अपने स्वार्थ के लिए दूसरे का उपयोग नहीं करें: शास्त्री
जब भी हम किसी का हृदय दुखाते हैं तो ईश्वर हमारे लिए दुख के द्वार खोलना शुरू कर देता है। इसलिए कभी भी किसी से छल-कपट नहीं करना चाहिए। अपने स्वार्थ के लिए हमें कभी भी किसी का उपयोग नहीं करना चाहिए। यह बात दर्पण कॉलोनी स्थित भदौरिया मार्केट में प्रारंभ हुई भागवत कथा के पहले दिन कथा वाचक आचार्य पं. राममोहन शास्त्री ने कही। कथा से पूर्व कलश यात्रा निकाली गई। कलश यात्रा थाटीपुर स्थित हनुमान मंदिर से प्रारंभ होकर कथा स्थल तक पहुंची।
आचार्यश्री ने कहा कि हमें ईश्वर पर हमेशा विश्वास रखना चाहिए। ईश्वर समय-समय पर हमारी परीक्षा लेता रहता है। इसी कारण वह हमें दुख देता है। अपार दुख अाने पर भी जो भक्त ईश्वर की आराधना में लगा रहता है। ईश्वर उसे सारे कष्टों अौर दुखों से निकालने के लिए स्वत: ही मार्ग बनाना शुरू कर देता है। ईश्वर अपने भक्त को अपनी ही शरण में लेकर सारे दुखों से मुक्त करता है। अपने भक्त को मजबूत बनाने के लिए ही ईश्वर अपने भक्त को अपार कष्ट देता है। हमें जितना हो हमेशा संस्कारी जीवन जीना चाहिए। कभी-कभी दुख अाने पर भक्त भक्ति के मार्ग से भटक जाता है। एेसे में भी ईश्वर अपने भक्त का हाथ नहीं छोड़ते। अाचार्यश्री ने कहा कि नारी ही एक एेसी शक्ति है जो किसी को भी सद्मार्ग या कुमार्ग पर ले जा सकती है। माता का दायित्व है कि वह बच्चों को हमेशा संस्कारी बनाए। हमें बच्चों को प्रतिदिन रामायण पढ़ने के लिए प्रेरित करना चाहिए। यदि बच्चा पढ़ नहीं सकता तो उसे रामायण सुनाना चाहिए। बच्चे के कान में जैसे शब्द जाएंगे वैसे ही उसका संस्कार बनते जाएंगे।
थाटीपुर स्थित हनुमान मंदिर में श्रीमद् भागवत कथा शुरू होने से पहले कलश यात्रा निकाली गई।