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रिलीविंग लैटर से पकड़ा मामला

एक वर्ष पहले
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डॉ. भूकर ने हरियाणा की एक यूनिवर्सिटी में एसोसिएट प्रोफेसर पद के लिए आवेदन किया था, जिस पर उनका सेलेक्शन भी हो गया। इस पद पर ज्वॉइन करने के लिए उन्होंने संस्थान से रिलीविंग लेटर मांगा। इस दौरान ही मंत्रालय से शिकायत फॉरवर्ड होकर संस्थान आ गई। ऐसे में उनकी पूरी सर्विस फाइल को दोबारा रिव्यू किया गया। इसमें ये तथ्य सामने आए:-

} डॉ. भूकर ने वर्ष 1989 से 2004 तक एयरफोर्स में एयरमैन पद पर नौकरी की। नौकरी के 15 साल की अवधि के दौरान ही उन्होंने बीए, बीपीएड, एमए फिजिकल एजुकेशन, नेट और एमफिल की थी। इसमें बीपीएड अमरावती यूनिवर्सिटी से और एमए फिजिकल एजुकेशन पंजाब यूनिवर्सिटी से की गई थी। नियमानुसार सिविल कोर्सेस के लिए डॉ. भूकर को एयरफोर्स से अनुमति लेनी चाहिए थी, लेकिन उनकी सर्विस बुक में सिर्फ एमए फिजिकल एजुकेशन का उल्लेख था।

} इसके बाद डॉ. भूकर ने नवोदय विद्यालय संगठन में नौकरी ज्वॉइन की। इस दौरान उन्हें लगभग दो लाख रुपए जमा कर पांच साल का बॉण्ड भरना पड़ता, लेकिन उन्होंने ट्रेनिंग के नाम पर इसकी छूट ली। बॉण्ड भरने का दबाव आने पर उन्होंने पहले कैजुअल और बाद में मेडिकल लीव लेकर 22 जून 2006 को लाला जगत नारायण इंस्टीट्यूट जलालाबाद पंजाब में नौकरी ज्वॉइन कर ली, लेकिन इस दौरान नवोदय विद्यालय से भी वेतन लेते रहे। उन्हें नवोदय विद्यालय से जुलाई 2006 तक वेतन का भुगतान किया गया।

} इसी दौरान एलएनआईपीई में वैकेंसी निकलने पर उन्होंने यहां 23 अप्रैल 2007 को ज्वॉइन किया। यहां उन्होंने नवोदय विद्यालय में स्वयं को वर्किंग बताया, लेकिन रिलीविंग लाला जगत नारायण इंस्टीट्यूट की लगाई। असल में नवोदय विद्यालय ने उन्हें 15 सितंबर 2007 को रिलीव किया, जबकि इस दौरान वे एलएनआईपीई की नौकरी में थे।

} एलएनआईपीई के आवेदन में उन्होंने पहले स्वयं का स्पेशलाइजेशन फुटबॉल लिखा था, लेकिन बाद में इसे बदलकर बास्केटबॉल और एथलेटिक्स कर दिया गया। इसके लिए पंजाब यूनिवर्सिटी का एक प्रमाण पत्र लगाया था। इस आधार पर यहां उन्हें एथलेटिक्स में स्पेशलिस्ट मानकर नौकरी दी गई, लेकिन आरटीआई में मिली जानकारी में पंजाब यूनिवर्सिटी ने लिखकर दिया है कि उनका स्पेशलाइजेशन बास्केटबॉल में है।

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