराठा, महाराष्ट्रियन और जैन समाज के भी अलग से मुक्तिधाम बने हैं। यहां पर भी बच्चों के शव दफन करने के लिए पर्याप्त जगह है। लेकिन इन मुक्तिधाम में अमूमन समाज विशेष के बच्चों के शव ही कभी-कभार दफन करने लाए जाते हैं। अगर इन मुक्तिधाम में भी सर्वसमाज के बच्चों की डेडबॉडी दफन करने की पहल शुरू कर दी जाए तो बच्चों के श्मशान घाट के विस्तार की समस्या का कुछ हल निकाला जा सकता है।

 

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विधायक व महापौर तक नहीं बनवा सके बाउंड्रीवॉल : चार शहर का नाका मुक्तिधाम जीर्णोद्धार संरक्षण समिति के अध्यक्ष डॉ.हरिशचंद्र पिपरिया बताते हैं कि बच्चों को दफन करने हमारे पास करीब 3 बीघा जमीन है। लेकिन दफन करने के बाद उनके शवों को सुरक्षित रखने की व्यवस्था के लिए हमने स्थानीय विधायक से लेकर महापौर तक से गुजारिश की कि यहां बाउंड्रीवॉल बनवा दें, तो कुत्तों का आना बंद हो जाएगा। क्योंकि आए दिन वे अंदर घुस आते हैं और शवों को खोद लेते हैं। दो साल से सबसे निवेदन कर रहा हूं, लेकिन कोई नहीं सुन रहा।
 

 

 

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