जीआरएमसी की 22 खामियों का खुलासा

Gwalior News - विशेषज्ञाें की सेवाएं नहीं ली मेडिकल गवर्निंग कमेटी द्वारा संचालित मेडिकल काउंसिल ऑफ इंडिया (एमसीआई) ने 27...

Feb 22, 2020, 07:26 AM IST
विशेषज्ञाें की सेवाएं नहीं ली

मेडिकल गवर्निंग कमेटी द्वारा संचालित मेडिकल काउंसिल ऑफ इंडिया (एमसीआई) ने 27 जनवरी को जारी रिपोर्ट में जीआर मेडिकल काॅलेज में 22 खामियां बताकर एमबीबीएस की 100 सीटें बढ़ाने से इनकार दिया जबकि इंदौर में एमबीबीएस की 100 सीटें बढ़ गईं। जीआर मेडिकल काॅलेज में एमसीआई में इंस्पेक्टर के तौर पर सेवाएं दे चुके तीन चिकित्सा शिक्षक ग्वालियर में ही पदस्थ हैं। इसके अलावा इंदौर मेडिकल काॅलेज की डीन डाॅ. ज्योति बिंदल भी ग्वालियर की मदद कर सकती थीं, लेकिन चिकित्सा शिक्षा विभाग के प्रमुख सचिव, आयुक्त व डायरेक्टर से लेकर डिवीजनल कमिश्नर तक ने एमसीआई निरीक्षण के पहले तैयारियों की ठीक से समीक्षा नहीं की। अब 27 फरवरी 2020 तक कॉलेज को कमियां पूरी कर एमसीआई को बताना है जो संभव नहीं है।

ये बताई खामी: 16.88 प्रतिशत फैकल्टी की कमी।

वर्तमान स्थिति: एससी-एटी के छह पद भरने के लिए नेशनल लेवल का एड जारी करने में देरी, कुछ पद शासन से सृजित नहीं हुए तो कुुछ पर ज्वाॅइनिंग हो सकी।

ये बताई खामी: 6.15 प्रतिशत रेजीडेंट की कमी।

वर्तमान स्थिति: रेजीडेंट पदों पर भर्ती के लिए प्रक्रिया चल रही है।

ये बताई खामी: ओपीडी में मरीजों की संख्या में कमी।

वर्तमान स्थिति: माधव डिस्पेंसरी में जगह व स्टाफ की कमी के कारण इलाज में देरी हाेने से कई मरीज लौट रहे हैं।

ये बताई खामी: गायनिक विभाग की ओपीडी में जगह कम ।

वर्तमान स्थिति: ओपीडी में जगह की अभी तक कोई व्यवस्था नहीं। हालात अभी भी जस के तस बने हुए हैं।

ये बताई खामी: 143 बेड की कमी।

वर्तमान स्थिति: नई बर्न यूनिट के बेड को सर्जरी में शामिल करने के प्रयास, अस्थि रोग विभाग के बेड बढ़ाने के लिए ट्रॉमा सेंटर के बेसमेंट का उपयोग करने के प्लान पर अभी अमल नहीं हुआ है।

ये बताई खामी: 800 एमए क्षमता वाली एक्सरे मशीन नहीं।

वर्तमान स्थिति: मशीन की खरीद के लिए कागजी प्रक्रिया शुरू कर दी गई है।

ये बताई खामी: फाॅर्माकोलॉजी विभाग में लर्निंग लैब नहीं।

वर्तमान स्थिति: मेडिकल कॉलेज में चल रहे निर्माण कार्य में से लैब के लिए जगह देने का विचार है।

