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पैसे की कमी तोड़ रही दिव्यांग खिलाड़ी का सपना

एक वर्ष पहले
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ग्वालियर डीबी स्टार

शहर के आनंद नगर में रहने वाली प्राची यादव जन्म से ही दिव्यांग हैं। प्राची जब आठ साल की थीं, तब कैंसर के चलते उनकी मां का निधन हो गया था। कृषि विभाग में चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी पिता ने ही प्राची की परवरिश की। अब पिता रिटायर हो चुके हैं और उनकी आर्थिक स्थिति ऐसी नहीं है कि वे प्राची के लिए इस प्रतियोगिता में आने वाला खर्च वहन कर सकें। इस प्रतियोगिता में जाने के लिए प्राची को कम से कम डेढ़ लाख रुपए की अावश्यकता है। इस रकम के इंतजाम के लिए प्राची ने खेल विभाग को भी आवेदन दिया है।

आठ से अिधक मेडल जीते
प्राची अमर ज्योति स्कूल में पढ़ती थीं। इस दौरान उन्होंने एक्सरसाइज के लिए एलएनआईपीई के स्वीमिंग कोच डॉ. वीके डबास से संपर्क किया। डॉ. डबास ने प्राची को तैराकी के गुर सिखाए। तैराकी सीखने के बाद प्राची अब तक कई प्रतियोगिताओं में भाग ले चुकी हैं। उन्होंने अब तक नेशनल में आठ से अधिक मेडल जीते हैं। यदि प्राची इस विश्व चैंपयिनशिप के टॉप टेन में स्थान बना लेती हैं, तो उनका चयन 2020 में जापान के टोक्यो में होने वाले पैरालंपिक में हो जाएगा। पैरालंपिक में भाग लेना हर दिव्यांग खिलाड़ी का सपना होता है।

पहले रिश्तेदारों ने की थी सहायता
इसी वर्ष मई माह में पोलैंड में आयोजित कैनो विश्वकप में भाग लेने के लिए प्राची को सवा लाख रुपए की जरूरत थी। तब प्राची के रिश्तेदारों ने मदद की थी। प्राची ने यह सहायता व्यर्थ नहीं जाने दी और विश्व में आठवीं रैंकिंग पाई।

हम प्राची की मदद के लिए प्रयासरत हैं
 प्राची का विश्व चैंपियनशिप में चयन हो गया है, लेकिन उसके पास वहां जाने के लिए पैसे नहीं हैं। हम लोग कोशिश कर रहे हैं कि उसे किसी सामाजिक संगठन से आर्थिक सहायता मिल जाए। डॉ. वीके डबास, तैराकी कोच

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