क्रोध के कारण नजदीकी रिश्ते भी टूट जाते हैं : संस्कार सागर

Gwalior News - रविवार को लोहामंडी जैन मंदिर में पीले वस्त्र पहनकर अर्घ्य देनेे जाते भक्त। सिटी रिपोर्टर | ग्वालियर क्रोध...

Bhaskar News Network

Nov 11, 2019, 08:05 AM IST
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रविवार को लोहामंडी जैन मंदिर में पीले वस्त्र पहनकर अर्घ्य देनेे जाते भक्त।

सिटी रिपोर्टर | ग्वालियर

क्रोध उत्तेजक तत्व है। यह मनुष्य को उग्र बनाता है और बैर की नींव डालता है। क्रोध क्षणिक आता है और चला जाता है। किंतु अपना प्रभाव और भयानक तत्व छोड़ जाता है। क्रोध में लिए गए निर्णयों के परिणाम बाद में बहुत कष्टदायी होते हैं। क्रोध के कारण बहुत ही नजदीक के रिश्ते भी टूट जाते हैं। यह बात लोहामंडी स्थित जैन मंदिर में आयोजित धर्मसभा में मुनिश्री संस्कार सागर महाराज ने कही।

मुनिश्री ने कहा कि दुश्मनी का पाप जन्म-जन्म तक साथ रहता है। क्रोध के शमन के लिए भगवान महावीर ने उपवास और क्षमा शब्द दिया है। क्रोध मानव का मूल स्वभाव नहीं है। मनुष्य मूल प्रकृति शांत भाव से रहने की है। क्रोध से हमेशा मनुष्य को नुकसान ही उठाना पड़ता है। क्रोधी मनुष्य मूर्ख से भी गया बीता होता है। एेसे मनुष्य से जितनी जल्दी दूर हो जाअो उतना ही अच्छा होता है।

किसी का अपमान नहीं करना चाहिए

मुनिश्री ने कहा कि अपमान होने पर हम बहुत दुखी होते हैं। इसलिए हमें किसी को अपमानित नहीं करना चाहिए। क्रोध के स्थान पर यदि करुणा हो तो दुश्मन भी मित्र बन जाता है। अभिमान हमें झुकने नहीं देता है अौर हम अपनों से भी दूर हो जाते हैं। अहंकार छोड़े बिना गुरु परमात्मा का भी नहीं हो सकता है। व्यक्ति को बदलने का अवसर देना चाहिए। बैर जितनी जल्दी हो खत्म कर देना चाहिए। मनुष्य शांत प्रकृति से अपने क्रोध को समाप्त कर सकता है।

भक्तों ने किया जिनेंद्रदेव का अभिषेक: सिद्ध चक्र महामंडल विधान में पं. शशिकांत शास्त्री ने मंत्रोच्चार के साथ अभिषेक कराया। भक्तों ने जिनेंद्र देव का जलधारा से अभिषेक किया। अभिषेक के बाद भक्तों ने महाआरती की। भक्तों ने पीले वस्त्र पहनकर 516 महाअर्घ्य अर्पित किए।

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