मप्र / हाईकाेर्ट ने कहा- जैविक माता-पिता के पास संतान का पहुंचना बंदी बनाना नहीं

High court said - no access to offspring to biological parents
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High court said - no access to offspring to biological parents

  • गोद दी बच्ची को पंजाब के माता-पिता ले गए तो भिंड के दंपती ने कोर्ट से लगाई गुहार

Dainik Bhaskar

Dec 15, 2019, 03:19 AM IST

ग्वालियर . जैविक माता-पिता के पास संतान का पहुंचना उसे बंदी बनाना नहीं माना जा सकता है। यह कहते हुए ग्वालियर हाईकाेर्ट की युगलपीठ ने भिंड के एक नि:संतान दंपती की अपील काे खारिज कर दिया। याचिकाकर्ता ने काेर्ट से गुहार की थी कि उनकी गाेद ली गई बेटी काे पंजाब निवासी उसके जैविक माता-पिता ने बंदी बना रखा है, लिहाजा उसे वापस दिलाया जाए। हाईकोर्ट ने यह भी कहा कि जिस गोदनामा के आधार पर वह बच्ची के माता-पिता होने का दावा कर रहे हैं, उसे निरस्त कराने के लिए सिविल कोर्ट में पहले से मामला विचाराधीन है। यदि वे बच्ची की कस्टडी चाहते हैं, तो वहां आवेदन पेश कर सकते हैं। कोर्ट ने दंपती द्वारा कुछ तथ्य छिपाने पर भी नाराजगी जताई।

सितंबर 2017 में गोद ली थी बेटी
भिंड के निसंतान दंपति ने पंजाब के दंपती से सितंबर 2017 में 4 दिन की बेटी गोद ली थी। इसके लिए उन्होंने गोदनामा भी तैयार किया था। मार्च 2019 में बच्ची के जैविक माता-पिता पंजाब से भिंड आए। वे बच्ची को घुमाने का कहकर बिना बताये पंजाब ले कर रवाना हो गए। भिंड के दंपती ने हाईकोर्ट में 26 जून 2019 काे बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका दायर की। इसमें आरोप लगाया कि कानूनी प्रक्रिया पूरी होने के बाद जैविक माता-पिता का बच्ची पर कोई अधिकार नहीं रह जाता। कोर्ट ने 26 अगस्त 2019 काे याचिका को यह कहते हुए खारिज कर दिया कि बच्ची अपने जैविक माता-पिता के पास है।

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