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आबा महाराज की 150 साल पुरानी पेंटिंग काे फिर देख सकेंगे श्रद्धालु

Gwalior News - शीशम की फ्रेम वाली पेंटिंग हाे गई थी जीर्ण-शीर्ण, कलाकार विनय सप्रे ने 7 दिन में लाैटाया मूलस्वरूप दाल बाजार...

Feb 15, 2020, 07:30 AM IST
Gwalior News - mp news devotees will be able to see 150 years old painting of aba maharaj again

शीशम की फ्रेम वाली पेंटिंग हाे गई थी जीर्ण-शीर्ण, कलाकार विनय सप्रे ने 7 दिन में लाैटाया मूलस्वरूप

दाल बाजार स्थित आबा महाराज के श्रीराम मंदिर के संस्थापक आबा महाराज की आदमकद पेंटिंग जल्द ही श्रद्धालुआें के दर्शन के लिए उपलब्ध हाे गई। शीशम के फ्रेम वाली 150 साल पुरानी यह पेंटिंग आबा महाराज के निर्वाण के तत्काल बाद शेखू निज्जू नामक कलाकार ने तैयार की थी। कई साल पहले यह पेंटिंग काफी जीर्ण-शीर्ण स्थिति में पहुंचने से एेसा लगने लगा था कि शायद ही इसे सुरक्षित रखा जा सके। लेकिन भाेपाल के कलाकार विनय सप्रे ने पिछले सात दिन में इस पेंटिंग काे पुराने स्वरूप में लाकर सुरक्षित कर दिया है। खास बात यह है कि यह काम आबा महाराज के 151 वें निर्वाण वर्ष के शुभारंभ पर हुआ है।

जेजे आर्ट स्कूल मुम्बई से 1979 में मूर्तिशिल्प में स्वर्ण पदक हासिल करने वाले सप्रे कहते हैं- आबा महाराज मंदिर के उपेंद्र शिरगांवकर आैर राघवेंद्र शिरगांवकर ने कुछ समय पहले ही 150 साल पुरानी इस पेंटिंग काे सुरक्षित रखने काे लेकर चिंता जताई थी। उसके बाद ही मैंने इसे संवारने का काम किया आैर वह भी उसके मूल स्वरूप काे ज्याें का त्याें रखते हुए। इसके लिए मूल पेंटिंग में इस्तेमाल किए गए रंगाें का भी विशेष ध्यान रखा गया है। इस सबके बाद भी श्री सप्रे ने पेंटिंग पर मूल कलाकार शेखू का नाम भी ज्याें का त्याें रखा लेकिन श्री शिरगांवकर के आग्रह पर एक तरफ अपना नाम लिखा, वह भी बहुत छाेटे अक्षराें में।

जर्जर हो चुकी आबा महाराज की आदमकद पेंटिंग को भोपाल के कलाकार विनय सप्रे ने जीर्णोद्धार कर दिया।

अब

पहले

शिरगांव से ग्वालियर आए थे आबा महाराज

आबा महाराज का जन्म 1812 में शिरगांव, सतारा में हुआ था। उनके पिताश्री लक्ष्मण स्वामी जब पदभ्रमण पर थे,तब उऩकी भेंट मथुरा में महादजी सिंधिया से हुई थी। महादजी ने उनसे ग्वालियर आने का आग्रह किया। इसके बाद आबा महाराज ग्वालियर आए आैर उन्हाेंने समर्थ रामदास के संदेश के माध्यम से सामाजिक, धार्मिक, आध्यात्मिक, सांस्कृतिक चेतना फैलाने का प्रयास ग्वालियर में आरंभ किया। दाल बाजार स्थित श्रीराम मंदिर में उनके द्वारा रचित श्री चरित्र की मूल पांडुलिपि सहित कई ग्रंथ माैजूद हैं।

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