अहंकार व्यक्ति के विनाश का सूचक है: विहर्ष सागर
अहंकार मनुष्य के विनाश का सूचक है। हमें जितना जल्दी हो सके अहंकार को त्याग देना चाहिए। इस संसार में सबसे बड़ा पराक्रम इंद्रियों को वश में करना है। जो व्यक्ति अपनी इंद्रियों को वश में कर जीवन पथ पर अागे बढ़ता है, सफलता हर पग पर उसके कदम चूमती है। एेसे व्यक्ति को निराशा से बाहर निकालने की व्यवस्था ईश्वर स्वयं कर देता है। यह बात राष्ट्रसंत मुनिश्री विहर्ष सागर महाराज ने शुक्रवार को फूलबाग स्थित गोपाचल पर्वत पर स्थित दिगंबर जैन मंदिर में कही। इस अवसर पर मुनिश्री विजयेश सागर महाराज अौर छुल्लक विश्वोत्तर महाराज उपस्थित थे।
मुनिश्री ने कहा कि मनुष्य का अहंकार उसे इंसान से तो क्या परमात्मा से भी दूर ले जाता है। मनुष्य का शरीर उसे भक्ति के लिए मिलता है लेकिन मन उसकी इंद्रियों को स्थिर नहीं रहने देता। इंद्रियां मनुष्य को भटका देती हैं। इंद्रियों को वश में करने के लिए परमात्मा के नाम का अंकुश जरूरी है। जीवन में सिर्फ गुरु ही मनुष्य के मन को अंकुश में लाने का मार्ग बता सकता है।