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1900 में डेविस कप, फिर 1930 में फीफा वर्ल्ड कप शुरू हुआ

एक वर्ष पहले
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पांच खेलों के वर्ल्ड कप या वर्ल्ड चैंपियनशिप होती है- फुटबॉल, क्रिकेट, टेनिस, हॉकी और बैडमिंटन। टेनिस का डेविस कप 1900 में, फीफा वर्ल्ड कप 1930 में, हॉकी वर्ल्ड कप 1975 में, क्रिकेट वर्ल्ड कप 1975 में, बैडमिंटन वर्ल्ड चैंपियनशिप 1977 में शुरू हुई।

वर्ल्ड बैडमिंटन चैंपियनशिप: 45 देशों के 357 खिलाड़ी उतर रहे, भारत के 19; टूर्नामेंट में कोई प्राइज मनी नहीं
पुरुष सिंगल्स में मोमोता और महिला में यामागुची टॉप सीड
भास्कर न्यूज | नई दिल्ली

वर्ल्ड बैडमिंटन चैंपियनशिप सोमवार से बासेल (स्विट्जरलैंड) में शुरू हो रही है। यह चैंपियनशिप का 25वां सीजन है। 1995 के बाद पहली बार चैंपियनशिप स्विट्जरलैंड में हो रही है। इसमें 45 देशों के 357 खिलाड़ी हिस्सा ले रहे हैं। भारत का 19 सदस्यीय दल चैंपियनशिप में हिस्सा ले रहा है। सिंगल्स में भारत के 6 खिलाड़ी, डबल्स में 8 जोड़ियां उतर रही हैं। हाल ही में थाईलैंड ओपन जीतने वाली भारत की पुरुष डबल्स जोड़ी सात्विकसाईराज रैंकीरेड्‌डी और चिराग शेट्‌टी ने चोट के कारण टूर्नामेंट से नाम वापस ले लिया है।

महिला सिंगल्स में पीवी सिंधु, साइना नेहवाल भारतीय चुनौती संभालेंगी। पुरुष सिंगल्स में किदांबी श्रीकांत, एचएस प्रणय, बी साई प्रणीत और समीर वर्मा उतरेंगे। अगर सिंधु आैर साइना अपने-अपने शुरुआती मैच जीत जाती हैं तो सेमीफाइनल में दोनों का सामना हो सकता है। महिला सिंगल्स की डिफेंडिंग चैंपियन स्पेन की कैरोलिना मारिन चोट से रिकवरी कर रही हैं। इसलिए उन्होंने टूर्नामेंट से नाम वापस ले लिया। वर्ल्ड चैंपियनशिप बैडमिंटन का सबसे बड़ा टूर्नामेंट है। लेकिन इसमें कोई प्राइज मनी नहीं होती। बल्कि सिर्फ मेडल और ट्रॉफी दी जाती है। यह बैडमिंटन का सबसे ज्यादा रैंकिंग पॉइंट देने वाला टूर्नामेंट है।

बैडमिंटन का सबसे बड़ा टूर्नामेंट आज से
तस्वीर 1900 में हुए पहले डेविस कप की है।

चैंपियनशिप से पहले प्रमोशनल इवेंट में 3 हजार मीटर ऊंचाई पर आल्प्स पर्वत की चोटी पर बैडमिंटन खेला गया।

चीन के सबसे ज्यादा 30 खिलाड़ी, वहीं 6 देशों के एक-एक हैं
वर्ल्ड बैडमिंटन चैंपियनशिप में इस बार खिलाड़ियों का सबसे बड़ा दल चीन का है। उसके 30 खिलाड़ी टूर्नामेंट में हिस्सा ले रहे हैं। पिछले साल भी चीन के सबसे ज्यादा 31 खिलाड़ियों ने हिस्सा लिया था। उसके 4-4 खिलाड़ी सिंगल्स में उतर रहे हैं और तीनों डबल्स में भी 4-4 जोड़ियां हैं। छह देश (ब्राजील, श्रीलंका, क्रोएशिया, हंगरी, मैक्सिको, इटली) ऐसे हैं, जिसके एक-एक खिलाड़ी ही टूर्नामेंट में उतर रहे हैं। मेजबान स्विट्जरलैंड के 6 खिलाड़ी चैंपियनशिप में शामिल हो रहे हैं।

दुनिया के वो पांच खेल, जिनके वर्ल्ड कप या वर्ल्ड चैंपियनशिप होते हैं, उनमें बैडमिंटन की चैंपियनशिप सबसे बाद में 1977 में शुरू हुई। इस बार इसका 25वां सीजन है। यह अब तक 13 देशों में हो चुकी है।
बैडमिंटन की वर्ल्ड चैंपियनशिप में ऑल इंग्लैंड ओपन के कारण देर हुई
ऑल इंग्लैंड ओपन के कारण बैडमिंटन की वर्ल्ड चैंपियनशिप देर से शुरू हुई। अन्य खेलों में वर्ल्ड चैंपियनशिप सबसे बड़ा टूर्नामेंट होता है। पर बैडमिंटन में ऑल इंग्लैंड ओपन सबसे बड़ा था। यह 1899 से शुरू हो चुका था और पहले ही अनआॅफिशियल रूप से बैडमिंटन की वर्ल्ड चैंपियनशिप था।

