‘मुगल-ए-आजम’ इकलौती फिल्म जो आधी रंगीन और आधी श्वेत-श्याम**

Gwalior News - इंट्रेस्टिंग फैक्ट्स ‘मुगल-ए-आजम\' बनाने में 14 साल का वक्त लगा, 1.5 करोड़ रुपए खर्च हुए। यह उस समय के हिसाब से...

Mar 27, 2020, 07:11 AM IST
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इंट्रेस्टिंग फैक्ट्स

‘मुगल-ए-आजम' बनाने में 14 साल का वक्त लगा, 1.5 करोड़ रुपए खर्च हुए। यह उस समय के हिसाब से बहुत ज्यादा रकम थी।

1945 में अंग्रेजों के राज में शुरू हुई थी बनना, आजादी के बाद 1960 में हुई रिलीज।

डायरेक्टर के आसिफ ने फिल्म के लिए गीतकारों से करीब 72 गाने लिखवाए थे।

एक गाने के लिए के. आसिफ ने 10 हजार रुपए गुलाम अली को दिए थे।

‘ऐ मोहब्बत जिंदाबाद’ के लिए मोहम्मद रफी के साथ 100 गायकों से कोरस गवाया गया था।

500 ट्रकों की हेडलाइट और 100 रिफ्लेक्टर इस्तेमाल करके फिल्म के सीन शूट किए गए।

दे शभर में कई रंगीन फिल्में 1955 तक बनने लगी थीं। तब तक ‘मुगल-ए-आजम’ की आधी शूटिंग हाे चुकी थी। रंगीन फिल्मों को देखते हुए इसके डायरेक्टर के आसिफ ने भी फिल्म के गाने ‘प्यार किया तो डरना क्या’ सहित कुछ हिस्सों की शूटिंग टेक्निकलर में की जो उन्हें काफी पसंद आई। इसके बाद उन्होंने पूरी फिल्म को टेक्निकलर में दोबारा शूट करने का फैसला किया। फिल्म की शूटिंग में 10 साल से ज्यादा बीत चुके थे और बजट कई गुना बढ़ गया था। ऐसे में इस योजना को ठंडे बस्ते में डाल दिया गया और इस तरह 14 साल में बनी यह फिल्म हाफ कलर और हाफ ब्लैक एंड वाइट में रिलीज हुई।

10 साल बाद दिलीप साहब ने देखी थी फिल्म ‘मुगल-ए-आजम’

के. आसिफ ने दिलीप कुमार की बहन अख्तर बेगम से शादी की थी। एक बार दोनों में झगड़ा हुआ। दिलीप बचाव करने पहुंचे। आसिफ ने कह दिया कि अपना स्टारडम मेरे घर से बाहर रखो। दिलीप इतना नाराज हुए कि फिल्म के प्रीमियर तक में नहीं गए थे। उन्होंने 10 साल बाद ये फिल्म देखी थी। इसके अलावा फिल्म के एक सीन में दिलीप कुमार को मधुबाला को थप्पड़ मारना था। चूंकि शूटिंग के दौरान हीं दोनों का ब्रेकअप हुआ था ऐसे में वो थप्पड़ बहुत धीरे मार रहे थे। दिलीप के इस रवैए से खफा होकर आसिफ ने खुद ही मधुबाला को थप्पड़ जड़ दिया।

फिल्म के लिए ऐसे टिकट छपे थे, जिसमें पोस्टर भी था। ये टिकट मराठा मंदिर और मुंबई के कुछ दूसरे सिनेमाघरों में बेचे गए जिन्हें छापने की लागत 85 हजार आई थी।

इस कॉलम में पढ़िए भारतीय सिनेमा के अनजाने तथ्य। आज प्रस्तुत हैं, अपने दौर की सबसे सफलतम फिल्म ‘मुगल-ए-आजम’ के बारे में कुछ जानकारी:

नौटंकी कहकर शाहरुख के पिता ने ठुकराया रोल: मीर ताज मोहम्मद, दिलीप कुमार के बचपन के दोस्त थे जो पेशावर में उनके पड़ोसी भी हुआ करते थे और बाद में आकर दिल्ली में बस गए। एक बार मीर, दिलीप से मिलने के लिए बंबई में उनके घर पहुंचे। दिलीप ने उन्हें के आसिफ से मिलाया। उन दिनों आसिफ ‘मुगल-ए आज़म’ की कास्टिंग कर रहे थे और मीर से प्रभावित होकर उन्होंने उन्हें फिल्म में राजा मान सिंह का रोल ऑफर किया। मीर ने दो टूक में आसिफ को कहा कि मुझे नौटंकी में काम करने का कोई शौक नहीं है। इत्तेफाक देखिए कि सिनेमा को नौटंकी कहने वाले मीर ताज मोहम्मद का बेटा इसी नौटंकी के बदौलत पूरी दुनिया में शोहरत और नाम कमा रहे हैं और उनका नाम है शाहरुख खान।

क्या आप जानते हैं**

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