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एस-3 पर उपद्रव के लिए उकसाने का शक

गत 2 अप्रैल को शहर और अंचल में उपद्रव के कारणों की जांच में जुटी पुलिस को एस-3 नाम के संगठन के खिलाफ पुख्ता सबूत हाथ...

Bhaskar News Network | Last Modified - Apr 17, 2018, 03:20 AM IST

गत 2 अप्रैल को शहर और अंचल में उपद्रव के कारणों की जांच में जुटी पुलिस को एस-3 नाम के संगठन के खिलाफ पुख्ता सबूत हाथ लगे हैं। एस-3 का पूरा नाम है- सम्यक समाज संघ। आरोप है कि इस संगठन ने एक वर्ग विशेष के बीच आरक्षण खत्म होने की अफवाह फैलाई और लोगों को विरोध करने के लिए उकसाया। लाल कपड़े पहनकर आए कुछ लोगों ने सुप्रीम कोर्ट के फैसले का विरोध करने के लिए आंदोलन करने की अपील की। शेष|पेज 13 पर

अलग-अलग बस्तियों में पुलिस ने बैठकें लेकर निकाला सुराग

एस-3 का अध्यक्ष अंडरग्राउंड

पुलिस की पड़ताल में सामने आया है कि एस-3 का राष्ट्रीय अध्यक्ष लाखन सिंह बौद्ध उपद्रव के दो दिन पहले से अंडरग्राउंड हो गया था। पुलिस को जो सूचनाएं मिलीं उनके अनुसार उसने बाहर से लाल कपड़े पहने कुछ लोग बुलवाए थे। इन लोगों ने मोहल्लों में सभाएं लीं। पुलिस की नजर में लाखन सिंह ही इस संगठन का मास्टरमाइंड है। उसकी फेसबुक प्रोफाइल से भी कई भड़काऊ पोस्ट मिली हैं।

कौन है लाखन सिंह बौद्ध

लाखन सिंह ग्वालियर कलेक्टोरेट की नजूल शाखा में भृत्य था। भ्रष्टाचार और अन्य मामलों में लिप्त होने के चलते 24 फरवरी को उसे बर्खास्त किया गया। रिटायर्ड लेफ्टिनेंट कर्नल एसबी सिंह ने 17 नवंबर 2015 को जनसुनवाई के दौरान शिकायत की थी कि उनसे नजूल एनओसी देने के नाम पर 21 हजार रुपए की मांग की गई थी। इस राशि का चेक लाखन सिंह के खाते में जमा हुआ था। इंटेलीजेंस से मिली जानकारी के अनुसार लाखन पूरे अंचल में डा. आंबेडकर की प्रतिमाएं लगाकर जमीन घेरता है। मितावली और डबरा में लगाई गईं प्रतिमाओं के मामले में भी इसकी सक्रिय भूमिका की पुष्टि हुई है।

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