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  • I Will Start A Sugar Mill, Kamal Nath Scindia Had The Same Promise, The Reality The Government Prepares To Sell The Property

मैं चालू कराऊंगा शुगर मिल, कमलनाथ-सिंधिया का भी था यही वादा, हकीकत- सरकार ने की संपत्ति बेचने की तैयारी

2 वर्ष पहले
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  • वादाखिलाफी- शुगर मिल चालू कराने का ढोल पीटते रहे शिवराज
  • कमलनाथ-सिंधिया ने भी विस चुनाव की सभा में कारखाना चालू करवाने का वादा कर तालियां और वोट बटोरे

मुरैना। कैलारस शुगर मिल; भारतीय जनता पार्टी के पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान, सांसदी का चुनाव जीतने वाले अनूप मिश्रा, फिर इसके बाद विधानसभा चुनाव में कमलनाथ अाैर ज्योतिरादित्य सिंधिया ने भी चुनावी सभाओं में मुरैना, जौरा, कैलारस, सबलगढ़ के हजारों किसानों को आश्वासन दिया कि हम हर हाल में कैलारस शक्कर कारखाना चालू कराएंगे। लेकिन हकीकत यह है कि दोनों दलों के नेताओं ने सिर्फ किसानों व जनता की भावनाओं से खिलवाड़ किया। राज्य शासन ने कैलारस शुगर मिल के परिसमापन (संपत्ति बेचकर प्राप्त धन से ऋण चुकाना) की कार्रवाई चालू कर दी है। इसके लिए बाकायदा सहकारिता आयुक्त ने उप पंजीयक को परिसमापक अधिकारी नियुक्त कर दिया है लेकिन सरकार के इस फैसले की जानकारी प्रभारी मंत्री लाखन सिंह यादव को नहीं थी।


शनिवार को मुरैना प्रवास के दैारान प्रभारी मंत्री यादव ने पत्रकारवार्ता में कह दिया कि सरकार शक्कर कारखाना चालू कराएगी। लेकिन उन्हें या तो यह नहीं पता था कि सरकार ने कारखाना बंद करने की तैयारी शुरू कर दी है अथवा वह जानबूझकर मीडिया के जरिए जनता को गुमराह किया जा रहा था। पत्रकारवार्ता में यह पूछे जाने पर कि आप शुगर मिल चालू करने की बात कर रहे हैं लेकिन सरकार इसे बंद करने की तैयारी में है। यह सुनते ही प्रभारी मंत्री पहले झेंपे फिर बोले-हां मैंने भी सुना था लेकिन अब ऐसा नहीं होगा।

भाजपा शासन में ही तैयार हो चुका था कारखाना बंद कराने का गणित
सहकारिता आयुक्त एमके अग्रवाल ने इस कारखाना को बंद कराने की पूरा गणित बना दिया है। जबकि विधानसभा चुनाव में सबलगढ़ विधायक बैजनाथ कुशवाह, विजयपुर से कांग्रेस के टिकट पर चुनाव हारे रामनिवास रावत व जौरा विधायक बनवारी लाल शर्मा ने चुनाव में वोट मांगने के दौरान शक्कर कारखाना को चालू कराने के वादे किए थे। शिवराज सरकार के दौरान खुद पूर्व सीएम शिवराज सिंह चौहान समेत पूर्व सांसद अनूप मिश्रा ने जनता से चुनावों में शक्कर कारखाना शुरू कराने के वादे किए थे।


पूर्व सीएम शिवराज सिंह चौहान ने इस दिशा में आठ लाख रुपए खर्च कर कारखाना को फिर से चालू कराने की दिशा में नेशनल शुगर फैडरेशन से एक एक्सपर्ट रिपोर्ट तैयार कराई लेकिन उस रिपोर्ट में कारखाना को चालू कराने के लिए 25 करोड़ रुपए की अनुशंसा थी इसलिए भाजपा सरकार ने उस रिपोर्ट को रद्दी की टाेकरी में डाल दिया। तब पूर्व केन्द्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया ने पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान को एक पत्र लिखकर कारखाना को फिर से चालू कराने का आग्रह किया था।

पीपीपी मोड पर चलाने का प्रयास भी विफल
जौरा, सबलगढ़ व विजयपुर विधानसभा क्षेत्र के गन्ना उत्पादक 10 हजार किसानों व 500 कर्मचारियों से जुड़े शक्कर कारखाना को पब्लिक प्राइवेट पार्टनरशिप मोड पर चलाने का प्रयास भी शिवराज सरकार के कार्यकाल में हुआ। इसके लिए बरेली,दतिया के अलावा सहारनपुर के तीन उद्यमियों में अपने ऑफर लैटर पूर्व चंबल कमिश्नर एमके अग्रवाल को सौंपे थे। लेकिन उन तीनों उद्यमियों में से सहकारिता विभाग ने किसी को भी कारखाना संचालित करने का आदेश नहीं दिया। क्योंकि मुरैना से लेकर भोपाल तक किसी स्तर पर कारखाने को पीपीपी मोड पर चलाने की कार्ययोजना नहीं बनाई गई थी।

हकीकत : सरकार नहीं चलाएंगी शक्कर कारखाना
सहकारिता आयुक्त एमके अग्रवाल ने आदेश जारी किया है कि कैलारस शक्कर कारखाना का परिसमापन किया जाना है। इसकी प्राॅपर्टी का मूल्यांकन किया जाए। साथ ही जो देनदारियां हैं उनके दावे आमंत्रित कर लिए जाएं। ताकि परिसमापन से पहले संबंधित लोगों को भुगतान किया जा सके।

29 करोड़ की देनदारियां बकाया
2008-09 से बंद शक्कर कारखाना की देनदारियां 24 करोड़ रुपए से बढ़कर 29 करोड़ रु हो गई हैं। इसमें 13 करोड़ रुपए कर्मचारियों के वेतन व स्वत्वों के हैं । तथा 16 करोड़ रुपए का भुगतान किसानों समेत अन्य पक्षों का है।

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