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2209 स्थानों काे लेकर फिर मंथन, यहां ज्यादा रेट पर हुईं रजिस्ट्री इसलिए बढ़ सकती हैं कीमतें

Gwalior News - जुलाई में लागू होने जा रही प्रॉपर्टी की कीमत तय करने वाली कलेक्टर गाइडलाइन को लेकर फिर से मंथन होगा। केंद्रीय...

Bhaskar News Network

Jun 14, 2019, 07:30 AM IST
Gwalior News - mp news churning with 2209 places then the rate at which the registry can be increased at a higher rate
जुलाई में लागू होने जा रही प्रॉपर्टी की कीमत तय करने वाली कलेक्टर गाइडलाइन को लेकर फिर से मंथन होगा। केंद्रीय मूल्यांकन समिति ने ऐसे 70 फीसदी स्थानों की लिस्ट जिला मूल्यांकन समिति को भेजी है, जहां पर गाइड लाइन से ज्यादा पर दस्तावेज पंजीयन हुए हैं। यदि इस आधार पर जमीन की कीमतों में बदलाव हुआ तो सभी क्षेत्रों में जमीन की कीमतें बढ़ जाएंगी। हालांकि अफसराें का मानना है कि ये वास्तविक कीमत से अधिक पर रजिस्ट्रिी के ये वे मामले हाे सकते हैं, जिनमें लाेगाें ने बैंक लाेन के लिए ऐसा कराया हाेगा।

जिला मूल्यांकन समिति ने जिन 39 लोकेशन (मुरार के 11 संतर सहित) पर रेट वृद्धि की है उन पर 10 जून को भोपाल में केंद्रीय मूल्यांकन समिति की बैठक में चर्चा हुई। कुछ सदस्यों ने छोटे-छोटे संतरों में आवासीय के बदले व्यावसायिक रेट पर आपत्ति की पर बाद में सभी ने 11 संतरों में वृद्धि को मंजूरी दे दी। केंद्रीय समिति ने जिले में 2209 लोकेशन पर हुए दस्तावेज पंजीयन का रिकॉर्ड वरिष्ठ जिला पंजीयक डीएन दोहरे को सौंपा है। इनमें वे दस्तावेज शामिल हैं जहां पर भी गाइड लाइन से ज्यादा कीमत पर रजिस्ट्रियां हुई हैं। यह कुल लोकेशन का 70 फीसदी है। केंद्रीय मूल्यांकन समिति के निर्देश पर इन सभी दस्तावेज में से ऐसी लोकेशन छांटी जा रही हैं जहां पर 5 या इससे कम दस्तावेज अधिक कीमत पर पंजीयन हुए हैं। इसके बाद जिला मूल्यांकन समिति एक बार फिर बैठक करेगी और रिपोर्ट केंद्रीय मूल्यांकन समिति को भेजी जाएगी। केंद्रीय मूल्यांकन समिति के सुझाव पर यदि सभी लोकेशन पर जमीन की कीमतों में वृद्धि होगी तो जिले में अधिकतर स्थानों पर जमीन की कीमतें बढ़ जाएंगी।

कब क्या हुअा: दो बार हो चुकी है जिले में बैठक





फार्मूले पर काम कर रहे हैं


रेट वृद्धि का प्रस्ताव सही


माल रोड मुरार, जहां बढ़ेंगे जमीन के रेट।

इस साल रेरा में सिर्फ 6 हाउसिंग प्रोजेक्ट के रजिस्ट्रेशन हुए

ग्वालियर | शहर में इस साल सिर्फ 6 आवासीय प्रोजेक्ट रेरा में रजिस्टर्ड हुए हैं। जबकि प्रदेश में 2065 ऐसे प्रोजेक्ट रजिस्टर्ड हैं जो कि 8 यूनिट से ज्यादा के हैं। इनमें सबसे कम 97 ग्वालियर अंचल के हैं जबकि यहां पर बड़ी संख्या में बिल्डर सक्रिय हैं और प्रोजेक्ट भी कई तैयार हो रहे हैं। रजिस्ट्रेशन कम होने के कारण ही यहां से सिर्फ 168 शिकायतें अब तक रेरा कोर्ट में पहुंची हैं। इनमें से 135 का निराकरण हो चुका है और 33 बाकी हैं जिनका सुनवाई 20 जून को मोतीमहल में होगी। पहले सर्किट कोर्ट 16 जून को लगना प्रस्तावित था।

रजिस्टर्ड प्रोजेक्ट में ही खरीदें संपत्ति

रेरा में रजिस्टर्ड नहीं हाेने वाले प्रोजेक्ट में संपत्ति खरीदना समझदारी नहीं होगी। यहां एग्रीमेंट के पालन की गारंटी, बिल्डर के ब्रोशर के मुताबिक विकास न होना या फिर पैसों के लेन संबंधी शिकायतें रेरा में नहीं की जा सकेंगी।

10 फीसदी जुर्माने का है प्रावधान

8 यूनिट से बड़े प्रोजेक्ट रजिस्टर्ड न कराने पर रेरा एक्ट की धारा 59 में संबंधित बिल्डर पर 10 फीसदी तक जुर्माना लगा सकता है।

तलाश रहे हैं पंजीयन न कराने वाले प्रोजेक्ट


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