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तीर्थ स्थल उनाव बालाजी में सुविधाओं को तरस रहे श्रद्धालु

बुंदेलखंड के सुप्रसिद्ध तीर्थ स्थल उनाव बालाजी को आज भी सुविधाओं की दरकार है, यहां स्थित सूर्यमंदिर पर दूरदराज से...

Bhaskar News Network | Last Modified - May 02, 2018, 05:40 AM IST

तीर्थ स्थल उनाव बालाजी में सुविधाओं को तरस रहे श्रद्धालु
बुंदेलखंड के सुप्रसिद्ध तीर्थ स्थल उनाव बालाजी को आज भी सुविधाओं की दरकार है, यहां स्थित सूर्यमंदिर पर दूरदराज से आने वाले यात्रियों को रात गुजारने के लिए न तो रैन बसेरा है, और न ही मांगलिक कार्यों को संपन्न करने के लिए सामुदायिक भवन की व्यवस्था है। मूलभूत सुविधाओं के अभाव में मंदिर पर आने वाले तीर्थ यात्रियों को समस्याओं से दो चार होना पड़ता है। इसके बावजूद भी प्रशासन का सुविधाओं को लेकर ध्यान नहीं दिया जा रहा है।

बता दें कि जिला मुख्यालय एवं समीपवर्ती झांसी रेलवे जंक्शन से 17 किलोमीटर दूर भगवान बालाजी का प्रसिद्ध सूर्य मंदिर स्थित है। मंदिर के संबंध में मान्यता यह है कि समूचे भारत वर्ष में दो ही जगह भगवान भास्कर के बाल स्वरूप में सूर्य यंत्र स्थापित है। एक सूर्य यंत्र उड़ीसा प्रांत के कोणार्क में स्थित है तो दूसरा दतिया जिले के उनाव बालाजी में स्थित है। पुरातत्व महत्व के संबंध में इतिहासविद विनोद मिश्रा बताते है कि इस मंदिर का निर्माण 16 वीं शताब्दी के समकालीन बुंदेला शासकों ने करवाया था। मंदिर की पूरी विशाल इमारत का निर्माण ईंट चूना व गोबर के द्वारा किया गया है। मंदिर के हवेली के ऊपर की इमारत पर उत्कीर्ण भित्ति चित्र भी इसकी प्राचीनता की गवाही देते है।

मंदिर पर सुविधाओं का अभाव, मांगलिक भवन एवं रैन बसेरा नहीं, श्रद्धालु हो रहे परेशान

पहूज नदी में स्नान करते श्रद्धालु।

महिलाओं के नहाने तक के नहीं हैं इंतजाम, चेंजिंग रूम भी नहीं

पहूज नदी के तट पर सुलभ शौचालय व महिलाओं के लिए नहाने एवं कपड़े बदलने के लिए चेंजिंग रूम भी नहीं है। जिसकी वजह से मंदिर पर आने वाली महिलाओं खुले में नहाना पड़ता है, और खुले में ही कपड़े बदलने पड़ते हैं। श्री बालाजी मंदिर कमेटी के सदस्य जयनारायण पंडा बताते है कि शासन यदि सूर्य मंदिर पर इन मूलभूत सुविधाओं के विस्तार की दिशा में ध्यान दे तो यहां आने वाले यात्रियों की संख्या में खासी बढ़ोतरी हो सकती है।

सुविधाओं को लेकर प्रशासन का ध्यान नहीं

प्रसिद्ध सूर्य मंदिर पर श्रद्धालुओं की सुविधाओं को लेकर प्रशासनिक अधिकारियों का ध्यान नहीं है। मंदिर पर श्रद्धालुओं के लिए रात्रि के समय विश्राम के लिए रैन बसेरा तक नहीं हैं, और न ही आसपास के गांव से शादी विवाह करने के लिए आने वाले लोगो के लिए मांगलिक भवन का इंतजाम है।

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