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मध्यप्रदेश की सरकार पर कोरोना की मार, सुना किरकिरा हो गया होली का त्योहार: बाबा कानपुरी

एक वर्ष पहले
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moorkh sammelan

सबके मुख से निकली मीठी बोली हो, होली के मूर्ख...

मिटाकर नफरतें दिल से लुटाएं प्यार होली में, किसी से प्यार गर तुमको इजहार करें होली में।

- गीता सिंह गीत, हाथरस

सबके मुख से निकले मीठी बोली हो

होली के मूर्ख सम्मेलन में खूब हंसी ठिठौली हो।

- सुरेश बम, शाजापुर

देश में इस समय दो मुद्दे छाए हुए हैं। एक है कोरोना वायरस और दूसरा है प्रदेश की राजनीति में चल रही उठापटक। इन दोनों ही मुद्दों पर नाेएडा से आए बाबा कानपुरी ने कहा- मध्यप्रदेश की सरकार पर कोरोना की मार, सुना किरकिरा हो गया होली का त्योहार। वह महाराज बाड़े पर आयोजित मूर्ख सम्मेलन में प्रस्तुति दे रहे थे। कार्यक्रम का आयोजन ग्वालियर विकास समिति की ओर से किया गया। संस्था की ओर से 40 वां आयोजन था। इसमें देश के प्रख्यात साहित्यकारों ने भागीदारी की। कार्यक्रम में झांसी के गोविंद सिंह गुल, भेापाल की सबीहा असर, शाजापुर के सुरेश बम, ग्वालियर के अमित चितवन, धर्मपाल मधुकर और विवेक रेंचो ने शिरकत की। कार्यक्रम में वीरेंद्र शर्मा, डॉ. राकेश रायजादा, डॉ.सीपी लाडकानी, मोहन वाधवानी, संतोष सिंह, राकेश कुशवाह सहित अन्य लोग मौजूद रहे। संचालन प्रेम बरौनिया ने किया। कार्यक्रम में महामूर्ख की उपाधि नहीं दी गई।

मजा आ रहा है सनम दिल्लगी से...

कार्यक्रम में मुख्य अतिथि एडीजी राजाबाबू सिंह ने कहा- मजा आ रहा है सनम दिल्लगी से, कि नजरें हम पर और पर्दा भी हमें से।

कार्यक्रम में महामूर्ख की उपाधि इस बार किसी को नहीं दी गई।

कार्यक्रम में साहित्यकार और मुख्य अतिथि एडीजी राजाबाबू सिंह।

पिया मत मारो पिचकारी, सुलगे जो तन मन भीगा। भीग रही मेरी साड़ी, पिया मत मारो पिचकारी। हाय शराबी कर दी तूने, मेरी नशीली ये निगाहें, और नशा लुटाने लग गई, नशीली मेरी निगाहें। - सबीहा असर, भोपाल


रंग बिरंगे रंग दिखते हैं तेरी सूरत भोली में, आज न डालें तो कब डालें रंग बतलाओ होली में।

- अमित चितवन, ग्वालियर

हमारी प|ी ने शर्ट के बटन टांकते हुए कहा- अगर हम प|ी नहीं होते तो आपके बटन कौन टांकता,हमने कहा-तुम प|ी नहीं होती तो कपड़े पहनता ही कौन। - गोविन्द सिंह गुल,झांसी
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