बिहार-झारखंड के ठगों के आगे साइबर पुलिस बेबस
जानकारियां शेयर होने में समय लगता है
जागरुकता के अभाव में अधिकतर लोग लालच में आकर शातिर ठगों को कोई न कोई जानकारी सौंप देते हैं, जिसका दुरुपयोग कर ठग लोगों के खातों से पैसा साफ कर देते हैं। लोन दिलाने और टॉवर लगवाने से शुरू हुआ ठगी का गिरोह अब झांसा देकर हाईटेक एप लोगों के मोबाइल में डाउनलोड कराकर ठगी कर रहा है। पिछले तीन माह में अचानक ही इस तरह की ठगी की शिकायतें बढ़ी हैं और सिर्फ 68 लोगों से 28.62 लाख रुपए की ठगी कर ली गई। डीबी स्टार टीम ने इस मामले का पैरलल इंवेस्टीगेशन किया, तो खुलासा हुआ कि पिछले 14 माह में यानी 425 दिनों में अकेले राज्य साइबर पुलिस के पास 270 शिकायतें पहुंची हैं। इसमें शहर के लोगों से सवा करोड़ रुपए की ठगी कर ली गई। इसी प्रकार क्राइम ब्रांच के पास में भी लगभग 180 शिकायतें पहुंची हैं। इसमें भी ठगी की राशि का आंकड़ा लगभग बराबर ही है यानी सिर्फ 425 दिनों के अंदर शहर के लोगों की गाढ़ी कमाई का ढाई करोड़ रुपए शातिर ठगों के गिरोह ने ऐंठ लिया है। इसमें से राज्य साइबर क्राइम पुलिस ने एक लाख 36 हजार 999 रुपए की रिकवरी की है। बाकी पैसा अब भी शातिर ठग वॉलेट और खातों की चेन बनाकर इधर से उधर ट्रांसफर कर रहे हैं।
100
राज्य साइबर पुलिस में पहुंचे केस
माह शिकायतें
जनवरी 2019 16
फरवरी 2019 20
मार्च 2019 24
अप्रैल 2019 17
मई 2019 14
जून 2019 16
जुलाई 2019 23
अगस्त 2019 21
सितंबर 2019 08
अक्टूबर 2019 17
नवंबर 2019 17
दिसंबर 2019 09
जनवरी 2020 36
फरवरी 2020 32
(नोट: जनवरी 2019 से लेकर दिसंबर 2019 तक 12 माह की अवधि में 202 लोगों से 98 लाख 741 रुपए की ठगी हुई थी। इसके बाद गत दो माह में तेजी से ठगी के मामलों का ग्राफ बढ़ा और 68 लोगों से 26.62 लाख रुपए ठग लिए गए। ठगी की राशि लगभग सवा करोड़ रुपए तक पहुंच गई। इसी प्रकार बाकी 180 शिकायतें क्राइम ब्रांच में पहुंची हैं, जिसमें लोगों से सवा करोड़ रुपए ऐंठ लिए गए।) इनके अलावा कई ऐसे लोग भी हैं जिनकी शिकायतें साइबर पुलिस तक नहीं पहंुची। ऐसे लोगों को संख्या 100 से अिधक हो सकती है।
db star issue
1.37
450
सुधीर अग्रवाल, एसपी, राज्य साइबर पुलिस
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}साइबर ठगी की वारदातों में अपराधी पकड़े क्यों नहीं जाते हैं?
हमारे पास शुरूआती क्लू के तौर पर सिर्फ ट्रांजक्शन की डिटेल होती है। इसे ट्रेस करने और दूसरी एजेंसियों से जानकारियां जुटाने में समय लगता है। इसी बीच ठग बहुत छोटी-छोटी राशि के अलग-अलग ट्रांजक्शन कर कंफ्यूजन पैदा करते हैं। ऐसे में हम ट्रांजक्शन ट्रेस कर उन तक पहुंचने की कोशिश करते हैं।
}लेकिन सभी खाते और वॉलेट तो अब आधार से लिंक हैं?
