आईसीयू परिसर में बनी डायलिसिस यूनिट।

Gwalior News - जयारोग्य अस्पताल में किडनी के मरीजों की डायलिसिस बंद होने से हालत बिगड़ गए हैं। यहां हर रोज पांच से छह भर्ती मरीज...

Bhaskar News Network

Jul 14, 2019, 07:35 AM IST
Gwalior News - mp news dialysis unit built on the icu campus
जयारोग्य अस्पताल में किडनी के मरीजों की डायलिसिस बंद होने से हालत बिगड़ गए हैं। यहां हर रोज पांच से छह भर्ती मरीज डायलिसिस कराने आते हैं, लेकिन दोनों टेक्नीशियन छुट्टी पर होने के कारण उनकी डायलिसिस नहीं हो पा रही है।


आईसीयू परिसर में बनी डायलिसिस यूनिट।

डीबी स्टार
जेएएच स्थित आईसीयू की डायलिसिस यूनिट में चार मशीनें हैं। किडनी वार्ड में भर्ती मरीजों के डायलिसिस यहां किए जाते हैं। यूनिट में पदस्थ टेक्नीशियन आशा शर्मा मेडिकल लीव पर हैं, वहीं पंकज वर्मा भी लंबे अवकाश पर गए हंै। किडनी वार्ड में इस समय पांच मरीज भर्ती हैं, इसके अलावा कई बाहरी मरीज भी डायलिसिस यूनिट के भरोसे हैं। निजी अस्पतालों में डायलिसिस 1200 से 1600 रुपए तक में होती है और इसके अलावा दवाओं में भी पैसे खर्च होते हैं। कुछ मरीजों की शिकायत पर जब डीबी स्टार टीम ने डायलिसिस यूनिट और किडनी वार्ड का जायजा लिया तो पता चला कि किडनी मरीजों की डायलिसिस गत पांच दिनों से बंद है। इस मामले मेंें डीबी स्टार ने गजराराजा मेडिकल कॉलेज के मेडिसिन विभाग के एचओडी से बात की तो उन्होंने बताया कि हमें स्टाफ के अवकाश पर जाने की जानकारी मिल गई है। हम प्रयास करेंगे कि डायलिसिस सुविधा जल्द शुरू हो। इस मामले में चिकित्सा शिक्षा विभाग के अफसरों से सवाल किए गए तो उनका कहना है कि हम मामले की जानकारी लेकर आवश्यक कार्रवाई करेंगे।

जेएएच में डायलिसिस बंद

किडनी वार्ड में भर्ती मरीज।

डायलिसिस का निजी विज्ञापन

डायलिसिस बंद होने के बाद आईसीयू परिसर में कुछ निजी अस्पतालों ने पोस्टर लगा दिए हैं, जिसमें कम दाम में डायलिसिस करने का प्रचार किया गया है। इसके पीछे अस्पताल के ही कुछ डॉक्टरों का भी हाथ है।

शीघ्र शुरू कराएंगे डायलिसिस

जेएएच में किडनी के मरीजों के डायलिसिस बंद होने की जानकारी अभी मुझे भी मिली है। हम डायलिसिस यूनिट जल्द ही शुरू कराएंगे वहीं ऐसा क्यों हुआ इस मामले में पूरी जानकारी भी लेंगे। डॉ. अशोक मिश्रा, अधीक्षक, जेएएच ग्रुप

टेक्नीशियन अवकाश पर है

डायलिसिस यूनिट के दोनों टेक्नीशियन के अवकाश पर जाने के कारण दिक्कत आने की जानकारी मुझे मिल गई है। हम प्रयास कर रहे हैं कि जल्द से जल्द मरीजों की डायलिसिस सुविधा शुरू करें। डॉ.ओपी जाटव, एचओडी मेडिसिन विभाग

क्या है डायलिसिस

जब किडनी संक्रमण या डैमेज होने के कारण अपना नेचुरल कार्य नहीं कर पाती है तो व्यक्ति के शरीर के विषाक्त पदार्थ मूत्र के जरिए शरीर के बाहर नहीं जा पाते है। इस कारण वह गंभीर हालात में पहुंच जाता है। इस स्थिति में खून भी अशुद्ध हो जाता है। ऐसे में मरीज की डायलिसिस की जाती है। इस प्रक्रिया में किडनी का काम डायलिसिस मशीन करती है। मशीन अशुद्ध खून व अन्य अपशिष्ट को बाहर निकाल कर साफ किए गए खून को वापस मरीज के शरीर मे भेज देती है। डायलिसिस हर मरीज की स्थिति पर निर्भर करता है। किसी मरीज को एक दिन छोड़कर तो किसी मरीज को एक सप्ताह में तो किसी को 15 दिन में डायलिसिस करानी पड़ती है।

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