ये बताई खामी: डीन व अधीक्षक के पद पर प्रभारी।

वर्तमान स्थिति: शासन स्तर पर मामला लंबित है।

ये बताई खामी: एक्जामिनेशन हॉल की कमी।

वर्तमान स्थिति: मेडिकल कॉलेज में चल रहे निर्माण में से हॉल दिए जाने का प्लान है।

ये बताई खामी: लेक्चर थियेटर नहीं।

वर्तमान स्थिति: अभी प्रक्रिया चल रही है।

ये बताई खामी: लाइब्रेरी में एयर कंडीशनर नहीं।

वर्तमान स्थिति: एसी खरीद की सिर्फ कागजी प्रक्रिया हो रही है।

ये बताई खामी: गर्ल्स व बॉयज के कॉमन रूम नहीं।

वर्तमान स्थिति: नए निर्माण में से रूम दिए जाने का प्लान है।

ये बताई खामी: अस्पताल भवन काफी जर्जर है।

वर्तमान स्थिति: 18 लाख का रेनोवेशन प्रोजेक्ट कागजों में।

ये बताई खामी: क्षमता से ज्यादा मरीज व अटेंडेंट।

वर्तमान स्थिति: इसके लिए वर्तमान में कोई प्लान नहीं है।

ये बताई खामी: 250 सीटर हॉस्टल अभी निर्माणाधीन।

वर्तमान स्थिति: काम चल रहा है।

ये बताई खामी: नए अस्पताल में अभी काफी समय।

वर्तमान स्थिति: सरकार पर बजट न होने से हजार बिस्तर अस्पताल का काम बंद।

ये बताई खामी: ईटीओ स्टरलाइजर नहीं है।

वर्तमान स्थिति: खरीद की प्रक्रिया चल रही है।

ये बताई खामी: एनाटोमी विभाग में जगह की कमी।

वर्तमान स्थिति: कॉलेज के नए भवन में विभाग के लिए जगह की प्लानिंग।

ये बताई खामी: कम्युनिटी मेडिसिन विभाग के प्रैक्टिकल हॉल में कम जगह।

वर्तमान स्थिति:प्लानिंग में शामिल।

ये बताई खामी: उपकरणों की कमी।

वर्तमान स्थिति: प्लानिंग जारी, लेकिन 27 फरवरी 2020 तक खरीद संभव नहीं।

ये बताई खामी: इंफ्रास्ट्रक्चर की कमी

वर्तमान स्थिति: मेडिकल कॉलेज व जेएएच में क्लास रूम, लाइब्रेरी, हॉस्टल आदि निर्माण कार्य चल रहे है। निर्माण कंप्लीट होने में अभी समय लगेगा।

ये बताई खामी: फॉरेंसिक मेडिसिन में उपकरणों की कमी।

वर्तमान स्थिति: अभी खरीद प्रक्रिया चल रही है।

गजराराजा मेडिकल कॉलेज के पूर्व डीन डॉ. भरत जैन एमसीआई में काॅर्डिनेटर हंै। 2012 से वे एमसीआई का काम देख रहे हैं। कॉलेज की कमियों को दूर करने के लिए उनकी सलाह ली जा सकती थी। वहीं सर्जरी विभाग के एचओडी डॉ. अचल गुप्ता सहित कई प्रोफेसर काफी समय से एमसीआई में अफसर हैं। इनका भी सहयोग कमियां दूर करने में लिया जा सकता था।

मेडिकल टीचर्स के 27 पद खाली

गजराराजा मेडिकल कॉलेज में मेडिकल टीचर्स के 27 पद खाली हैं। इनमें 14 पद सुजित नहीं हो पाए हैं। छह पद एससी-एसटी के हैं, जिन पर नियुक्ति नहीं हो पा रही है। तीन पदों पर नियुक्त टीचर प्रतिनियुक्ति पर गए हंै साथ ही चार पदों पर टीचर्स (डॉक्टर) ने ज्वाॅइनिंग नहीं दी है।

