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खरीफ को कीट-कीड़ों से बचाना है ताे अभी जुताई कर खाली छोड़ दे खेत

बढ़ते तापमान से खेत में मौजूद हानिकारक कीट और कीडे़ के साथ सूत्रकृमियों का प्रभाव हो जाएगा कम एग्रो भास्कर |...

Dainik Bhaskar

May 01, 2018, 03:40 AM IST
बढ़ते तापमान से खेत में मौजूद हानिकारक कीट और कीडे़ के साथ सूत्रकृमियों का प्रभाव हो जाएगा कम

एग्रो भास्कर | खंडवा

खरीफ की फसल को कीट और कीड़ों से बचाना है और अच्छी उत्पादकता कायम रखनी है तो खेत की अप्रैल में एक बार जुताई करें। इस दौरान पड़ने वाली गर्मी और बढ़ते तापमान से खेत में मौजूद हानिकारक कीट और कीड़ों के साथ सूत्रकृमियों का प्रभाव काफी हद तक कम हो जाएगा।

सिंचित क्षेत्र में रबी फसल की कटाई के तुरंत बाद इस प्रक्रिया को प्राथमिकता से करना चाहिए ताकि इसके अवशेष जमीन में समा जाएं और खाद के समान काम करें। यह न सिर्फ खरीफ की बाजरा, मूंग, मोठ और तिल-मूंगफली की फसल के लिए उपयोगी होगा बल्कि यह उद्यानिकी से जुड़ी फल-सब्जी की फसल के लिए भी उपयोगी होगा। वैज्ञानिकों का कहना है अप्रैल के महीने में खेत की जुताई करने से जमीन में मौजूद सूत्रकृमि कम हो जाते हैं। अप्रैल में पड़ने वाली तेज गर्मी सूत्रकृमि बर्दाश्त नहीं कर पाते है। हानिकारक कीड़े भी मर जाते हैं और इससे फसल पर पड़ने वाला दुष्प्रभाव कम हो जाता है। जुताई से जमीन पोली हो जाती है बारिश आते ही पानी जमीन के अंदर तक बिना रुकावट जा सकता है। रबी या अन्य पहले कोई अन्य बुआई की हुई हो तो उसके अवशेष जमीन के अंदर घुलमिल कर खाद का काम करेंगे। ऐसे अवशेषों को जलाना नहीं चाहिए। जुताई से खेत में मौजूद अन्य अनावश्यक पेड़-पौधे भी खत्म किए जा सकते हैं।

गोबर खाद न डाले

जुताई के बाद खेत में गोबर की खाद न डाले। गर्म तापमान के चलते गोबर की खाद में जरूरी पोषक तत्व फास्फोरस, पोटाश व माइक्रोन्यूटेंट नष्ट हो जाते हैं। ऐसे में किसान गर्मी में गोबर की खाद खेत में नहीं डाले। मानसून आने से 7-10 दिन पहले ही गोबर की खाद डाले ताकि पहली बारिश या उससे पहले आद्रता के चलते मिट्‌टी घुल जाए।

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