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जेईई ऑनलाइन एक्जाम: रिवाइज किया पेपर और गलती भी सुधारीं

शहर के बड़ागांव स्थित बीवीएम कॉलेज में सोमवार को जेईई मेन का ऑनलाइन एक्जाम हुआ। इसमें 660 स्टूडेंट्स ने दो घंटे में...

Bhaskar News Network | Last Modified - Apr 17, 2018, 03:00 AM IST

जेईई ऑनलाइन एक्जाम: रिवाइज किया पेपर और गलती भी सुधारीं
शहर के बड़ागांव स्थित बीवीएम कॉलेज में सोमवार को जेईई मेन का ऑनलाइन एक्जाम हुआ। इसमें 660 स्टूडेंट्स ने दो घंटे में क्वेश्चन सॉल्व किए। जबकि पहले दिन रविवार को 824 परीक्षार्थी शामिल हुए। एक्जाम का रिपोर्टिंग टाइम सुबह 7 बजे निर्धारित किया गया था, इसलिए सुबह से ही कॉलेज के मेन गेट पर स्टूडेंट्स की लाइन लगना शुरू हो गई थी। दो चरणों में हुई चेकिंग में ब्वॉयज और गर्ल्स के लिए अलग-अलग चेकिंग स्क्वाड तैनात किया गया। सभी परीक्षार्थियों का क्लास में एक्जाम हॉल से पहले बायोमैट्रिक टेस्ट लिया गया। इसमें कैमरे से सभी के चेहरे मिलाए गए, ताकि परीक्षा में कोई फर्जी परीक्षार्थी शामिल न हो सके। सेकंड गेट पर चेकिंग के बाद ही परीक्षार्थियों को एक्जाम सेंटर में घुसने दिया गया। एक्जाम देने आए परीक्षार्थियों ने कहा कि ऑनलाइन एक्जाम टफ होने के साथ चेकिंग भी काफी बेहतर रही।

सोमवार को ग्वालियर के बड़ागांव स्थित बीवीएम कॉलेज में जेईई-मेन का ऑनलाइन एक्जाम हुआ

Jee Online ‌Exam

ये है ऑनलाइन और ऑफलाइन एक्जाम में अंतर

ऑनलाइन एक्जाम

इसमें एक बार क्वेश्चन सॉल्व करने के बाद उसमें संशोधन किया जा सकता है।

स्टूडेंट्स को हर पोर्शन का एक्युरेट स्कोर हाल ही पता चल जाता है।

दो घंटे तक स्क्रीन पर आंखें गढ़ाए रखने से सिरदर्द और चक्कर की प्रॉब्लम भी आती है।

पूरे पेपर को दोबारा से रिवाइज कर गलत को सही किया जा सकता है।

स्क्रीन पर ही क्लॉक चलने से एक-एक मिनट का सही हिसाब रहता है।

ऑफलाइन एक्जाम

इसमें एक बार ऑप्शन पर टिक कर देने के बाद आंसर को सही नहीं किया जा सकता।

इसमें बॉल क्लॉक के हिसाब से क्लासरूम में हर क्वेश्चन को टाइम देना पड़ता है।

हाथ में पेपर आ जाने से उसे आराम से पढ़ सकते हैं, आंखें दर्द नहीं करती है।

मैथ्स, केमिस्ट्री और फिजिक्स के फिगर पर ही पेंसिल चलाकर उसे सॉल्व कर सकते हैं।

पेपर को दोबारा से रिवाइज कर उसमें संशोधन नहीं किया जा सकता।

मैथ्स रहा कठिन, केमिस्ट्री में किया ज्यादा स्कोर

एक्सपर्ट बालेंदु चांदिल ने बताया कि ऑफलाइन और आॅनलाइन पेपर में ज्यादा अंतर नहीं था। दोनों ही पेपर स्टैंडर्ड बनाए गए थे। इसमें मैथ का पोर्शन थोड़ा कठिन था, इसलिए परीक्षार्थियों को यह पोर्शन सॉल्व करने में बाकी दो पोर्शन केमिस्ट्री और फिजिक्स से ज्यादा समय लगा। इसी वजह से तीनों पोर्शन को समय से बैलेंस नहीं कर पाए।

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