स्कीम की जगह पर होटल

Gwalior News - प्रियंक शर्मा/ रमन पोपली

Bhaskar News Network

Jul 14, 2019, 07:35 AM IST
Gwalior News - mp news hotel at the place of the scheme
प्रियंक शर्मा/ रमन पोपली
कारोबारी ललित नागपाल, उनकी प|ी वंदना नागपाल, पुत्र कुशाग्र नागपाल सहित राजकुमार उर्फ राजू कुकरेजा और उनकी प|ी सोनिया कुकरेजा के नाम पर एयरटेल ऑफिस के पास व्हाइट हाउस के सामने सिटी सेंटर के प्लॉट क्रमांक 1950 के कुल क्षेत्रफल 7233 वर्गफीट के लिए 13 जनवरी 2012 को नगर तथा ग्राम निवेश द्वारा विकास अनुज्ञा जारी की गई थी। चार मंजिला के होटल निर्माण के प्लान के साथ नगर निगम के अफसरों ने 22 जुलाई 2013 को भवन निर्माण की अनुमति जारी कर दी। इसी बीच शासन द्वारा कराई गई जांच में खुलासा हुआ कि यह क्षेत्र जीडीए की मेहरा-सिरोल आवासीय योजना का है। इसमें न तो जीडीए और न ही टाउन एंड कंट्री प्लानिंग द्वारा विकास संबंधी सहमति जारी की जा सकती है।

इस आधार पर पांच जून 2014 को जीडीए ने विकास सहमति और 10 जून 2014 को टीएंडसीपी ने विकास अनुज्ञा निरस्त कर नगर निगम को सूचना दे दी। इस आधार पर नगर निगम को भवन निर्माण की अनुमति कैंसिल करनी थी, लेकिन अफसरों ने इसे ठंडे बस्ते में डालकर निर्माण जारी रहने दिया। अब होटल बिल्डिंग का निर्माण लगभग फाइनल स्टेज में है। इसका फ्रंट एसपी ऑफिस रोड (माधवराव सिंधिया मार्ग) की तरफ है और यहां सिर्फ 30 फीट चौड़ा एंट्रेंस ही है। इसके चलते अफसरों ने मिलीभगत कर बिल्डिंग के बाएं तरफ स्थित पार्क को उजाड़कर 100 फीट चौड़ा फ्रंट तैयार करा दिया। इस होटल के लिए निगम के बजट से 20 लाख रुपए खर्च कर 20 हजार वर्गफीट जमीन पर पार्किंग बनाई जा रही है। दिखावे के लिए इस पार्किंग को जनता के उपयोग के लिए बताया जा रहा है, लेकिन असल में इसे होटल के लिए ही डेवलप किया जा रहा है।

होटल की बिल्डिंग के लिए नगर निगम ने सरकारी खर्चे पर तैयार कराई पार्किंग

बिल्डिंग का चौड़ा फ्रंट देने के लिए उजाड़ा पार्क और काट दिए हरे-भरे पेड़

नगर निगम ने सिटी सेंटर में राजू कुकरेजा के जिस निर्माणाधीन होटल के लिए 12 से अिधक पेड़ों को काटकर सरकारी खर्च पर पार्किंग का निर्माण कराया है, उस होटल का निर्माण ही अवैध है। यह भूमि जीडीए की स्कीम में है। पांच साल पहले जीडीए इसकी एनओसी व टीएंडसीपी इसकी अनुमति निरस्त कर नगर निगम को भवन निर्माण की स्वीकृति कैंसिल करने का आदेश दे चुका है। इस अवैध निर्माण को कानूनी दांव पेंच के सहारे वैध कराने के लिए जीडीए व टीएंडसीपी के आदेश गायब कर दिए गए हैं।

sunday investigation

सिटी सेंटर क्षेत्र में नगर निगम ने सालासर मॉल के पीछे मल्टीलेवल पेड पार्किंग तैयार कराई थी और अब ग्वालियर स्मार्ट सिटी डेवलपमेंट कॉर्पोरेशन द्वारा इसका संचालन किया जा रहा है। इसकी क्षमता 210 कारों की है, लेकिन इसी इलाके में फ्री पार्किंग के चलते पेड पार्किंग में भी प्रतिदिन बमुश्किल 100 कारें खड़ी हो रही हैं। इससे साफ है कि पर्याप्त फ्री पार्किंग होने के बावजूद नगर निगम के अफसरों ने सिर्फ होटल के लिए पार्क की जमीन पर पार्किंग तैयार करा दी है।

पेड पार्किंग आधी खाली


अनुमति से संबंधित मामला मेरे कार्यकाल का नहीं है।


मैं इस संबंध में रिकॉर्ड की जानकारी लूंगा।


मैं संबंधित अफसरों से मामले की पूरी जानकारी मंगाता हूं।


स्कीम की जगह पर किसी को अनुमति नहीं मिल सकती।


वह जमीन पब्लिक यूटिलिटी की थी और वहां नशाखोरी होती थी। इसलिए वहां पार्किंग तैयार कराई है।