ग्वालियर, सोमवार 19 अगस्त , 2019

पीवी सिंधु और साइना दूसरे राउंड से कोर्ट पर उतरेंगी
पीवी सिंधु

साइना और सिंधु को पहले राउंड में बाई मिली है। दोनों दूसरे राउंड से कोर्ट पर उतरेंगी। सिंधु को पांचवीं और साइना को आठवीं वरीयता मिली है। दूसरे राउंड में सिंधु का सामना ताइवान की पाई यू पो और बुल्गारिया की लिंडा जेचिरी के बीच मुकाबले की विजेता से होगा। साइना का मैच स्विट्जरलैंड की सबरीना जाकेट और हॉलैंड की सोराया डि विश्च इजबर्गन के बीच की विजेता से होगा। वहीं पुरुष सिंगल्स में टूर्नामेंट में पहले दिन श्रीकांत का मुकाबला आयरलैंड के नहाट एनगुएन से, समीर का सिंगापुर के लोह कीन यू से, प्रणीत का कनाडा के जैसन एंथनी हो-श्यू से और प्रणय का फिनलैंड के एतू हीनो से होगा। पुरुष डबल्स में मनु अत्री-बी सुमित रेड्डी, एम आर अर्जुन-रामचंद्रन श्लोक और अरूण जार्ज-संयम शुक्ला, जबकि महिला डबल्स में जे मेघना-पूर्विशा एस राम, अश्विनी पोनप्पा-एन सिक्की रेड्डी और पूजा डांडू-संजना संतोष अपनी चुनौती रखेंगे।

साइना नेहवाल

ओलिंपिक ईयर में चैंपियनशिप नहीं होती, इवेंट में एक देश के अधिकतम 4 खिलाड़ी
वर्ल्ड बैडमिंटन चैंपियनशिप सबसे पहले 1977 में हुई। इसके शुरुआती तीन सीजन हर तीन-तीन साल में होते थे। इसके बाद 2005 तक यह हर दो साल में होने लगी। 2006 से यह ओलिंपिक ईयर छोड़कर हर साल होने लगी। चैंपियनशिप में एक देश से सिंगल्स में अधिकतम 4-4 और डबल्स में अधिकतम 4-4 जोड़ियां हिस्सा ले सकती हैं। इस बार पुरुष सिंगल्स में 64, महिला सिंगल्स में 48 और तीनों डबल्स (महिला, पुरुष, मिक्स्ड) में 48-48 जोड़ियां हिस्सा ले रही हैं।

भारत को अब तक 8 मेडल, इसमें सिंधु के 4
भारत टूर्नामेंट में 8 मेडल (3 सिल्वर, 5 ब्रॉन्ज) जीत चुका है। प्रकाश पादुकाेण ने सबसे पहले 1983 में पुरुष सिंगल्स में ब्रॉन्ज जीता। फिर ज्वाला गुट्‌टा-अश्विनी पोनप्पा ने 2011 में महिला डबल्स में ब्राॅन्ज जीता। साइना ने 2015 में सिल्वर और 2017 में ब्रॉन्ज जीता। सिंधु ने 4 मेडल (2013, 14 में ब्रॉन्ज और 2017, 18 में सिल्वर) जीते हैं।

प्रकाश पादुकाेण

बैडमिंटन को ग्लोबल बनाने के लिए 1977 में वर्ल्ड चैंपियनशिप शुरू की
ऑल इंग्लैंड ओपन सिर्फ इंग्लैंड में होता था। बैडमिंटन वर्ल्ड फेडरेशन (बीडब्ल्यूएफ) ने खेल को ग्लोबल और लोकप्रिय बनाने के लिए 1977 से वर्ल्ड चैंपियनशिप की शुरुआत की। सबसे पहली चैंपियनशिप स्वीडन में हुई थी। इसके शुरुआती 5 सीजन तीन महाद्वीपों के 5 अलग-अलग देशों में हुए थे।

सिंगल्स में भारत के 6 खिलाड़ी और डबल्स में 8 जोड़ियां उतर रही हैं
लिन डैन और मारिन सबसे सफल खिलाड़ी
चीन के लिन डैन आौर स्पेन की कैरोलिना मारिन सबसे सफल पुरुष और महिला खिलाड़ी हैं। लिन डैन ने पुरुष सिंगल्स में 5 गोल्ड जीते हैं जबकि मारिन ने महिला सिंगल्स में 3 मेडल जीते हैं। चीन सबसे सफल देश है। उसने शुरुआती दो टूर्नामेंट छोड़कर हर बार गोल्ड जीते। तीन बार तो उसने क्लीन स्वीप किया। चीन ने कुल 182 मेडल जीते हैं।

लिन डैन

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