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रात 10 बजे लगा दुष्कर्म का आरोप, सुबह लगा ली फांसी

दुष्कर्म के आरोप से व्यथित हाईकोर्ट के चपरासी रमेश चंद्र रजक (55) ने गुरुवार सुबह फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली।...

Danik Bhaskar | May 18, 2018, 04:10 AM IST
दुष्कर्म के आरोप से व्यथित हाईकोर्ट के चपरासी रमेश चंद्र रजक (55) ने गुरुवार सुबह फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली। चपरासी पर उनके परिवार की सदस्य महिला ने ही दुष्कर्म का आरोप लगाया था। इसके अलावा उनके बेटे पर भी प्रताड़ना का आरोप लगाया गया है। इस पर पुलिस ने रात 10 बजे एफआईआर दर्ज कर बेटे को हिरासत में ले लिया था। सुबह 4 बजे चपरासी ने घर पर फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली। आत्महत्या की सूचना मिलने के बाद पुलिस ने बेटे को छोड़ दिया था। इसके बाद ही पोस्टमार्टम शुरू हो सका।

थाटीपुर के न्यू जीवाजी नगर निवासी रमेश चंद्र पर उनकी परिवार की महिला सदस्य द्वारा दुष्कर्म का आरोप लगाए जाने के बाद पुलिस ने रमेश के बेटे ब्रजेंद्र को हिरासत में ले लिया था। घर पर रमेश, उनकी प|ी सुधा और छोटा बेटा शिवम रह गया था। सुबह 4 बजे रमेश चंद्र जाग गए और टहलने की कहकर छत पर चले गए थे। लगभग आधा घंटे बाद प|ी सुधा छत पर पहुंचीं तो वह यहां बने कमरे में फांसी के फंदे पर लटक रहे थे। फांसी लगाने के लिए उन्होंने केबल का उपयोग किया था। सुधा यह हालत देखकर चीखीं और छत पर ही गिर पड़ीं। चीख सुनकर छोटा बेटा शिवम भी छत पर पहुंचा और पड़ोसियाें तथा पुलिस को इसकी सूचना दे दी।

यह मामला दर्ज कराया

टीआई रविंद्र गुर्जर के अनुसार, रमेश चंद्र के परिवार की महिला सदस्य ने थाने में कहा कि 29 अप्रैल को परिवार के सदस्य शादी समारोह में गए थे। इस दौरान वह घर में अकेली थी। रमेश चंद्र रात लगभग 2 बजे उसके कमरे में पहुंच गए और जान से मारने की धमकी देकर दुष्कर्म कर दिया। यह बात परिवार को भी बताई थी। लेकिन किसी ने उसकी बात पर ध्यान नहीं दिया बल्कि बंधक और बना लिया। 15 मई को उसे मौका मिला और वह अपने दो बच्चों सहित बानमोर स्थित मायके चली गई और घटना की जानकारी भाई को दी। इसके बाद बुधवार की रात को पुलिस के पास पहुंची थी।

रमेश चंद्र रजक

पिता को फंसाया गया है, वह व्यथित थे

मेरे पिता के खिलाफ दुष्कर्म का झूठा मामला दर्ज कराया गया है। मामला दर्ज कराने वाली महिला 11 मई को ही घर छोड़कर चली गई थी, वह भी अपने रिश्ते के जेठ के साथ। उसके साथ महिला के संबंध दोस्ताना थे। इसकी गुमशुदगी रिपोर्ट भी थाने में दर्ज कराई गई थी। महिला से आचरण सुधारने के लिए पिता ने कहा था। शायद इसलिए ही उन्हें झूठे आरोप में फंसा दिया गया है। इस आरोप के बाद से ही पिता व्यथित थे। पुलिस ने मुझे शाम से ही थाने में बैठा लिया था। रात 8.30 बजे पिता रमेश चंद्र ने उसे फोन किया था और कहा था वह भी थाने आ रहे हैं। इस दौरान वह रो भी रहे थे। इसके बाद सुबह उनकी मौत की खबर ही आई, तब पुलिस ने उसे छोड़ा। - ब्रजेंद्र, मृतक का बेटा