DB Star Expose

27 जनवरी 2020 को जारी एमसीआई के पत्र में बताई गई कमियां और वर्तमान स्थिति

अफसरों की लापरवाही से एमबीबीएस की 100 सीटों से हाथ धो चुके जीआर मेडिकल काॅलेज ने मेडिकल काउंसिल ऑफ इंडिया (एमसीआई) की रिपोर्ट दबाकर प्रशासनिक अक्षमता पर पर्दा डाल दिया है। एमसीआई ने जो 22 खामियां बताईं वो पांच दिन में दूर कर जीआरएमसी अब भी दौड़ में शामिल होकर इंदौर की बराबरी कर सकता है लेकिन अफसरों को कागजी घोड़े दौड़ाने से फुर्सत नहीं मिल रही है। कॉलेज में 3000 वर्गफीट का लाइब्रेरी भवन, न्यूनतम 2247 मरीज की ओपीडी सहित 22 कमियां यदि दूर नहीं हुई तो इस सत्र में एमबीबीएस की 100 सीटें नहीं बढ़ पाएंगी।


}एमसीआई की रिपोर्ट से सामने आईं कमियां...

एमबी अाेझा, अध्यक्ष, जीआर मेडिकल कॉलेज व संभागायुक्त


शिवशेखर शुक्ला, प्रमुख सचिव, चिकित्सा शिक्षा विभाग मप्र

डॉ. सरोज कोठारी, डीन, जीआर मेडिकल कॉलेज


}एमसीआई की रिपोर्ट में क्या है?

एमबीबीएस सीटों के संबंध में है।

}ग्वालियर क्यों पिछड़ा?

हम सभी प्रयास कर रहे हैं।

}100 सीटों के नुकसान का जिम्मेदार कौन है?

यह तो प्रक्रिया है।

}इंदौर की तरह यहां काम क्यों नहीं कराया?

यहां भी पूरी तैयारियां चल रही हैं।

}अब क्या तैयारी है?

सर्जरी सहित अन्य विभाग में भर्ती की है। कॉलेज के कई निर्माण कार्य भी पूरे हो गए हैं।

} विशेषज्ञों की सेवा क्यों नहीं ली गई?

कॉलेज की बेहतरी के लिए सभी कुछ कर रहे हैं।

}एमसीआई की रिपोर्ट में क्या आया है?

कॉलेज में कुछ कमियां है, जिन्हें दूर किया जा रहा है

}ग्वालियर क्यों पिछड़ा?

हर कॉलेज में कुछ कमियां रहती ही है। इसमें पिछड़ने जैसी कोई बात नहीं है।

}100 सीटाें के नुकसान का जिम्मेदार कौन है?

जिम्मेदारी की बात ही नहीं है मेडिकल कॉलेज की सीटें बढ़ेंगी।

}अब क्या तैयारी है?

फैकल्टी पूरी है। 100 प्रतिशत कमी कभी पूरी नहीं हो सकती है। कुछ डिफिशिएंसी अलाऊ रहती हैं।

}एमसीआई की रिपोर्ट में क्या है?

27 फरवरी 2020 तक कमियां दूर करने के लिए कहा गया है।

} ग्वालियर क्यों पिछड़ा?

मैंने तो अभी कार्यभार संभाला है पहले से ही प्रयास चल रहे हैं। हम इन प्रयासों में तेजी लाए है।

}100 सीटाें के नुकसान का जिम्मेदार कौन है?

इस बारे में कुछ नहीं कह सकती

}इंदौर की तरह यहां काम क्यों नहीं कराया?

हम लगातार प्रयास कर रहे हैं।

}अब क्या तैयारी है?

}पूरी तैयारी है, हमने बाल रोग विभाग व सर्जरी में दो असिस्टेंट प्रोफेसर की भर्ती की है। निर्माण कार्य में भी तेजी लाए हैं।

}विशेषज्ञों की सेवा क्यों नहीं ली गई?

समय-समय पर सभी से सलाह ली जा रही है

खाली पदों को भरा जा रहा है

कमियों को दूर किया जा रहा है


हम प्रयासों में तेजी लाए हैं

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