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ये कर्जमाफी है ब्याज मुक्ति नहीं; 31 मार्च 2018 के बाद का ब्याज किसानों को ही देना होगा

2 वर्ष पहले
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  • 31 मार्च 2018 तक की स्थिति में किया कर्ज माफ
  • बैंकों को राशि मिली फरवरी 2019 में
  • 11 माह का ब्याज किसानों को ही चुकाना होगा

दतिया। प्रदेश सरकार ने भले ही किसानों का दो लाख रुपए तक का कर्ज माफ करने का ऐलान किया है, लेकिन किसान पूरी तरह से कर्ज मुक्त नहीं हो पाएंगे। सरकार ने 31 मार्च 2018 की स्थिति में किसानों की कर्ज माफी का वादा किया है, जबकि सरकार ने बैंकों को राशि फरवरी 2019 से भेजनी शुरू की है। ऐसे में 31 मार्च 2018 के बाद से अब तक के 11 माह के ब्याज का बोझ किसानों पर ही रहेगा। इस ब्याज की राशि सरकार नहीं चुकाएगी।

 

मालूम हो कि अब तक किसानों को यही पता था कि सरकार कर्ज चुका देगी तो उनके खाते में जीरो बैलेंस हो जाएगा, लेकिन ऐसा नहीं है। इधर वित्त मंत्री तरुण भनोट का कहना है कि इस बारे में अभी ज्यादा जानकारी नहीं है। इस संबंध में अफसरों से बात करने के बाद ही कुछ पाऊंगा। वहीं आचार सहिंता के फेर में जिन किसानों की अभी कर्ज माफी की राशि नहीं आई है, उन्हें और ज्यादा ब्याज चुकाना पड़ सकता है।

 

  • बैंकों के साथ सरकार को राहत इसलिए पहले एनपीए खातों को लिया

बता दे कि बैंक का नियम है कि अगर कोई खाता 3 साल या इससे अधिक समय से एनपीए है तो ऐसे ऋण खातों को ऋण दाता से 50 फीसदी राशि लेकर खातों को समायोजित कर दिया जाए। इसलिए शासन की कर्जमाफी योजना में बैंक एनपीए खातों पर 50 फीसदी राशि स्वयं भुगतने को तैयार हो गए। इससे बैंकों को यह लाभ मिला की उन्हें 50 फीसदी एनपीए खातों की राशि का लाभ मिल जाएगा और सरकार को यह फायदा रहा कि 50 फीसदी राशि देकर किसानों को कर्ज मुक्त कर देगी। योजना के तहत एक साल से अधिक व 3 साल से कम समय से एनपीए चल रहे खातों में बैंक 25 फीसदी राशि जमा करेगी। 

 

अभी काम रुका: प्रदेश में 25 फरवरी से किसानों की कर्ज की राशि बैंकों को देनी शुरू की है। 9 मार्च को लोकसभा चुनाव की आचार संहिता लगने से फिलहाल इस काम को रोक दिया गया है। 9 मार्च से पहले शासन ने कालालीत खातों के साथ 50 हजार रुपए तक के त्रणी किसानों को ऋण समायोजन किया है।

 

  • ब्याज का गणित कुछ इस तरह रहेगा... 

सरकार ने 31 मार्च 2018 की स्थिति में कर्जमाफ किया है। चूंकि बैंक का नियम है कि ऋण खातों पर तिमाही ब्याज जोड़ा जाता है। ऐसे में फरवरी 2019 तक ऋण खातों पर 11 माह का ब्याज जोड़ा जाएगा। अगर किसी किसान पर 31 मार्च 2018 की स्थिति में 2 लाख रुपए का ऋण है और सरकार ने ऋण माफी योजना के तहत संबंधित बैंक को मार्च 2019 में दो लाख रुपए ऋण की राशि दी तो इन 12 माह का ब्याज देना पड़ेगा। 12 माह का ब्याज लगभग 14 हजार रुपए बनता है। केसीसी पर किसान से 7 फीसदी ब्याज लिया जाता है। 

 

किसान को देना होगा ब्याज

सरकार की ऋणमाफी योजना में सब कुछ स्पष्ट है। बैंक खातों में राशि तभी समायोजित करेगा, जब शासन से पैसा मिल जाएगा। ऐसे में 31 मार्च 2018 के बाद ऋण खातों पर राशि मिलने तक ब्याज चलेगा। इस ब्याज की राशि को किसानों को ही भरना होगा।

ओम प्रकाश एंडेले, एलडीएम, दतिया

अभी पूरी जानकारी नहीं है

चालू खाते (परफॉर्मिंग एसैट) वाले किसान जो सम्मान निधि दी है, उसमें ब्याज का मामला रहेगा। हालांकि निर्भर करता है कि किसान ने कितनी रकम निकाली और कितनी जमा की। पूरी जानकारी तो दस्तावेज देखने के बाद ही दे सकेंगे।

अनुराग जैन, प्रमुख सचिव, वित्त मप्र शासन

 

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