मप्र / हाईकोर्ट ने कहा- निलंबन अवधि सुखद क्षण बिना काम आधा वेतन मिलता है, बर्खास्त करें



High Court said- Suspension period is a happy moment without half salary paid, dismiss
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High Court said- Suspension period is a happy moment without half salary paid, dismiss

  • ग्वालियर में फॉगिंग व कीटनाशक छिड़काव में लापरवाही पर निगमायुक्त ने माफी मांगी
  • निगमायुक्त की सफाई- 3 लोगों  को सस्पेंड किया

Dainik Bhaskar

Jul 12, 2019, 04:31 AM IST

ग्वालियर . शहर में फॉगिंग और कीटनाशक छिड़कने में लापरवाही बरतने के मामले में नगर निगम कमिश्नर संदीप माकिन गुरुवार को हाईकोर्ट में पेश हुए। उन्होंने रिपोर्ट पेश करने में हुई लापरवाही पर बिना शर्त माफी मांगी और बताया कि तीनों विधानसभाओं के फॉगिंग सुपरवाइजरों को निलंबित कर दिया है।

 

विधानसभावार, जिन अधिकारियों को मॉनिटरिंग का जिम्मा दिया था, उन्हें भी दो-दो वेतन क्रमोन्नति रोकने का नोटिस दिया है। इस पर जस्टिस संजय यादव और जस्टिस विवेक अग्रवाल की डिवीजन बेंच ने कहा - गलती करने वाले कर्मचारियों को निलंबित नहीं बल्कि बर्खास्त करना चाहिए और नए लोगों को मौका देना चाहिए। ऐसे कर्मचारियों के लिए निलंबन अवधि सुखद क्षण होता है, बिना काम आधा वेतन मिलता है। 


 दरअसल, एडवोकेट अवधेश सिंह भदौरिया ने जनहित याचिका दायर करते हुए स्वाइन फ्लू, मलेरिया जैसी बीमारियों की रोकथाम के लिए शहर में नियमित फॉगिंग और कीटनाशक छिड़काव की मांग की है। हालांकि गुरुवार को हुई सुनवाई में निगम के जवाब पर संतुष्टि जताई।  हुए कोर्ट ने कहा कि मॉनसून शुरू हो चुका है। निगम अमला पूरी जिम्मेदारी के साथ फॉगिंग व छिड़काव करे। ऐसा न हो कि पॉश कालोनियों में छिड़काव हो और मलिन बस्तियां छूट जाएं। 

 

जिन्हें नोटिस थमाया, उन्हें ही फिर से दी जिम्मेदारी  : निगम कमिश्नर ने बताया कि फॉगिंग और कीटनाशक छिड़काव के लिए फिर से विधानसभावार व्यवस्था बनाई गई है। हालांकि इसमें चौंकाने वाली बात ये है कि जिन अधिकारियों को लापरवाही का दोषी ठहराते हुए नोटिस जारी किया गया है, उन्हें ही फिर से मॉनिटरिंग का जिम्मा दिया गया है।


स्वीकारा 25 में से महज 15 मशीनें ही चालू : कोर्ट के पूछने पर कमिश्नर ने बताया कि फॉगिंग मशीन की संख्या 25 है हालांकि उसमें से केवल 15 मशीन ही चालू हैं। कोर्ट ने कहा कि मशीनों की संख्या कम है। निगम जल्द ही नई मशीनें खरीदे।

 

चाचौड़ा के मामले पर नाराजगी : एक पुलिस अधिकारी की हत्या के मामले में ही पुलिस आलस दिखा रही है चाचौड़ा थाने के प्रभारी वीर सिंह सप्रा की वर्ष 2006 में हुई हत्या की जांच में लापरवाही बरतने पर हाईकोर्ट ने कड़ी नाराजगी जताई है। एसपी गुना राहुल सिंह के जवाब से असंतुष्ट होकर हाईकोर्ट ने आईजी ग्वालियर राजाबाबू सिंह से शपथ-पत्र पर जवाब मांगा है। कोर्ट ने कहा कि एक पुलिस अधिकारी की हत्या के मामले में ही पुलिस आलस दिखा रही है। एडवोकेट राजमणि बंसल ने बताया कि 2006 में समाज विशेष के लोगों ने सप्रा की हत्या कर दी थी। 44 में से अब तक 11 आरोपियों की ही पहचान हो सकी है। संपत्ति कुर्की की कार्रवाई में भी पुलिस लापरवाही बरत रहा है। इसको लेकर मृतक की पत्नी रेखा ने याचिका दायर की थी।

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