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साफ पानी देने के लिए 7 साल में भी सुझाव पर अमल नहीं किया, नीरी को फिर भेजा बुलावा

Bhaskar News Network

May 18, 2019, 07:31 AM IST

Gwalior News - शहर की जनता पीले और बदबूदार पानी की सप्लाई से परेशान है और नगर निगम के अफसर रोम सम्राट नीरो की तरह चैन की बंसी बजा...

Gwalior News - mp news in 7 years even to give clean water did not implement the suggestion call again neeri
शहर की जनता पीले और बदबूदार पानी की सप्लाई से परेशान है और नगर निगम के अफसर रोम सम्राट नीरो की तरह चैन की बंसी बजा रहे हैं। नेशनल इंवायरमेंटल इंजीनियरिंग रिसर्च इंस्टीट्यूट (नीरी) के वैज्ञानिक सात साल पहले इस समस्या से छुटकारा पाने के लिए नगर निगम को कार्ययोजना बनाकर दे चुके हैं, लेकिन अब तक उस पर पूरी तरह अमल नहीं किया गया है। अब फिर नगर निगम ने नीरी के वैज्ञानिकाें को आमंत्रण भेजा है। साल में दो बार गर्मी और बारिश के दौरान शहर के अधिकांश इलाकों में कई दिनों तक पीले और मटमैले पानी की सप्लाई हो रही है। इससे लोगों के शरीर में तमाम तरह की बीमारियां प्रवेश कर रही हैं। शेष|पेज 11 पर

माकपा, कांग्रेस ने जताया विरोध: शहर में गंदे, पीले और बदबूदार पानी की सप्लाई को लेकर माकपा ने फूलबाग से सिटी निगम मुख्यालय तक कांवर यात्रा निकालकर विरोध दर्ज कराया। उधर, कांग्रेस पार्षद दल की बैठक में गंदे और बदबूदार पानी को लेकर चिंता जताई गई।

10 लाख रुपए में नीरी ने दिए थे यह सुझाव

1. रिजर्वायर में एयरीगेटर: तिघरा बांध की तली में लगे वाल्व से सप्लाई के लिए पानी लिया जाता है। यहां पानी में ऑक्सीजन की मात्रा कम होती है। इससे पानी में गंध आती है। नीरी ने रिजर्वायर में एयरीगेटर या बड़े फव्वारे लगाने का सुझाव दिया था ताकि पानी में डिजॉल्व ऑक्सीजन की मात्रा को बढ़ाया जा सके। अभी तक एक भी एयरीगेटर नहीं लगाया गया। बांध के निचले स्तर से ही पानी लिया जा रहा है।

2. तिघरा की सफाई: तिघरा बांध की दीवारों पर काई की मोटी परतें जमी हुई हैं। तापमान 40 डिग्री सेल्सियस से ऊपर जाने पर काई पिघलकर पानी में मिलती है। पानी में घुलनशील लौह तत्व ऑक्सीजन के संपर्क में आने से फैरिक फॉर्म में आ जाते हैं। ऐसे में क्लोरीन मिलाते ही पानी में पीलापन बढ़ जाता है। लेकिन तिघरा की सफाई के लिए कोई प्रयास नहीं किए।

3. क्लोरिनेशन: बांध से पीला पानी आता है, तो ट्रीटमेंट प्लांट में क्लोरिनेशन जरूरत के हिसाब से किया जाए। नीरी ने पानी की कैमिकल जांच कराकर क्लोरीन की मात्रा तय करने काे कहा था। अफसरों का कहना है कि वे इसी हिसाब से क्लोरीन मिला रहे हैं।

सीधी बात

संदीप माकिन, आयुक्त नगर निगम

तिघरा जल संसाधन की प्रॉपर्टी


मोतीझील और वाटर ट्रीटमेंट प्लांट पर पानी को पूरी तरह ट्रीटमेंट किया जा रहा है। मैंने और खुद कलेक्टर ने वहां का साफ पानी पिया है।


तिघरा जलाशय जल संसाधन विभाग की प्रॉपर्टी है। हम तो सिर्फ वहां से पानी लेते हैं।


मैं इस संबंध में जल संसाधन विभाग की प्रमुख सचिव को पत्र लिखूंगा। हमारी कोशिश है कि शहर की जनता को साफ और शुद्ध पानी मिले।

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