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मुर्गियों को शुद्ध पानी पिलाए, नहीं होगा हैजा

Bhaskar News Network | Last Modified - May 01, 2018, 03:40 AM IST

अतितीव्र अवस्था : इस में छह घंटे के भीतर मुर्गियों की मौत हो जाती है।

तीव्र अवस्था : मुर्गी कुछ मिनट तक चक्कर लगातर अचानक ऊपर की ओर छलांग लगाकर गिरकर मर जाती है। अन्य मुर्गी में ज्वर, क्षुधा हास, छितरे पंख, मुंह से म्युक्स का बाहर आना, दस्त होते हैं। मृत्यु के तत्काल बाद प्रभावित मुर्गी का तुर्रा नीला पड़ जाता है।

दीर्घकालीन अवस्था : यह अवस्था महामारी के अंतिम चरण में देखी जाती है। या कहीं-कहीं पर स्थानीय विक्षिप्तियां इस रोग में देखने को मिलती है। इस अवस्था में सामान्य कलंगियों एवं तुर्रा की सूजन, आंख की पुतली का शोध, जोड़ों का दर्द आदि देखने को मिलता है।

चिकित्सा : सल्फोनामाइड तथा पेंसिलिन, स्ट्रप्टोमाइसिन आदि एंटीबायोटिक्स या दोनों का उपयोग एक साथ करने पर फायदा होगा।

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