ग्वालियर / 5 एसडीओपी को अप्रसन्नता और 4 निरीक्षकों को दी निंदा की सजा



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Dainik Bhaskar

Apr 16, 2019, 01:13 PM IST

ग्वालियर। हत्या के दोषी को पकड़ने में हो रही देरी के मामले में मप्र के पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) वीके सिंह ने हाईकोर्ट में जवाब पेश कर दिया है। उन्होंने बताया कि काम में लापरवाही बरतने के मामले में थाना पिछोर (जिला शिवपुरी) में पदस्थ रहे 5 अनुविभागीय अधिकारियों को अप्रसन्नता (चेतावनी) और चार निरीक्षकों को निंदा की सजा दी है। ये भी बताया कि आरोपी का मोबाइल नंबर पता करने के प्रयास किए जा रहे हैं। मामले की गंभीरता को देखते हुए आईजी ग्वालियर ने आरोपी पर 30 हजार रुपए का ईनाम भी घोषित कर दिया है। 

 

दरअसल, संग्राम को अपर सत्र न्यायालय पिछोर ने 10 जून 2010 को एक मामले में आजीवन कारावास की सजा सुनाई थी। इसके खिलाफ उसने हाईकोर्ट में अपील की जहां उसे सशर्त जमानत का लाभ दिया गया। 2014 से वह कोर्ट में पेशी पर नहीं आया। कोर्ट ने वारंट जारी किया लेकिन तब से वह फरार है। 


इन एसडीओपी को दी सजा: पीएस अहिरवार, सुजीत सिंह भदौरिया, संतोष कुमार तोमर, राजेंद्र मिश्रा, रोहित लखारे। 
इन निरीक्षकों को दी सजा: डीवीएस तोमर, हेमंत शर्मा, धर्मेंद्र यादव, संजीव तिवारी। 

 

क्या होती है निंदा 
ये सजा एसडीओपी रैंक से नीचे के अधिकारियों को दी जाती है। सर्विस बुक में सजा ज्यादा और ईनाम कम हो तो समयमान वेतन समय पर नहीं मिलता, प्रमोशन में भी समस्या आती है। 

 

क्या होती है अप्रसन्नता 
एसडीओपी रैंक के अधिकारी के लिए अप्रसन्नता की सजा गंभीर मानी जाती है। एक से अधिक अप्रसन्नता मिलने पर प्रमोशन भी प्रभावित हो सकता है। 

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