यह कहना सही है, लेकिन कई बार यूआईडीएआई जानकारी देने से इनकार कर देता है। जानकारी मिलती, तो पता चलता है कि आधार में एड्रेस गलत लिखा हुआ है। कई खाते ऐसे भी मिलते हैं, जो फर्जी दस्तावेजों के आधार पर खोले गए हैं। ऐसे में ठगों तक पहुंचना मुश्किल हो जाता है। जितना समय में हमें जानकारी मिलती है, तब तक ठग आगे के ट्रांजक्शन कर देते हैं।
ठगी में शामिल एक भी आरोपी अब तक नहीं हुआ गिरफ्तार
ये हैं ठगी के पुराने तरीके
}डेबिट व क्रेडिट कार्ड ब्लॉक होने का झांसा।
}करोड़ों की लॉटरी निकलने के नाम पर।
}सस्ती ब्याज दर पर लोन के नाम पर।
}खाली जमीन पर टॉवर लगवाने के लिए।
}सरकारी नौकरी दिलाने के नाम पर।
}इनाम में एसयूवी निकलने का झांसा देकर।
}बैंक में आधार कार्ड अपडेट कराने के नाम पर।
अब ये तरीके अपना रहे हैं ठग
}ऑनलाइन सेल-परचेज का झांसा देकर।
}फॉरेन में जॉब का लालच देकर।
}फेसबुक पर दोस्ती कर गिफ्ट भेजने का झांसा।
}पेटीएम की केवायसी अपडेट कराने के नाम पर।
}ओएलएक्स जैसी वेबसाइट से खरीद के नाम पर।
}यूपीई पर क्रेडिट के बजाय डेबिट लिंक भेजकर।
}स्क्रीन शेयरिंग एप डाउनलोड कराकर।
पुलिस डाल-डाल, ठग पात-पात
शातिर ठग पैसा एेंठने के साथ ही कंफ्यूजन की स्थिति पैदा करने की तैयारी पहले से रखते हैं। पुलिस इंवेस्टीगेशन के दौरान सामने आया है कि खाते से पैसा निकलते ही एक घंटे के अंदर छोटे-छोटे ट्रांजक्शन कर राशि को अलग-अलग जगह बांट दिया जाता है। इससे पुलिस को प्रत्येक ट्रांजक्शन पर नजर रखनी पड़ती है। हाल ही में हुई साढ़े लाख रुपए की ठगी की वारदात में पांच लाख रुपए के अमाउंट को लगभग 100 खातों में अलग-अलग ट्रांसफर कर दिया गया। इससे पुलिस को इन सभी ट्रांजक्शन पर नजर रखनी पड़ती है। जब तक बैंकों या अन्य एजेंसियों से जानकारी आ पाती है, तब तक पैसा कहीं और पहुंच जाता है।
से अिधक शिकायतें नहीं पहुंची थाने तक
लाख रुपए की हुई वसूली
लोगों से ढाई करोड़ ठगे
ग्वालियर की हाईटेक साइबर पुलिस को बिहार व झारखंड के अल्प शिक्षित ठग उल्लू बनाकर 14 माह में 450 लोगों की जेब से ढाई करोड़ रुपए पार कर चुके हैं। नए-नए तरीके अपनाकर लालच में लेने वाले शातिर ठग प्रतिदिन औसतन शहर के एक व्यक्ति को अपने झांसे में लेकर 60 हजार रुपए तक ऐंठ रहे हैं। जनवरी 2019 से लेकर गत फरवरी माह तक राज्य साइबर पुलिस और क्राइम ब्रांच के पास शिकायतों का अंबार लगा हुआ है। साइबर पुलिस कुछ मामलों में पैसा रिकवर कर पाई है, लेकिन अपराधी पुलिस की पकड़ से दूर ही हैं, क्योंकि ज्यादातर ठग झारखंड और बिहार के हैं, जिन्हें ट्रेस कर पाना मुमकिन नहीं हो पा रहा है।
14 माह में शहर के 450 से अिधक लोग हुए साइबर ठगी का शिकार
अरे भाई इसने तो नौकरी का लालच देकर खाता खाली कर दिया...