‘एचडीएफसी बैंक वल्द एचडीएफसी बैंक’ अदालत में हाजिर हों

Gwalior News - डीबी स्टार

Bhaskar News Network

Oct 13, 2019, 07:45 AM IST
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प्रदेश के राजस्व न्यायालय जीवित-मृत, स्थिर व गतिमान वस्तुओं में अंतर नहीं कर पा रहे हैं। उनकी नजर में एचडीएफसी बैंक के पिताजी एचडीएफसी बैंक है। इलाहबाद बैंक पिता मुख्य प्रबंधक एसडीएम रोड। कर्मचारी जब आवाज लगाते हैं तो यह नजारा हर रोज सामने आता है।

राजस्व मंडल, आयुक्त भू-अभिलेख एवं बंदोबस्त, संभागायुक्त, कलेक्टर, अपर कलेक्टर, एसडीएम, तहसीलदार, नायब तहसीलदार तक के राजस्व न्यायालय एक ही परंपरा से फरियादी की सूचना, सम्मन या आवाज लगवाते हैं। इन न्यायालयों के बाहर पारंपरिक वेशभूषा में खड़ा होने वाला कर्मचारी जोर से ‘‘एचडीएफ बैंक पिता एचडीएफसी बैंक पता एचडीएफसी बैंक हाजिर हो’’ की आवाज लगाता है। यही स्थिति मध्य प्रदेश के सभी जिलों की है।

अफसर बदलने के कारण चली आ रही परंपरा

किसी बैंक, संस्था या सोसायटी का केस जब राजस्व न्यायालय में आता है तो उसमें बैंक के अफसर की जगह बैंक के नाम को ही पक्ष माना जाता है। अफसरों के अनुसार कई बार केस सालों चलते है। ऐसे मे अगर किसी मैनेजर या डायरेक्टर को पक्ष मान लिया गया और उसका ट्रांसफर या रिटायरमेंट हो गया तो फिर केस की सुनवाई में दिक्कत आएगी। इसी कारण प्राधिकृत अधिकारी एफिडेविट देता है और उसके बाद बैंक या संस्था के नाम से ही नोटिस इश्यू होते रहते हंै।

राजस्व न्यायालय में बैंक, संस्थाओं को पिता- पुत्र के नाम से पुकारा जाता है। वकीलों को पहले से ही प्रकरण की पूरी जानकारी रहती है। इस कारण दिक्कत नहीं रहती है। अब अगर यह परंपरा खत्म हो जाए तो अच्छा रहेगा। बैक की जगह उनके अफसरों के नाम भी हो सकते है। मनोज गोयल, पूर्व चेयरमैन, राजस्व मंडल, मप्र

इस तरह लिखा जाता है नाम




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