ग्वालियर / सिलेंडर से लीक हो रही थी गैस, तीली जलाते ही धमाका; पति-पत्नी और पुत्र जिंदा जले

Dainik Bhaskar

Feb 19, 2019, 09:48 AM IST


हादसे में जान गंवाने वाले दंपती और उनका पुत्र। - फाइल फोटो हादसे में जान गंवाने वाले दंपती और उनका पुत्र। - फाइल फोटो
Explosion in the cylinder, husband-wife and son burnt alive
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हादसे में जान गंवाने वाले दंपती और उनका पुत्र। - फाइल फोटोहादसे में जान गंवाने वाले दंपती और उनका पुत्र। - फाइल फोटो
Explosion in the cylinder, husband-wife and son burnt alive
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  • आग इतनी तेजी से फैली की तीनों को बाहर निकलने तक का वक्त नहीं मिला
  • घर के बाहर होने की वजह से परिवार के तीन बच्चे सलामत

ग्वालियर. एलपीजी सिलेंडर से गैस लीक होने के कारण सोमवार रात 8.30 बजे यहां के बहोड़ापुर क्षेत्र में विनय नगर सेक्टर-2 के एक घर में तेज धमाके के साथ आग लग गई। इससे कमरे में मौजूद भारत कुशवाह (40), उनकी पत्नी बसंती (35) और बेटा अर्जुन (12) जिंदा जल गए। तीनों को बाहर निकलने तक का वक्त नहीं मिला।

 

 हादसे में चंद सेकंड में ही पूरा कमरा आग की लपटों से घिर गया और तीनों की तड़प-तड़प कर मौत हो गई। घर के ग्राउंड फ्लोर पर मौजूद भारत की 17 साल की बेटी दीपा, उसकी दादी और परिवार के अन्य सदस्यों को लपटों से घिरे कमरे में दाखिल होने का रास्ता तक नहीं मिला।

 

इसलिए कोई ऊपर जाने की हिम्मत नहीं कर सका। हादसे से कुछ देर पहले ही भारत ने सिलेंडर खाली होने पर दूसरा लगाया था। लेकिन, गैस लीक होती रही और कमरे का गेट बंद होने की वजह से गैस अंदर भर गई। जैसे ही उनकी पत्नी ने चूल्हा जलाने के लिए तीली जलाई तो तेज धमाके के साथ आग लग गई।

 

पुलिस का अनुमान है कि गैस वॉल्व खराब होने की वजह से लीक हुई होगी, क्योंकि इस तरह के मामलों में वॉल्व खराब होने की वजह से रेग्युलेटर सही ढंग से नहीं लगता और गैस लीक होने लगती है। इसकी पड़ताल के लिए पुलिस मंगलवार को फोरेंसिक टीम के साथ घटनास्थल पर जाएगी। भारत मजदूरी कर अपना परिवार पाल रहे थे। जब हादसा हुआ तो उनके तीन बच्चे उस कमरे में नहीं थे। इसलिए वह बच गए। 

 

आंखों देखी- मेरे सामने ही जल गए मम्मी-पापा और भाई 

 

मैं नीचे दादी के कमरे में टीवी देख रही थी। ऊपर कमरे में पापा, मम्मी और छोटा भाई था। मम्मी, पापा के लिए चाय लेकर छत की तरफ गईं। भाई अंदर मोबाइल चला रहा था। चाय बनाने के बाद सिलेंडर से गैस खत्म हो गई तो मम्मी ने पापा को बुलाया। पापा ने दूसरा सिलेंडर लगाया। मैंने सिर्फ इतनी बात सुनी थी।

 

इसके बाद तेज धमाका हुआ। गेट उखड़कर आंगन की तरफ गिरा। मैं सीढ़ी की तरफ गई तो कमरे से आग की लपटें निकल रही थी। मुझे मम्मी-पापा और भाई की चीखें सुनाई दे रहीं थी। आग में कुछ नहीं दिख रहा था। आग की लपटें नीचे की तरफ आने लगीं। दादी मुझे बाहर की तरफ ले गईं। मेरे माता-पिता और भाई मेरी आंखों के सामने जल गए, मैं कुछ नहीं कर पाई। -दीपा कुशवाह, 17 साल

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