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पीने का पानी भरने 2 किमी बीहड़ में जा रहे लोग, 3 घंटे बाद कुएं में खत्म हो रहा पानी

मेहदा गांव के बीहड़ में कुएं से पानी भरती महिला। 25 साल से स्कीम बोर बंद गांव में लोगों को खारे पानी से निजात...

Danik Bhaskar | May 18, 2018, 05:20 AM IST
मेहदा गांव के बीहड़ में कुएं से पानी भरती महिला।

25 साल से स्कीम बोर बंद

गांव में लोगों को खारे पानी से निजात दिलाने के लिए पीएचई विभाग ने गांव से डेढ़ किमी दूर 30 साल पूर्व स्कीम बोर लगाया था। बोर खनन के बाद गांव में पाइप लाइनें बिछाकर घरों में कनेक्शन भी किए गए थे, लेकिन ग्रामीणों को 5 साल तक नियमित पानी मिलने के बाद लाइनें जगह-जगह जर्जर होती चली गईं, जिस पर विभाग के अधिकारियों ने ध्यान नहीं दिया। बाद में धीरे-धीरे कर बोर की मोटर भी खराब हो गई। ग्रामीणों की मांग पर गांव में दोबारा पाइप लाइन बिछाई गई थी, मगर वह भी कामयाब नहीं हो सकी है। अब पीएचई की लाखों की योजना का लाभ ग्रामीणों को नहीं मिल पा रहा है। बहरहाल खारे पानी की समस्या से जूझ रहे लोगों को कोसों दूर चलकर मीठे पानी का इंतजाम करना पड़ता है।

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वोट के लिए नेताओं ने दिए आश्वासन

मेहदा गांव मेहगांव विधानसभा में होने के साथ ही यहां आने वाले नेताओं ने वोट बैंक बढ़ाने लोगों को कई आश्वासन दिए। मगर गांव में पानी की समस्या का समाधान नहीं हो सका है। ग्रामीणों का कहना है कि वोट मांगने के लिए राजनैतिक लोग चुनाव के वक्त गांव में आते हैं, लेकिन प्रत्याशी का चुनाव होने के बाद वह लोगों की समस्याओं को भुला बैठते हैं। गांव के हबीब खान ने बताया ग्रामीण इस बार चुनाव में किसी के झांसे में नहीं आएंगे। गांव में खारे पानी की समस्या का समाधान होगा, तभी वह वोट डालने पोलिंग बूथों पर जाएंगे। हालांकि राजनैतिक लोगों ने गांव में नल-जल योजना के लिए कई बार आश्वासन दिए हैं, लेकिन नेताओं के यह वादे धरातल पर नहीं पहुंचे हैं।

3 हजार की आबादी परेशानी में

गांव में तीन हजार की आबादी है जो खारे पानी की समस्या से जूझ रही है। गांव में पीएचई विभाग द्वारा करीब आधा सैकड़ा हैंडपंप लगे हैं, जिसमें 13 हैंडपंप पानी छोड़ गए हैं और 26 हैंडपंप खारे पानी की वजह से जंग लगने के कारण खराब हो चुके हैं। गांव में अब 26 हैंडपंप लगे हुए हैं, मगर यह हैंडपंप भी खारा पानी दे रहे हैं। गांव के दिनेश पुरोहित का कहना है कि गांव में ज्यादातर महिलाएं पानी भरने जाती है, इस कारण कई युवाओं के रिश्ते इसलिए लौट गए कि उनकी बेटियों को कुएं से पानी खींचना पड़ेगा। वहीं ग्रामीणों का आक्रोश भी शासन व प्रशासन के अधिकारियों के खिलाफ बढ़ता जा रहा है।

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