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किसी भी उम्र में प्रारंभ की जा सकती है ईश्वर की भक्ति : शास्त्री

एक वर्ष पहले
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भागवत कथा

ईश्वर की भक्ति के लिए उम्र का इंतजार नहीं करना चाहिए। यह किसी भी उम्र में की जा सकती है। ईश्वर की भक्ति में इतनी शक्ति होती है कि वे भक्त को बचाने के लिए कुछ भी कर देते हैं। भक्त को किसी प्रकार का कष्ट न पहुंचे अौर वह दुखी न रहे इसकी व्यवस्था ईश्वर पहले ही कर देते हैं। इसलिए हमें हमेशा ईश्वर पर विश्वास करना चाहिए। यह बात दर्पण कॉलोनी स्थित भदौरिया मार्केट में चल रही भागवत कथा में आचार्य पं. राममोहन शास्त्री ने कही।

श्री शास्त्री ने कहा कि जीवन में संगत का बहुत ही महत्व है। हमारी संगत किस तरह के लोगों से रही इसका हमारे जीवन पर बहुत ही प्रभाव पड़ता है। यही कारण है कि बालक ध्रुव ने बहुत ही छोटी सी उम्र में ही ईश्वर को पा लिया था। माता की उपेक्षा करने पर वे ईश्वर की आराधना करने वन में निकल गए अौर उन्हें ईश्वर प्राप्त हुए। ईश्वर की आराधना के लिए हमें भी उम्र या समय का ध्यान नहीं रखना चाहिए। जीवन में अभिमान अौर कटु वचन हमारे जीवन के लिए बहुत ही घातक होते हैं। अभिमान करने वाला व्यक्ति कभी भी सुखी नहीं रह सकता। उसका अभिमान उसकी उन्नति में में बहुत बड़ा बाधक होता है। इसी अभिमान के कारण वह एेसे मौके गंवा देता है जो उसके जीवन को ऊपर उठा सकते थे। अभिमान के कारण रावण जैसे महाप्रतापी का कुल तक नष्ट हो गया तो हम अाप क्या चीज हैं। इसलिए अपनी उन्नति के लिए जितना जल्दी हो अभिमान त्यागकर जीवन में अागे बढ़ना चाहिए।

भदौरिया मार्केट में चल रही भागवत कथा में मौजूद श्रद्धालु।
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