सरकारी जमीन खुर्द-बुर्द करने के मामले में गिरेगी गाज

Bhaskar News Network

May 18, 2019, 07:41 AM IST

Gwalior News - रमन पोपली

Gwalior News - mp news government will fall in the case of scrutiny
रमन पोपली
ग्वालियर में लंबे समय से पदस्थ पटवारी व राजस्व निरीक्षकों को भू राजस्व संहिता का पाठ पढ़ाने वाले ज्वाॅइंट कलेक्टर विनोद सिंह ने सरकारी जमीन पर कब्जा कर ढाबा बनाने वाले सलीम खां के खिलाफ इस तरह से कार्रवाई की जिससे जमीन प्राइवेट घोषित होने की संभावना बन गई।

भू-राजस्व संहिता की धारा 172 में केवल प्राइवेट जमीन अर्थात स्वयं के मालिकाना हक की जमीन पर गलत निर्माण के खिलाफ कार्रवाई की जाती है। लेकिन सरकारी जमीन पर कब्जा कर गलत निर्माण करने के मामले में धारा 248 में कार्रवाई होती है। इस मामले में संभागीय आयुक्त महेश चौधरी ने अपर कलेक्टर दिनेश श्रीवास्तव के खिलाफ व ज्वाॅइंट कलेक्टर व एसडीएम घाटीगांव विनोद सिंह के खिलाफ कारण बताओ नोटिस जारी कर विभागीय जांच के आदेश दिए हैं।

यह है धारा में अंतर

investigation

मप्र भू राजस्व संहिता 1959 की धारा 172 व उसकी उप धारा की कार्रवाई निजी भूमि के लिए की जाती है। और इसकी धारा 248 की कार्रवाई शासकीय भूमि पर अतिक्रमण के लिए की जाती है।

डीबी स्टार के सवाल




आपके हिसाब से इस तरह के मामलों में क्या होना चाहिए?

आईएएस पर शक, कार्रवाई के दायरे में ज्वॉइंट कलेक्टर

अब सुनें जिम्मेदारों के जवाब

विनोद सिंह, तत्कालीन एसडीएम घाटीगांव और वर्तमान एसडीएम जौरा

अतिक्रमणकारी को ऐसे होता फायदा

नहीं, मैने किसी सरकारी जमीन को खुर्दबुर्द नहींं किया।

अरे, मुझे तो ऐसा कोई भी मामला याद ही नहीं है।

जब मैं इस बारे में कुछ जानता ही नहीं हूं, तो फिर कुछ भी कैसे कह दूं।

अतिक्रमण हटाने के लिए अभियान चलता है और पेनल्टी लगती है।

यदि अतिक्रमणकारी अपील नहीं करता और धारा 172 के तहत किए गए जुर्माने को भर देता और चार से पांच साल कुछ नहीं कहता तो वह दावा कर सकता था कि वह जमीन उसकी है। क्योंकि उसके खिलाफ निजी भूमि के विरुद्ध की जाने वाली कार्रवाई की धारा 172 के तहत कार्रवाई की गई है। खसरे में भूमि शासकीय लिखी है उसे सही करके मेरे नाम (निजी) की जाए। जिससे भविष्य में वह भूमि निजी हो सकती थी।

कमिश्नर कोर्ट में आया था मामला

सलीम खां ने इस मामले को लेकर फरवरी 2018 में कमिश्नर कोर्ट में अपील की। जहां पर कमिश्नर महेश चंद्र चौधरी ने इस बात को गंभीर माना कि शासकीय भूमि होने के बाद भी एमपी एलआरसी की धारा 172 के तहत कार्रवाई की गई। जबकि धारा 248 के तहत की जानी चाहिए थी। उन्होंने धारा 248 में कार्रवाई करने के आदेश दिए। साथ ही वहां से अतिक्रमण हटाने को भी कहा।

दिनेश श्रीवास्तव, तत्कालीन अपर कलेक्टर, वर्तमान उप सचिव जनजातीय विभाग

किसी सरकारी जमीन को खुर्दबुर्द नहीं किया गया है।

मेरे पास कोई कागज ही नहीं है, तो मैं कुछ नहीं कह सकता।

मुझे इस मामले के संबंध में कोई जानकारी नहीं है।

बिना कागज देखे मैं कुछ नहीं कह सकता, मुझे जानकारी ही नहीं है।

कमिश्नर ने यह खड़े किए सवाल

कमिश्नर महेश चंद्र चौधरी ने जांच के आदेश देते हुए गंभीर सवाल खड़े किए। जिसमें उन्होंने धारा 172 के तहत फैसला सुनाने वाले अधिकारियों के बारे में कहा कि ऐसा प्रतीत होता है कि अनुविभागीय अधिकारी (राजस्व) घाटीगांव तथा अपर कलेक्टर ग्वालियर द्वारा नियमों की अनदेखी कर आदेश पारित किए गए। शासकीय भूमि को निजी भूमि मानकर कार्रवाई की गई। इससे पीछे अतिक्रमणकर्ता को लाभ पहुंचाने की पूरी आशंका प्रतीत होती है। शासन के हितों के विपरीत आदेश पारित किए हैं। अपर कलेक्टर ने आदेश को स्थिर रख निजी व्यक्ति को शासकीय भूमि पर निजी लाभ पहुंचाने का कु-संयोजित प्रयास किया है। इसलिए विवादित आदेश पारित करने वाले पीठासीन अधिकारी विनोद सिंह के विरुद्ध कार्रवाई की जाए। साथ ही आरोप पत्र, आरोप के आधार इत्यादि इस कार्यालय को शीघ्र भिजवाएं।

यह हो सकती है कार्रवाई

सामान्य प्रशासन विभाग करेगा कार्रवाई

 इस केस में आगामी कार्रवाई के लिए कलेक्टर को पत्र लिखा गया है। संबंधित अधिकारी वहीं इस केस के बारे में जानकारी भेजेंगे। उसके बाद सभी कागजात सामान्य प्रशासन विभाग के पास जाएंगे। सामान्य प्रशासन विभाग ही निर्णय लेगा कि संबंधित अफसरों पर क्या कार्रवाई करनी है। वह विभागीय जांच या अन्य किसी प्रकार की कार्रवाई कर सकते हैं। महेश चंद्र चौधरी, संभागीय आयुक्त

कौन हैं विनोद सिंह: विनोद सिंह वर्तमान में जौरा में एसडीएम हैं। वे पहले सरगुजा में एसएलआर रहे। वर्ष 2000 से ग्वालियर में अधीक्षक भू अभिलेख ऑफिस में एलएलआर रहे। 2013 में डिप्टी कलेक्टर बने। छह महीने तक वे लश्कर एसडीएम और बाद में घाटीगांव एसडीएम बने। श्री सिंह सुप्रीम कोर्ट में विचाराधीन एक प्रकरण में फैसला सुनाने को लेकर चर्चा में आए थे।

कमिश्नर द्वारा पारित आदेश के बाद संबंधित डिप्टी कलेक्टर के खिलाफ सामान्य प्रशासन विभाग जांच करेगा। जांच में तथ्य सही पाए गए और गंभीर गलती मानी गई तो विभाग कार्रवाई कर सकता है। इसमें इंक्रीमेट रोकने, प्रमोशन रोकने से लेकर रिवर्ट तक की कार्रवाई हो सकती है।

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