तैयारी / शारीरिक शिक्षा को रोचक बनाने जोड़े जाएंगे मनोरंजक खेल और मास पीटी

Dainik Bhaskar

Mar 16, 2019, 11:12 AM IST


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  • कक्षा 5वीं तक प्रायोगिक, 6वीं से 8वीं तक थ्योरी
  • 9वीं से 12वीं में रहेगा थ्योरी-प्रैक्टिकल 

ग्वालियर। प्रदेश के शासकीय स्कूलों में छात्रों को नए शिक्षण सत्र में मनोरंजक खेल भी खिलाए जाएंगे। साथ ही प्राथमिक स्तर पर विद्यार्थियों को रस्सीकूद का अभ्यास कराया जाएगा, लेकिन उन्हें बिना रस्सी के कूदना होगा। इसके पीछे विशेषज्ञों का तर्क है कि कई बार बच्चे रस्सी में फंसकर गिर जाते हैं। 

 

इसलिए शुरुआत में उन्हें केवल जंप का अभ्यास कराया जाए। यह सुझाव एलएनआईपीई और राज्य शिक्षा केंद्र के संयुक्त तत्वावधान में शारीरिक शिक्षा पर पाठ्यक्रम तैयार करने को लेकर ग्वालियर में शुरू हुई कार्यशाला में प्रदेशभर से आए विशेषज्ञों ने दिए। विशेषज्ञों ने कहा कि प्रदेश के स्कूलों में शारीरिक शिक्षा कंपल्सरी नहीं है। इसलिए यहां इसे कंपल्सरी करने की अधिक आवश्यकता है। बड़ी क्लास के छात्रों के लिए एरोबिक को भी शामिल किए जाने का सुझाव दिया गया। 


बनाए गए एक्सपर्ट पैनल : माॅडल करिकुलम के लिए 3 ग्रुप में एक्सपर्ट पैनल बनाए गए हैं। पहले ग्रुप में डॉ. यतेंद्र सिंह, नीतेश राजपूत, डॉ. मनोज साहू, श्वेता यादव, विजय भार्गव, मारू मारियो। दूसरे ग्रुप में प्रो. एमके सिंह, डॉ. वायएस राजपूत, डॉ. छाया चौधरी, आरके सिंह और मुकेश नरवरिया शामिल हैं। तीसरे ग्रुप में डॉ. पुष्पेंद्र, डॉ. मेघा साहू, शिल्पी चुघ, टीपी शर्मा और श्रीकांत हैं। 

 

एक्सपर्ट ने यह दिए सुझाव : सभी कक्षा के लिए मास पीटी लागू की जाए। यदि किन्हीं परिस्थितियों में यह बड़ी कक्षाओं में विषय के रूप में लागू न हो सके तो वहां विजिटर टीचर भेजे जाएं। प्रदेश के शासकीय स्कूलों में अभी तक शारीरिक शिक्षा का कोई मापदंड नहीं रहा है, इसके मापदंड तय किए जाएं। 


 
संभावित मॉडल करिकुलम 

 

  • कक्षा पहली से 5वीं तक- बच्चों के लिए किसी भी तरह की थ्योरी नहीं रखी जाएगी, यह केवल प्रायोगिक रहेगी। इसमें रिदमिक गतिविधि, मूवमेंट, स्कीपिंग विद् आउट रोप, लोकोमोटर और नॉन लोकोमोटर पर आधारित खेल खिलाए जाएंगे। प्रत्येक कक्षा में रोज एक-एक पीरियड रहेगा। यह लंच से पहले हों, ऐसा सुझाव है। 
  • कक्षा 6वीं से 8वीं तक- फिटनेस क्या होती है और फिट किस तरह से रह सकते हैं। दौड़ने का तरीका, जंप करने का तरीका सहित शरीर के मूवमेंट की थ्योरी पढ़ने का मौका विद्यार्थियों को मिल सकेगा। इसमें थ्योरी का भाग 60 से 70 प्रतिशत होगा, जबकि शेष प्रैक्टिकल का रहेगा। 
  • कक्षा 9वीं से 12वीं तक- पहले फेज में कक्षा पहली से 8वीं तक का मॉडल करिकुलम तैयार होगा। दूसरे फेज में कक्षा 9वीं से 12वीं तक का मॉडल करिकुलम तैयार किया जाएगा।
  • 2015 से हुई शुरुआत- कोआर्डिनेटर डॉ. यतेंद्र सिंह ने बताया कि शारीरिक शिक्षा पर पाठ्यक्रम तैयार करने की पहल 2015 में राज्य सरकार की ओर से की गई थी। इसके बाद राज्य शिक्षा केंद्र ने एलएनआईपीई से संपर्क साधा और इसके बाद मॉडल करिकुलम बनाने पर सहमति बनी।

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