उड़ो, आजाद हो तुम कहां किसने रोका है, परों को छांटकर बोले...

Gwalior News - उड़ो, आजाद हो तुम कहां कब किसने रोका है, परों को छांटकर बोले जमाना आसमान छू लो तुम। यह पंक्तियां रश्मि कुशवाह ने...

Bhaskar News Network

Aug 19, 2019, 07:35 AM IST
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उड़ो, आजाद हो तुम कहां कब किसने रोका है, परों को छांटकर बोले जमाना आसमान छू लो तुम। यह पंक्तियां रश्मि कुशवाह ने पढ़ीं। सखी संवाद समूह की ओर से जीवाजी क्लब में वार्षिक उत्सव का आयोजन किया गया। चर्चा का विषय ‘लोग क्या कहेंगे’ रखा गया। कार्यक्रम की शुरुआत करते हुए साहित्यकार कादंबरी आर्य ने कहा कि लोग कुछ नहीं कहेंगे तो जिंदगी में मजा क्या रह जाएगा।

लोगों के कहने के डर से ही हम बुरे कामों से बचते हैं और अच्छे काम के जरिए समाज में इज्जत बनाने की कोशिश करते हैं। इसके बाद नीलम गुप्ता ने कहा कि रोटी कपड़ा मकान के बाद इंसान की सबसे बड़ी जरूरत समाज है। इसलिए लोग क्या कहेंगे, इसकी परवाह करना स्वाभाविक है। इस दौरान संस्था की आगामी गतिविधियों पर चर्चा की गई। इस अवसर पर संगीता जैन, शालिनी इंदौरकर, गिरिजा कुलश्रेष्ठ, प्रतिभा द्विवेदी, सुनीति बैस, कुंदा जोगलेकर, रश्मि सवा मौजूद रहीं।

सखी संवाद समूह के वार्षिक उत्सव में महिला साहित्यकारों ने रचनाएं पढ़ीं

सखी संवाद समूह के कार्यक्रम में मौजूद महिला साहित्यकार।

इन्होंने भी रखे विचार

कार्यक्रम में डॉ. मुक्ता सिकरवार ने कहा कि चोट खाकर ही समझे जमाने को हम, क्या कहें दर्दे दिल के फसाने को हम, लोग चेहरे पे चेहरा बदलते रहे, आजमाते भी क्या आजमाने को हम। इसी क्रम में कुसुमलता शर्मा सहित अन्य साहित्यकारों ने विचार रखे।

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