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7 पुरुष पहलवानों को हराकर 12वीं की छात्रा बनी ‘मोस्ट आउटस्टैंडिंग रेसलर’

एक वर्ष पहले
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सिर्फ जीत नहीं, मानसिकता पर विजय

रॉबर्ट्स का मानना है कि यह जीत इसलिए ऐतिहासिक है क्योंकि यह केवल जीत नहीं बल्कि दोहरे मापदंडों पर एक स्त्री की विजयश्री है। पहली तो ये कि जीत के लिए उनके सामने तकनीकी रूप से सही प्रतिस्पर्धी नहीं था। दूसरे पुरुष प्रतिद्वंद्वी के साथ ही वे उस पुरुष मानसिकता से भी लड़ रही थीं जो यह मानता है कि महिलाएं कुछ क्षेत्रों में उसे कभी चुनौती नहीं दे सकतीं। पुरुषों के अाधिपत्य वाले इस खेल में इन दोहरी जिम्मेदारियों का बोझ उठाए जीत का परचम लहराना मामूली बात नहीं थी। हैवन के कोच क्रिस वॉडेल्ल का कहना है कि यह जीत राज्य ही नहीं बल्कि पूरे अमरीका में युवा छात्राओं को इस खेल में उतरने के लिए प्रेरित करेगी।

हैवन के पिता और भाई सभी पहलवान हैं। उनकी वजह से ही हैवन को इस खेल में उतरने की प्रेरणा मिली। रॉबट्र्स ने बताया कि अमेरिका के 21 राज्यों में कुश्ती एक आधिकारिक हाई स्कूल खेल है। इनमें से 15 राज्य महिला पहलवानों के लिए एक अनौपचारिक चैम्पियनशिप की मेजबानी करते हैं। संस्था रेसल लाइक ए गर्ल इस खेल में महिलाओं की संख्या बढ़ाने के लिए काम करती है। हैवन की जीत के बाद अमेरिकी खेल संघ हाई स्कूल स्तर पर दो अलग-अलग कैटेगिरी में महिला कुश्ती को मंजूरी देने पर विचार कर रहा है। वहीं 40 स्कूलों की महिला पहलवानों को कॉलेज स्तर पर खेल का विस्तार करने के लिए छात्रवृत्ति देने का भी निर्णय किया है। इससे मिडिल और हाई स्कूल की लड़कियों में कुश्ती के लिए प्रोत्साहन मिलेगा।

म हिलाएं किसी भी क्षेत्र में उतरें अगर वे जीतती हैं तो यह उनकी अकेले की नहीं बल्कि हर महिला की जीत होती है। एक जीत बहुतों को प्रेरित कर सकती है। कुछ ऐसा ही कर रही हैं अमेरिका के उत्तरी कैरोलिना की 12वीं कक्षा की छात्रा हैवेन फिच। फिच ने हाल ही हाई स्कूल रेसलिंग चैंपियनशिप में एक जूनियर महिला पहलवान के रूप में 48 किग्रा वर्ग में जीत दर्ज की। उनकी वेट कैटेगरी में 8 खिलाड़ी थे, जिसमें वे इकलौती महिला रेसलर थीं। उन्होंने ऐसा करने के लिए सभी से बारी-बारी से मुकाबला किया। हैवन ने सभी को पटखनी देते हुए न केवल खिताब जीता बल्कि वह ऐसा करने वाली अपने राज्य की आज तक की अकेली महिला पहलवान भी बन गई हैं। वह पिछले वर्ष इस अपनी कैटेगरी में चौथे नंबर पर रहीं थीं। उनकी इस जीत ने महिला कुश्ती के लिए संघर्ष करने वालों को बड़ी राहत भरी उम्मीद दी है।

संस्था रेसल लाइक ए गर्ल के संस्थापक और मुख्य कार्यकारी अधिकारी सैली रॉबर्ट्स का कहना है कि हैवन की जीत ने बहुत कुछ बदल दिया है। यह महिला कुश्ती को लड़कियों को शिक्षित और सशक्त बनाने के सशक्त साधन के रूप में बढ़ावा देगा। कुश्ती के इतिहास में यह इसलिए भी महत्त्वपूर्ण है, क्योंकि हैवन महिला शक्ति का एक मजबूत उदाहरण बनकर उभरी हैं। उन्होंने साबित कर दिखाया है कि हां, महिलाएं भी कुश्ती जैसे खेल में ऐसा कारनामा कर सकती हैं, बशर्ते उन्हें प्रशिक्षित किया जाए। अपनी टीम के लिए जूनियर वर्ग में अभी तक 54-04 का जीत रेकॉर्ड है। उनकी इस उपलब्धि के लिए उन्हें कुश्ती फेडरेशन की ओर से ‘मोस्ट आउटस्टैंडिंग रेसलर’ का खिताब भी दिया गया है। लेकिन 7 लड़कों को चित्त कर टाइटल अपने नाम करने की बात पर उन्हें अब भी भरोसा नहीं हो रहा है।

powerful girl

फोगाट परिवार पर बनीं फिल्म दंगल का ये डायलॉग म्हारी छोरिया छोरों से कम हैं के आपको याद ही होगा। कुछ ऐसा ही काम अमेरिका के उत्तरी कैरोलिना में रहने वाली 12वीं की छात्रा ने कर दिखाया है। उन्होंने कुश्ती के मुकाबले में 7 लड़कों को हराने का कारनामा किया है।
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