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मिट्टी से बनी प्रतिमा ही है शास्त्र सम्मत, पीओपी मतलब महापाप

नवरात्र, गणेशोत्सव या अन्य उत्सव में पीओपी की जगह मिट्टी की मूर्ति स्थापित करना ही शास्त्र सम्मत है। पूजा के लिए...

Danik Bhaskar | May 18, 2018, 04:15 AM IST
नवरात्र, गणेशोत्सव या अन्य उत्सव में पीओपी की जगह मिट्टी की मूर्ति स्थापित करना ही शास्त्र सम्मत है। पूजा के लिए अस्थायी तौर पर विराजित प्रतिमा का यदि विधि विधान से विसर्जन नहीं किया जाता है तो साधक को जनधन हानि की बात शास्त्र कहते हैं। पीओपी की मूर्ति का पूजन, विसर्जन जलीय जीव व पर्यावरण के लिए हानिकारक है। यह कहना है शास्त्रों के ज्ञाताओं का। गुरुवार को दैनिक भास्कर में रमौआ डेम में विसर्जन के 229 दिन बाद भी देवी प्रतिमा न घुलने वाला फोटो प्रकाशित हुआ था, जिसे लेकर तीखी प्रतिक्रिया हुई है।

ज्योतिष विज्ञान अध्ययन शाला विक्रम विवि उज्जैन के प्राध्यापक डॉ. राजेश्वर शास्त्री मुसलगांवकर के अनुसार, शास्त्रों में कहा गया है कि मिट्टी की बनी प्रतिमा को बहते हुए दरिया में प्रवाहित करना चाहिए। जो लोग पीओपी से बनी मूर्तियों का जो पूजन करते हैं या करवाते हैं। वह दोनों ही महापातक (घोर पाप) के अधिकारी हैं। ज्योतिषाचार्य पं. विजयभूषण वेदार्थी ने कहा, मिट्टी की बनी मूर्तियों में चल प्रतिष्ठा कुछ समय अवधि के लिए की जाती है। पीओपी की मूर्ति का जलाशय में विधि पूर्वक विसर्जन न हो तो साधक को जन-धन हानि की संभावना रहती है।

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