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ईश्वर को पाना है तो अभिमान को छोड़ना होगा: गुंजन

प्रभु श्री कृष्ण अपने मित्रों को खुश करने के लिए माखन चुराते थे। इस परमार्थ के लिए वह खुद माखन चोर बन गए। यदि हमें...

Bhaskar News Network | Last Modified - Apr 17, 2018, 02:55 AM IST

प्रभु श्री कृष्ण अपने मित्रों को खुश करने के लिए माखन चुराते थे। इस परमार्थ के लिए वह खुद माखन चोर बन गए। यदि हमें प्रभु को पाना है तो अभिमान रूपी छड़ी फेंकनी होगी। जब तक हम अभिमान रूपी छड़ी नहीं फेंकेंगे तक तक हमें प्रभु की प्राप्ति नहीं हो सकती। यह बात राजा बाक्षर मंदिर पर चल रही श्रीमद् भागवत कथा के पांचवें दिन सुश्री गुंजन वशिष्ठ ने कही। कथा में सोमवार को 56 भोग भी लगाए गए। साथ ही गोवर्धन की पूजा भी हुई। इसके अलावा नंदोत्सव भी मनाया गया।

पूर्णाहुति के साथ हुआ देवी भागवत कथा का समापन: 7 अप्रैल से हजीरा स्थित मनोरंजनालय मैदान में चल रही श्रीमद् देवी भागवत कथा का समापन सोमवार को पूर्णाहुति के साथ हुआ। पूर्णाहुति के बाद सुबह भंडारा हुआ।

भागवत कथा

राजा बाक्षर मंदिर में 56 भोग लगाया गया। दूसरे चित्र में कथा सुनते श्रद्धालु।

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