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अंचल की धरा में आज भी धरोहर मौजूद, कुंतलपुर, पवाया और नरेश्वर में खुदाई की जाए तो निकलेंगे प्राचीन मंदिर

Bhaskar News Network

Mar 20, 2019, 02:56 AM IST

Gwalior News - अंचल की धरा के नीचे आज भी पुरा संपदा मौजूद हैं। बटेश्वर स्थल (मुरैना) के पीछे खुदाई कराई जाए, तो वहां पर मंदिरों की...

Gwalior News - mp news if there is still excavation in the area of dharohar kuntlpur pavaya and nareshwar then the ancient temples will leave
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अंचल की धरा के नीचे आज भी पुरा संपदा मौजूद हैं। बटेश्वर स्थल (मुरैना) के पीछे खुदाई कराई जाए, तो वहां पर मंदिरों की बड़ी शृंखला निकलकर सामने आएगी। इसके साथ ही कुंतलपुर, पवाया, नरेश्वर में खुदाई कराने पर मंदिरों के साथ-साथ धरोहर निकलेंगी। यहां पर काम करने की जरूरत है। यह कहना है राष्ट्रपति डाॅ.रामनाथ कोविंद से पदमश्री सम्मान पाकर पहली बार ग्वालियर आए भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण के पूर्व डायरेक्टर केके मोहम्मद का। वे कहते हैं कि बटेश्वर की खुदाई और उसके संरक्षण के अलावा अन्य स्थलों पर किए गए संरक्षण के कामों ने ही देश का सर्वोच्च सम्मान दिलाया है।

ग्वालियर में अल्प प्रवास पर आए श्री मोहम्मद सबसे पहले बटेश्वर पहुंचे। यहां पर मंदिरों में पूजा कर लौटने के बाद पत्रकारों को बताया कि साल 2004 से 2008 तक मुरैना जिले के बटेश्वर में खुदाई के दौरान 80 से ज्यादा शिव मंदिर मिले थे। वहां पर काम के दौरान कई समस्याओं का सामना करना पड़ा था। एक बार तो बात नौकरी पर बन आई थी। जब आरएसएस प्रमुख केएस सुदर्शन को मंदिरों को बचाने के लिए खत लिखा था। इस खत की आवाज दिल्ली तक गूंजी थी। बटेश्वर के अलावा फतेहपुर सीकरी में दीन-ए-इलाही का चबूतरा साल 1998 में निकाला था। इसके अलावा बिहार में भगवान बुद्ध का स्तूप भी जमीन के अंदर से खोज निकाला था। उन्होंने बताया कि जब दिल्ली में डायरेक्टर के पद पर पहुंचे, उस वक्त दिल्ली में भीख मांगने वाले बच्चों को एकत्रित कर धरोहर में शिक्षा दी थी। उनमें से एक बच्चे से मिलने की इच्छा अमेरिका के राष्ट्रपति रहे बराक ओबामा ने जाहिर की थी।

बटेश्वर में काम जल्द शुरू होगा: पिछले कुछ सालों से बटेश्वर मंे संरक्षण के काम नहीं हो रहा था। भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण एक बार फिर वहां गिरे मंदिरों के संरक्षण का काम करेगा। अभी तक 80 मंदिरों का संरक्षण किया जा चुका है। वर्तमान में 200 मंदिर गिरे पड़े हैं। उनको संरक्षित किया जाएगा। यह काम जल्द शुरू कर दिया जाएगा।

केके मोहम्मद

अयोध्या में मंदिर के अवशेष मिले थे

श्री मोहम्मद का कहना है कि साल 1996 में प्रो.बीबी लाल की टीम के सदस्य के रूप में अयोध्या रामजन्म भूमि स्थल पर काम किया था। वहां जमीन के अंदर मंदिर के 12 पिलर मिले थे। इससे पता चलता है कि वहां राममंदिर मौजूद था। साल 2003 में फिर काम किया गया। तब डाॅ. बीआर मणकी डायरेक्टर एएसआई की टीम ने का किया था। उस वक्त 50 पिलर के साथ-साथ कई और भी अवशेष मिले थे।

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