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कांग्रेस को सिर्फ एक प्रवक्ता का इस्तीफा मिला पार्टी छोड़ने का एेलान करने वालों का होगा इंतजार
पूर्व केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया के भाजपा में शामिल होने के बाद कांग्रेस में शुरू हुई इस्तीफों की झड़ी थम गई है। 10 व 11 मार्च को सोशल साइट्स पर इस्तीफे की घोषणा करने वाले नेताओं ने संगठन में अधिकृत रूप से इस्तीफा नहीं दिया है। कुछ लोग इस्तीफे का खंडन भी कर रहे हैं।
शुक्रवार को जिला कांग्रेस की पहली साधारण सभा बैठक में पार्टी के कुछ लोगों ने ऐसे लोगों को हटाने का प्रस्ताव रखा, तो कई ने कहा कि जब तक अधिकृत इस्तीफा नहीं आ जाता, तब तक कोई एक्शन नहीं लिया जाए। तय हुआ, ऐसे लोगों का इंतजार किया जाएगा। अभी तक कमेटी के पास प्रवक्ता केसी राजपूत का ही इस्तीफा पहुंचा है। बैठक में पदाधिकारी-कार्यकर्ताओं ने कहा, किसी के जाने से हम अपनी मां समान कांग्रेस को मरने नहीं दे सकते। हम सब मिलकर पार्टी का सदस्यता अभियान चलाएंगेे। अध्यक्ष श्री शर्मा ने कहा कि संगठन के लिए ही हम सब काम कर रहे हैं और हर व्यक्ति किसी न किसी नेता का समर्थक होता है, इससे कोई फर्क नहीं पड़ता। मैं सभी को साथ लेकर चलता रहूंगा। संचालन आनंद शर्मा ने किया।
पहली बार दिग्गी गुट दिखा हावी
ग्वालियर कांग्रेस दफ्तर पर पहली बार साधारण सभा की बैठक में दिग्विजय सिंह का गुट हावी दिखा। इस गुट के दुष्यंत साहनी, अमर सिंह माहौर और यदुनाथ सिंह तोमर को बोलने का मौका भी प्राथमिकता से दिया गया। हालांकि, तीनों ने ही ज्योतिरादित्य सिंधिया का नाम लेकर कोई टिप्पणी नहीं की। वहीं वरिष्ठ नेता चंद्रमोहन नागौरी, महाराज सिंह पटेल, रश्मि पवार शर्मा और हेवरन कंषाना ने कहा कि कांग्रेस ने बुरे से बुरा वक्त देखा है लेकिन हर बार संगठन मजबूत होकर उभरा है और इस बार भी ऐसा ही होगा।
3 काम से खुद को मजबूत करेगी कांग्रेस
1. जोड़ना: जिन लोगों ने सोशल साइट्स पर इस्तीफे देने की पोस्ट की हैं, उन्हें अभी पार्टी से बाहर नहीं माना जा रहा। इन लोगों की अगली सूचना का एक सप्ताह इंतजार किया जाएगा।
2. सदस्यता: कांग्रेस द्वारा सदस्यता अभियान शुरू किया गया है। हर पदाधिकारी व कार्यकर्ता से कहा गया है कि पार्टी दफ्तर से रसीद कट्टे लेकर अपने-अपने क्षेत्र में सदस्य बनाएं। शहर अध्यक्ष डॉ. देवेंद्र शर्मा के मुताबिक अभी पार्टी सदस्यता 95 हजार है, जिसे आगे बढ़ाना है।
3. चुनाव: संगठन ने स्थानीय नेतृत्व को चुनाव के लिए तैयार रहने के लिए कहा है। क्योंकि, फ्लोर टेस्ट के दौरान यदि उपचुनाव या मध्यावधि चुनाव की स्थिति बनती है तो भाजपा से ताकत से लड़ना होगा।
विधायकों के बंगलों पर परेशानी लेकर पहुंच रहे लोग मायूस लौट रहे, नहीं हो रही सुनवाई
ग्वालियर | बेंगलुरु में बैठे कांग्रेस विधायकों के बंगलों से लोग बिना सुनवाई के वापस लौट रहे हैं। इमरती देवी और प्रद्युम्न सिंह तोमर के बंगलों पर लोगों से बाद में आने की कहकर लौटाया जा रहा है। दोनों को शुक्रवार की शाम ही मंत्री पद से हटाया गया है। वहीं कैबिनेट मंत्री लाखन सिंह भी बेंगलुरू में हैं, इसलिए ज्यादा दिक्कत डबरा और भितरवार विधानसभा के लोगों को है।
{प्रद्युम्न सिंह तोमर: ग्वालियर विधायक तोमर के बंगले के दरवाजे तो खुल रहे हैं लेकिन स्टाफ नहीं बैठ रहा। दो-तीन समर्थक और सुरक्षा कर्मी जरूर परिसर में मौजूद थे। अावेदन लेकर अनीता शर्मा दो दिन से पहुंच रही हैं, उन्हें सुरक्षाकर्मी लौटा देते हैं।**
{लाखन सिंह: भितरवार विधायक आैर पशुपालन मंत्री लाखन सिंह भी 8 मार्च से ग्वालियर में नहीं हैं। उनके बंगले पर सिर्फ सुरक्षाकर्मी ही तैनात हैं। बाकी स्टाफ के लोग सुबह एक-दो घंटे बैठकर निकल जाते हैं। यहां भी लोगों की सुनवाई नहीं हो पा रही है।**
{इमरती देवी: इनके झांसी रोड स्थित बंगले का पिछला दरवाजा सिर्फ स्टाफ के िए ही खुल रहा है। सुरक्षाकर्मी बाद में आने की कहकर लोगों को लौटा रहे हैं। छोटी अकबई से आए कैलाश और चरमरा के सीताराम ने बताया कि वे दो दिन में भी मंत्री से नहीं मिल पाए।**
ये है बंगलों का हाल
इमरती देवी के बंगले पर लोगों से काेई नहीं मिल रहा है। दूसरे फोटो में प्रद्युम्न सिंह का सूना बंगला।