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सोन भद्रिका नदी का 62 साल पुराना पुल हुआ जर्जर

आलमपुर-रतनपुरा मार्ग पर सोन भद्रिका नदी पर वर्ष 1956 में तुकोजीराव होल्कर ने आवागमन के लिए पुल का निर्माण कराया था।...

Danik Bhaskar | May 18, 2018, 03:10 AM IST
आलमपुर-रतनपुरा मार्ग पर सोन भद्रिका नदी पर वर्ष 1956 में तुकोजीराव होल्कर ने आवागमन के लिए पुल का निर्माण कराया था। यह पुल 62 साल पुराना हो चुका है, जो अब पूरी तरह से जर्जर हालत में है। पुल से होकर प्रति दिन हजारों छोटे-बड़े वाहनों का तांता लगा रहता है। जिससे यहां कभी भी बड़ा हादसा होने की संभावना बनी रहती है। हालांकि नवीन पुल निर्माण के लिए ग्वालियर की कंपनी ने एक साल पूर्व ठेका लिया था। जिसका निर्माण टेंडर जारी होने के बाद भी प्रारंभ नहीं कराया गया है। खास बात यह है कि विभागीय अधिकारियों ने भी पुल की स्थिति को नजर अंदाज कर दिया है।

अनदेखी

आलमपुर में होल्कर स्टेट के समय नदी पर बने पुल का टेंडर जारी होने के बाद भी शुरू नहीं हो सका निर्माण कार्य

रेलिंग भी टूटकर नदी में गिरी

होल्कर स्टेट के राजाओं द्वारा बनाए गए पुल की नदी के तल से लंबाई 12 किमी है, चौड़ाई 10 फीट है, जो 60 मीटर की लंबाई में फैला हुआ है, जो केवल पांच पिलर पर खड़ा है। पुल के तीन पिलर में दरारें आने के साथ ही इससे सीमेंट टपकता रहता है। पुल की सही देखरेख और जांच के अभाव में वाहन चालकों को पुल से होकर गुजरने में भय महसूस होता है। मालूम हो कि सालों पुराने इस पुल की अभी तक मरम्मत नहीं कराई गई है। पुल के ऊपर साइड में दोनों तरफ लगी रेलिंग भी टूटकर नदी में गिर चुकी है। इस अवस्था में यहां से रात के वक्त अंधेरे में निकलने वाले वाहनों को बड़ी सावधानी से निकलना पड़ता है।

बरसात में नहीं दिखता पुल

बरसात होने के बाद जब नदी में पानी का अधिक बहाव आता है तो यह पुल पूरी तरह से डूब जाता है, उस वक्त इस मार्ग से वाहनों का आवागमन पूरी तरह से बाधित होता है। बता दें कि पुल से होकर लहार, दबोह, ग्वालियर, दतिया, जयपुर, दिल्ली सहित आदि स्थानों के लिए सवारी वाहनों की आवाजाही रहती है। वाहन चालक पुल से होकर बड़ी सावधानी से वाहन निकालते हैं, क्योंकि चालकों को खतरा रहता है कि जर्जर पुल पर कहीं हादसा न हो जाए। नगर वासियों ने पुल की मरम्मत के लिए पूर्व में प्रशासन के अधिकारियों से मांग भी की थी, इसके बाद नदी पर नवीन पुल मंजूर किया गया। हालांकि निर्माण के लिए टेंडर भी जारी कर दिया गया है, जिसका ठेका ग्वालियर के मोहरसिंह जादौन ने लिया है। लेकिन काम किन कारणों से शुरू नहीं हुआ है, इसके संबंध में किसी भी विभागीय अधिकारी ने चर्चा नहीं की है।

रहता है वाहनों को खतरा


टेंडर हो चुका है, बात करेंगे