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मस्जिदों में एक दिन पहले पढ़ी गई तराबी

रमजान के पवित्र महीने की शुरुआत से पहले शहर की मस्जिदों में तराबी (विशेष नमाज) पढ़ी गई। शहर काजी ने बताया कि...

Bhaskar News Network | Last Modified - May 18, 2018, 04:20 AM IST

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    रमजान के पवित्र महीने की शुरुआत से पहले शहर की मस्जिदों में तराबी (विशेष नमाज) पढ़ी गई। शहर काजी ने बताया कि मस्जिदों में तराबी रात 9 से 11 बजे तक पढ़ी गई। इस मौके पर मोती मस्जिद पर बड़ी संख्या में मुस्लिम समाज के लोग पहुंचे। हर मस्जिद पर अलग-अलग समय के लिए तराबी पढ़ी जाएगी। मोती मस्जिद पर तराबी 20 दिनों तक पढ़ी जाएगी। इसके बाद सूरत तराबी शुरू हो जाएगा।

    लोहिया बाजार स्थित मस्जिद में 10 दिन, हनुमान चौराहा स्थित मस्जिद में 10 दिन, हाईकोर्ट के पास स्थित मस्जिद में 28 दिन तराबी पढ़ी जाएगी। कुरान शरीफ में 30 पारे हैं जो तराबी के दौरान पढ़े जाएंगे। पहला रोजा शुक्रवार को रखा जाएगा। सेहरी 3.55 पर रहेगी और इफ्तार शाम 07.07 बजे होगा। रोजे के दौरान महिलाएं घर में ही कुरान शरीफ की तिलावट करेंगी। यदि 29 वें रोजे के दिन चांद दिख गया तो 30 वें दिन ईद मनाई जाएगी। यदि 29 वें दिन चांद नहीं दिखा तो 30वां रोजा भी रखा जाएगा और अगले दिन ईद मनाई जाएगी। ईद की नमाज का समय ईद से चार या पांच दिन पहले तय होगा।

    रमजान को लेकर लोगों ने की खरीदारी

    रमजान के लिए मुस्लिम समाज के लोगों ने खरीदारी शुरू कर दी है। गुरुवार को लोगों ने सेहरी के लिए दूध, फैनी, मठरी, टोस्ट, फल आदि की खरीदारी की। इसके अलावा पिंड खजूर भी खरीदे गए। रोजा पिंड खजूर खाकर ही खोला जाता है। उसके बाद ही कुछ और खाया जा सकता है। रोजा खोलने के बाद सुबह 4 बजे तक कुछ भी खाया जा सकता है।

    मोती मस्जिद में तराबी करते मुस्लिम श्रद्धालु।

    पौष्टिक होता है पिंड खजूर

    शहर काजी अब्दुल अजीज कादरी ने बताया कि पिंड खजूर से रोजा खोलने की शुरू से ही परंपरा चली आ रही है। यह काफी पौष्टिक भी होता है। इस कारण इसका सेवन किया जाता है।

    अकीदत के पल

    इफ्तार 18 मई

    शाम 7.08 बजे

    रोजे का वक्त

    सेहरी 19 मई

    सुबह 3.54 बजे

    रमजान का मतलब है जलाना, इस महीने अपने गुनाहों को जलाकर खत्म करें

    रमजान अरबी शब्द है जो रम्द से लिया गया है। इसका मतलब है जलाना। इस पाक महीने में अल्लाह अपने बंदों के गुनाहों को जलाता (माफ करता) है। इसके लिए सच्चे मन से इबादत करना जरूरी है। रमजान इस्लामिक कैलेंडर का 9वां महीना है और इसी महीने अल्लाह ने कुरान नाजिल (उतारा) किया। इस्लामिक कैलेंडर के मुताबिक मुसलमानों पर 2 हिजरी में रोजे फर्ज (रखना ही)हुए। वर्तमान में 1439 हिजरी चल रही है। यह कहना है मुफ्ती जफर नूरी का। शुक्रवार से रमजान की शुरुआत हो रही है। मुफ्ती जफर नूरी ने बताया कि रमजान मुसलमानों के लिए रुहानी प्रशिक्षण का महीना है। रमजान से हमें क्या सीख मिलती है।

    जफर नूरी

    परहेजगार बन जाओ: रोजा केवल न खाने या पानी न पीने तक सीमित नहीं है। बल्कि बुरा मत देखो, बुरा मत सुनो और बुरा मत करो। यानी परहेजगार बनो, अल्लाह जो चाहता है वही काम करो और नेक इंसान बनो और गलत कामों से बचो।

    काम के पाबंद बनो: जिस तरह पाबंदी के साथ लोग सेहरी, नमाज और इफ्तार मुकर्रर वक्त पर करते हैं। वो ही पाबंदी दुनियावी काम में लेकर आओ। ऑफिस, घर और जरूरी काम तय समय पर ही करो।

    असहायों का ख्याल रखो: रोजे हर मुसलमान पर फर्ज (रखना ही) हैं। रोजे में भूखे और प्यासे रहने के पीछे का मकसद गरीब और असहाय की भूख की याद दिलाना है। इसलिए उनका भी ख्याल रखो।

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