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सीतापुर में लग रहे हाई क्वालिटी लैदर प्लांट के शुरू होने में कोरोना इफैक्ट के कारण देरी
एमपी आईडीसी के अफसरों ने दावा किया था कि सीतापुर में लग रहे हाई क्वालिटी लैदर प्लांट को अप्रैल के प्रथम सप्ताह में शुरू करा देंगे। इसे लेकर मयूर यूनिकॉर्ट कंपनी के अधिकारियों से लगातार बातचीत चल रही है। खुद कंपनी के अधिकारियों ने 15 मार्च से टेस्टिंग और प्रोडक्शन शुरू करने के दावे किए थे। लेकिन चाइना की टेक्नोलॉजी पर आधारित इस प्लांट के शुरू होने में अब कोरोना इफेक्ट के कारण देरी होती नजर आ रही है। क्योंकि प्लांट को शुरू कराने को लेकर चाइना के इंजीनियर और विशेषज्ञ लोकल अधिकारी-कर्मचारियों को ट्रेनिंग देंगे। लेकिन भारत सरकार ने अब चाइना से किसी भी व्यक्ति के भारत आने पर रोक लगा दी है, क्योंकि वहां कोरोना वायरस की वजह से 3 हजार से अधिक लोगों की मौत हो चुकी है और हजारों लोग इसकी चपेट में है।
लेकिन वहीं कंपनी के अधिकारियों का दावा है कि उन्हें इस बात की कोई चिंता नहीं है। क्योंकि जो भी विषय विशेषज्ञ या इंजीनियर चाइना से आने हैं, वे बीते नवंबर 2019 से भारत में ही है। ऐसे में चाइना से कोई नहीं आता है तो भी उनका प्लांट शुरू हो जाएगा। इसके शुरू होने में कोई दिक्कत नहीं आएगी। लेकिन जब कंपनी के अधिकारियों के इन दावों की पुष्टि एमपी आईडीसी के अफसरों से करनी चाही तो वे ऐसी किसी भी जानकारी से खुद को अनजान बता रहे हैं। कुल मिलाकर वास्तव में हाई क्वालिटी लैदर प्लांट के शुरू होने में कितनी देरी है और क्या वास्तव में चाइना से कुछ इंजीनियरों और विशेषज्ञों के आने का इंतजार किया जा रहा है, इसे लेकर कंपनी और एमपी आईडीसी दोनों ही जानकारियों को पर्याप्त तरीके से सार्वजनिक नहीं कर रहे हैं।
मुझे जानकारी नहीं है
-सुरेश कुमार शर्मा, एमडी, एमपी आईडीसी, ग्वालियर
सवाल: प्रदेश शासन को क्यों नहीं दी गई
मयूर यूनिकॉर्ट के जीएम स्वप्निल व्यास से दैनिक भास्कर ने व्हाट्स एप पर सवाल पूछा कि भारत सरकार ने कुछ दिन पहले चाइना सहित उन सभी देशों के नागरिकों के भारत आने पर रोक लगा दी है जहां कोरोना वायरस बड़े पैमाने पर फैल चुका है। ऐसे में सीतापुर में लगाए गए लैदर प्लांट को शुरू कराने के लिए चाइना से जो इंजीनियर आने वाले थे, वे अब नहीं आ पाएंगे तो कैसे प्लांट शुरू होगा। उन्होंने मैसेज से बताया कि बीते नवंबर 2019 से सब लोग यही हैं। इसलिए कोई दिक्कत नहीं आएगी। यानी प्लांट की स्थापना के समय से चाइना से जो इंजीनियर या मजदूर आए थे, वे यहीं पर हैं और वापस चाइना नहीं गए। लेकिन वे लोग चाइना नहीं गए और भारत या ग्वालियर में ही है तो इसकी जानकारी एमपी आईडीसी या प्रदेश शासन को क्यों नहीं दी गई, इसका जवाब वे नहीं देते हैं।