वहां पार्किंग बनाने का निर्णय पुलिस, प्रशासन और नगर निगम तीनों ने मिलकर लिया है।

जमीन के उपयोग के लिए बनाई पार्किंग

संदीप माकिन, आयुक्त नगर निगम

मामला गंभीर है, हम कार्रवाई करेंगे

यह मामला आपके माध्यम से मेरे संज्ञान में आया है। इस संबंध में मैं ग्वालियर के अफसरों से जानकारी मंगाता हूं। इसके बाद प्रकरण में जांच कराकर आगामी कार्रवाई की जाएगी। स्कीम की जगह के मामले के बिंदु को भी चेक कराया जाएगा। जयवर्धन सिंह, मंत्री, नगरीय विकास एवं आवास विभाग

हमने विकास अनुज्ञा निरस्त कर दी थी

सिटी सेंटर में जीडीए की मेहरा-सिरोल स्कीम के कारण इस बिल्डिंग की विकास अनुज्ञा वर्ष 2014 में निरस्त कर दी गई थी। इसकी सूचना से संबंधित पत्र भी हमने नगर निगम को भेज दिया था। वीके शर्मा, संयुक्त संचालक टीएंडसीपी

सिटी सेंटर स्थित निर्माणाधीन होटल। 20 साल पहले कॉलोनी के पार्क में लगाए गए 12 से अिधक पेड़ों को काटकर नगर निगम ने होटल की सुविधा के लिए सरकारी खर्च पर पार्किंग का निर्माण कराया है।

मैं मामले की फाइल दिखवाता हूं

मैं इस मामले से संबंधित फाइल निकलवाता हूं। स्कीम की जगह पर इस तरह से निर्माण नहीं हो सकता है और विकास अनुज्ञा निरस्त होने के बावजूद निर्माण हुआ है, तो हम दस्तावेज देखकर कार्रवाई करेंगे। वीरेंद्र कुमार सिंह, सीईओ जीडीए

अनुमति लेकर किया है निर्माण

राजू कुकरेजा, बिल्डिंग पार्टनर


नहीं, ऐसा कुछ नहीं है।


हमने तो निगम से अनुमति लेकर ही निर्माण किया है।


मुझे इस बारे में कोई जानकारी नहीं है।


वह जगह जीडीए के ले-आउट में ही पार्किंग के लिए चिह्नित है। मेरी बिल्डिंग की पार्किंग तो तलघर में है और अगर कोई व्यक्ति निगम की पार्किंग में गाड़ी लगाता है, तो इसमें गलत क्या है।


इसके बारे में आप नगर निगम के अिधकारियों से बात करें।

ये है जीडीए की स्कीम

शासन द्वारा प्राधिकरणों की रेजिडेंशियल व कॉमर्शियल गतिविधियों के लिए चिह्नित की गई जमीन को स्कीम (योजना) का नाम देकर विकसित किया जाता है। ऐसी योजनाओं में कोई भी विकास कार्य प्राधिकरण के माध्यम से होता है और वहां निजी विकास के लिए अनुमति जारी नहीं की जाती है। वर्ष 2013 में आवास एवं पर्यावरण (अब नगरीय विकास विभाग) के तत्कालीन प्रमुख सचिव इकबाल सिंह बैस ने सिटी सेंटर क्षेत्र में संचालित जीडीए की स्कीमों में ऐसी ही 100 से अधिक एनओसी निरस्त की थीं। इसी क्रम में इस होटल की विकास अनुज्ञा भी निरस्त की गई थी।

तैयार कराया अतिरिक्त फ्लोर

मेहरा-सिरोल योजना के लिए चिह्नित जमीन का पॉइंट छोड़ भी दिया जाए, तो टीएंडसीपी की विकास अनुज्ञा के मुताबिक इस होटल के लिए बेसमेंट में पार्किंग के अलावा चार मंजिल की परमिशन दी गई थी, जबकि मौके पर बेसमेंट, ग्राउंड फ्लोर के बाद चार मंजिल तैयार कर दी गई हैं। इसके बावजूद नगर निगम के अफसर इस पूरे मामले की ओर से आंखें बंद किए बैठे हैं।

मास्टर फाइल से निर्माण

इस पार्किंग के लिए निगम अफसरों ने मास्टर फाइल का सहारा लिया है। मास्टर फाइल को एक विधानसभा क्षेत्र में होने वाले विकास कार्यों के लिए तैयार किया जाता है। इसमें क्षेत्र में विकास कार्यों का हवाला देकर इकट्ठी राशि सेंक्शन करा ली जाती है। इस राशि को जरूरत पड़ने पर इंफ्रास्ट्रक्चर के लिए खर्च किया जाता है। ग्वालियर पूर्व विधानसभा क्षेत्र का जिम्मा संभालने वाले निगम अफसरों ने इसी मास्टर फाइल का सहारा लेकर जनता के हित में काम कराने के बजाय कारोबारियों के लिए 20 लाख रुपए खर्च कर दिए।

आसपास हैं ये पार्किंग

सिटी सेंटर क्षेत्र में इस होटल के नजदीक ही मध्यप्रदेश औद्योगिक विकास निगम कार्यालय के पास फ्री पार्किंग है। इससे थोड़ा आगे चलने पर आनंद दीप बिल्डिंग की पार्किंग और सालासर मॉल के ठीक पीछे चार पहिया और दोपहिया वाहनों के लिए ग्वालियर स्मार्ट सिटी डेवलपमेंट कॉर्पोरेशन की पेड पार्किंग मौजूद है। इसके बावजूद यहां दिखावे की पार्किंग होटल के लिए तैयार हो रही है।

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