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हताशा, निराशा, धर्म से विमुखता और व्यसनों की ओर युवा पीढ़ी न जाए, इसलिए की मां सरस्वती की महाअर्चना

Gwalior News - आज के ज्यादातर युवा हताशा, निराशा का शिकार हैं। उनका झुकाव व्यवसनों की ओर है। थोड़े से ही तनाव में आत्महत्या जैसा...

Bhaskar News Network

Apr 17, 2019, 07:25 AM IST
Gwalior News - mp news despair of despair disappointment religion and the addiction towards the younger generation should not go so that the mother of saraswati
आज के ज्यादातर युवा हताशा, निराशा का शिकार हैं। उनका झुकाव व्यवसनों की ओर है। थोड़े से ही तनाव में आत्महत्या जैसा कदम उठा लेते हैं। धर्म में उनकी रुचि नहीं है। एेसे युवाओं को माता सरस्वती की आराधना करनी चाहिए, जिससे उन्हें सद् बुद्धि प्राप्त हो और उनमें आत्मबल का विकास हो। यह विचार मुनिश्री विहसंत सागर महाराज ने मंगलवार को अखिल जैन समाज, वृहत्तर ग्वालियर श्री तीर्थंकर महावीर जयंती महोत्सव समिति द्वारा कंपू स्थित महावीर भवन में आयोजित धर्मसभा में व्यक्त किए। मंच पर मुनिश्री विश्वसूर्य सागर महाराज मौजूद थे। कार्यक्रम में मुनिश्री ने माता सरस्वती का पहली बार महाअर्चना कराई।

मुनिश्री ने कहा कि मां से हमें संस्कार मिलते हैं। हमें अपनी संस्कृति और संस्कारों को बचाने के लिए मां सरस्वती की आराधना करनी होगी, उन्हीं से विवेक और सद्बुद्धि की प्राप्ति हो सकती है। बच्चों में विवेक और सद्बुद्धि के आते ही संस्कार व संस्कृति की सुरक्षा का भाव स्वतः ही पैदा हो जाएगा। पिता का उपकार जन्म के कुछ वर्षों के बाद, भाइयों व मित्रों का उपकार समझदार अथवा बडे़ होने पर, गुरु का उपकार जब पढ़ना शुरु करते हैं तब शुरु होता है, लेकिन मां का उपकार गर्भ से ही शुरु हो जाता है, जो कि जीवन के अंत समय तक रहता है। मां सरस्वती की कृपा के बिना सद्बुद्धि प्राप्त करना असंभव है।

सद् बुद्धि के लिए कंपू स्थित महावीर भवन में माता सरस्वती का पूजन करते जैन समाज के श्रद्धालु।

कलश रोहण की पत्रिका िवमोचित

कार्यक्रम में कांग्रेस के लोकसभा चुनाव प्रत्याशी अशोक सिंह और दक्षिण पूर्व के विधायक प्रवीण पाठक ने 21 से 22 अप्रैल को दीनदयाल नगर मंदिर के कलशरोहण की पत्रिका का लोकार्पण किया। जैन समाज के प्रवक्ता सचिन जैन ने बताया कि युवा पीढ़ी में सद्बुद्धि के विकास के लिए पहली बार माता सरस्वती की महाअर्चना की गई। सरस्वती महाअर्चना के दौरान नया बाजार जैन मंदिर से मुनिश्री के सानिध्य में भक्तगण भगवान महावीर स्वामी की प्रतिमा को पालकी विराजमान कर ढोल ताशे के साथ कार्यक्रम स्थल महावीर भवन पहुंचे, जहां श्रद्धालुओं ने विधि विधान से माता सरस्वती की पूजा-अर्चना की।

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