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ग्वालियर. मैं तो होली का त्योहार मनाने के लिए अपने मायके गई थी। मेरे पास अचानक फोन आया कि महाराज का आदेश हुआ है, तत्काल ग्वालियर पहुंचिए। मैंने पूछा-ऐसी क्या बात हो गई। मुझे कहा गया कि आप तो ग्वालियर पहुंचिए, वहां सब बताया जाएगा। हम तत्काल ग्वालियर के लिए रवाना हो गए। रास्ते में महाराज में आस्था रखने वाले विधायक और मंत्रियों को फोन लगाया तो सबको उतना ही पता था जितना हमें फोन पर बताया गया।
दो घंटे में हम ग्वालियर आ गए। यहां पर कहा गया कि जरूरी काम से दिल्ली चलना है। लेकिन कारण यहां भी नहीं बताया। एयरपोर्ट से फ्लाइट में बैठकर सीधे गुड़गांव पहुंचे। यहां महाराज आए। इस दौरान कुछ भाजपा के नेता भी थे। महाराज ने पहले तो अपने निर्णय के बारे में बताया। इसके बाद सिर्फ महाराज के विधायक और मंत्री रह गए। महाराज ने मुझसे पूछा कि आप इस्तीफा दे देंगी, कोई दिक्कत तो नहीं आएगी। मैंने कहा- तेरा तुझको अर्पण, मेरा क्या लागे... मैंने कहा महाराज सब आपका ही है।
यह सुनते ही महाराज ने मुझे गले लगा लिया और फूट-फूटकर रोने लगे। उनके आंसू टपके तो मैंने उनसे कहा कि आप निश्चिंत रहिए। आप कहेंगे तो हम कुआं में कूदने में भी एक पल नहीं सोचेंगे। महाराज ने सभी के सामने मुझसे कहा कि यह मेरा शेर है... इसके बाद उन्होंने एक-एककर सभी विधायकों और मंत्रियों से पूछा। सभी ने एक पल सोचे बगैर इस्तीफे के लिए हां कर दी। इसके बाद हम लोगों को बेंगलुरू की फ्लाइट में बिठा दिया गया। हम बेंगलुरू के होटल में हैं। सिंधिया जी ने कांग्रेस छोड़ी तो हम सभी ने इस्तीफे लिख दिए। अब महाराज का जो भी आदेश होगा, वो हम पालन करेंगे। अभी तो महाराज ने कहा है कि आपको जब हम कहेंगे, तभी बैंगलुरू से निकलना।
-जैसा कि भास्कर को बेंगलुरू से फोन पर मंत्री इमरती देवी ने बताया।
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