• Hindi News
  • Local
  • Mp
  • Gwalior
  • Gwalior Madhya Pradesh News In Hindi:international Womens Day Special Story Of Country First Woman Deputy Commandant  Tanushree

ये हैं देश की पहली महिला डिप्टी कमांडेंट तनुश्री, अब बॉर्डर पर संभालेंगी मोर्चा, बचपन में ‘बॉर्डर’ की शूटिंग देख आर्मी अफसर बनने की ठानी थी

3 वर्ष पहले
  • कॉपी लिंक

ग्वालियर/मध्य प्रदेशगांवों में अभी भी बेटियों को लेकर सोच में बदलाव नहीं आया है। लोग अभी भी यह सोचते हैं कि सिर्फ बेटियां होने पर परिवार पूरा नहीं हो सकता। परिवार में एक बेटा भी होना चाहिए। दरअसल, इंडिया और भारत के बीच में अभी भी यही अंतर (डिफरेंस) है। गांवों में लोगों की सोच है कि महिलाएं सिर्फ टीचिंग या नर्सिंग जैसे काम करें और सुबह-शाम घर का चौका-बर्तन भी करें।


यह कहना है बीएसएफ की पहली महिला असिस्टेंट कमांडेंट (कॉम्बेट अधिकारी) तनुश्री पारीक का। बीएसएफ अकादमी टेकनपुर में ट्रेनिंग ले रहीं तनुश्री की 16 मार्च को ट्रेनिंग पूरी हो जाएगी। इसके साथ ही वे पहली महिला डिप्टी कमांडेंट होंगी, जो ट्रेनिंग के बाद पंजाब के फाजिल्का बॉर्डर पर तैनात की जाएंगी। मालूम हो कि बीएसएफ में पहले भी महिलाओं की पोस्टिंग होती रही है, लेकिन कॉम्बेट अधिकारी के रूप में (कॉम्बेट यानी युद्ध के लिए तैनाती) तनुश्री पहली महिला हैं।

तनुश्री ने कहा- गांवों में हालत यह थे कि महिलाएं घरों से बाहर ही नहीं निकलती थीं


तनुश्री कहती हैं कि वर्ष 2014 में बीएसएफ की नौकरी ज्वाइन करने के बाद 15 अगस्त 2015 से अक्टूबर 2015 तक बेटी बचाओ- बेटी पढ़ाओ अभियान के अंतर्गत लोगों को जागरूक करने के लिए बाड़मेर में बॉर्डर पर ऊंट की सवारी कर टीम के साथ गए। हमें ऊंट पर देखकर वहां के लोग चौक गए। आमतौर पर बाड़मेर के ग्रामीणों का मानना है कि ऊंट को केवल पुरुष ही कंट्रोल कर सकते हैं। ऐसे में किसी महिला को ऊंट की सवारी करता देख, वह लाेग आश्चर्यचकित हो जाते थे। गांवों में हालत यह थे कि महिलाएं घरों से बाहर ही नहीं निकलती थीं, उन्हें समझाने के लिए घर-घर जाना पड़ता था। इस दौरान कई महिलाएं हमसे हमारे पारिवार के बारे में पूछती थीं। हम उन्हें बताते थे कि हमारे परिवार में माता-पिता के अलावा मुझसे बड़ी एक बहन और है। बचपन में ‘बॉर्डर’ की शूटिंग देख आर्मी अफसर बनने की ठानी थी।

तनुश्री ने कहा- लोग लड़कियों के बारे में ऐसा सोचते हैं, मैंने इससे पहले यह सिर्फ किताबों में ही पढ़ा था


वो यह सुनकर आश्चर्य करती थीं कि घर में भाई नहीं है और ये लड़की होकर भी बीएसएफ जैसी कठिन नौकरी में है। लोग लड़कियों के बारे में ऐसा सोचते हैं, मैंने इससे पहले यह सिर्फ किताबों में ही पढ़ा था, लेकिन जब ग्राउंड पर जाकर देखा तो लगा कि वास्तव में इंडिया और भारत में अभी डिफरेंस है।


बीएसएफ ने 2013 में महिलाओं को ऑपरेशन ड्यूटी की अनुमति दी, अगले ही साल चुनीं गईं तनुश्री


बीएसएफ की स्थापना तो 1965 में हुई थी, लेकिन इसमें महिलाओं को ऑपरेशन ड्यूटीज के लिए आवेदन करने की अनुमति 2013 में दी गई। चार चरणों की कठिन भर्ती प्रक्रिया का सामना करने के बाद राजस्थान के बीकानेर की रहने वाली तनुश्री 2014 में बीएसएफ की पहली महिला असिस्टेंट कमांडेंट (कॉम्बेट अधिकारी) के रूप में चुनी गईं। टेकनपुर अकादमी में अपने साथ प्रशिक्षण प्राप्त करने वाले 67 प्रशिक्षु अधिकारियों की पासिंग आउट परेड का नेतृत्व भी तनुश्री ने ही किया था। तनुश्री ने बीकानेर के गवर्नमेंट इंजीनियर कॉलेज से इंजीनियरिंग की डिग्री हासिल की है। तनुश्री का कहना है घर में पहले से ही काफी खुला हुआ माहौल मिला और उनके बीएसएफ ज्वॉइन करने के फैसले में परिवार ने भी पूरा सहयोग किया।