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डॉक्टर्स करें सेनेटरी पैड के प्रति अवेयर, बताएं फायदे

शहरों की तुलना में ग्रामीण क्षेत्रों की महिलाओं में स्वास्थ्य संबंधी परेशानी ज्यादा देखने में आ रही है। इसकी...

Bhaskar News Network | Last Modified - May 18, 2018, 04:25 AM IST

डॉक्टर्स करें सेनेटरी पैड के प्रति अवेयर, बताएं फायदे
शहरों की तुलना में ग्रामीण क्षेत्रों की महिलाओं में स्वास्थ्य संबंधी परेशानी ज्यादा देखने में आ रही है। इसकी सबसे बड़ी वजह है उनका स्वास्थ्य के प्रति जागरूक न होना। हर दिन एक महिला इसी जागरूकता के अभाव में कैंसर जैसी दर्दनाक बीमारी की गिरफ्त में आ रही हैं। इसकी प्रमुख वजह है कि महिलाएं आज भी सेनेटरी नैपकिन की जगह गंदे कपड़ों, लकड़ी का बुरादा और राख का उपयोग करती हैं। इस कारण उन्हें इन्फेक्शन हो जाता है। धीरे-धीरे यही कैंसर के रूप में बदल जाता है। यदि इन महिलाओं को कैंसर से बचाना है तो सबसे पहले जमीनी स्तर पर परंपरागत उपयोग होने वाले प्रोडक्ट की जगह सेनेटरी नैपकिन पैड का यूज करने की सलाह हम सभी डॉक्टर्स को ही देनी चाहिए। इससे साइड इफेक्ट कम होंगे और वह महिलाएं बीमारी की चपेट में कम आएंगी। यह बात जीआरएमसी की पूर्व डीन डॉ. शैला सप्रे ने कही। वह गोग्स और हेल्थ प्लस की ओर से आयोजित वुमन वर्कशॉप में बतौर एक्सपर्ट संबोधित कर रही थी। डॉ. र|ा कौल ने कहा कि अधिकांश लोग बच्चों को तीन साल तक ही वैक्सीनेशन कराते हैं, लेकिन ऐसा नहीं है। वर्तमान में कुछ गंभीर बीमारियों के लिए भी वैक्सीनेशन 45 साल तक किए जाते हैं। इसलिए इस संबंध में डॉक्टर्स से राय लेना चाहिए। कार्यक्रम में गोग्स की अध्यक्ष डॉ. कुसुमलता सिंघल, डॉ. वीरा लोहिया आदि स्त्री रोग विशेषज्ञ मौजूद रहीं।

गोग्स और हेल्थ प्लस की अोर से महिला जागरूकता विषय पर हुई वर्कशॉप में स्त्री रोग विशेषज्ञ ने कहा

महिला स्वास्थ्य पर हुई वर्कशॉप में सभी महिला डॉक्टर्स ने जागरूकता कार्यक्रम करने का संकल्प लिया।

हुआ क्विज राउंड

इसमें क्विज कॉम्पटीशन का भी आयोजन किया गया। इसमें डॉ. शैला सप्रे ने सभी से पूछा कि बताओ मीनोपॉज- डे कब मनाया जाता है। इस पर सभागार में कोई भी जब उत्तर नहीं दे पाया तो उन्होंने कहा 18 अक्टूबर को। इसके बाद पूछा कि एक्सरसाइज के कोई तीन फायदे बताओ। इसका भी कोई उत्तर नहीं दे पाया। इसके बाद वह हंसते हुए बोली, लगता है मेरे पढ़ाने में ही कोई कमी रह गई है, जिस कारण आपको यह सब पढ़ाया हुआ भी याद नहीं है। वहीं डॉ. मोनिका जैन ने कहा कि अब हर कार्यक्रम में क्वेश्चन-आंसर राउंड होगा।

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