संसार में भरत जैसे त्यागी भाई का मिलना असंभव

Gwalior News - संसार में किसी को भी भरत जैसा भाई मिलना असंभव है। भरत ने 14 साल तक कुटिया में रहते हुए राज पाठ चलाया। वे राजगद्दी पर...

Jan 07, 2020, 07:26 AM IST
Gwalior News - mp news it is impossible to find a brother like bharata in the world
संसार में किसी को भी भरत जैसा भाई मिलना असंभव है। भरत ने 14 साल तक कुटिया में रहते हुए राज पाठ चलाया। वे राजगद्दी पर कभी नहीं बैठे। उन्होंने प्रण लिया था कि यदि श्री राम ने 14 साल के बाद अयोध्या अाने में यदि एक दिन भी ज्यादा लगाया तो वे अपने प्राण त्याग देंगे। यह बात संत चिन्मयानंद बापू ने सोमवार को महलगांव स्थित कैलादेवी मंदिर के पास स्थित मैदान में चल रही श्री राम कथा में कही।

चिन्मयानंद बापू ने कहा कि जो माता भरत जैसे संत की मां हो। प्रभु श्री राम को अति प्रिय हो। वह संसार में निंदनीय कैसे हो सकती हैं। कैकई माता ने जो दो वरदान महाराज दशरथ से मांगे थे, वह प्रभु श्री राम की ही मर्जी थी। कारण यह था कि श्री राम ने धर्म की रक्षा के लिए ही अपनी मां से यह दो वरदान मांगने के लिए आग्रह किया था। बापू ने कहा कि मां कैकई जानती थीं कि ऐसे वरदान मांगने के बाद समाज में लोग उनकी निंदा करेंगे। उनको बुरा-भला कहेंगे। लेकिन इसके बाद भी उन्होंने प्रभु राम की इच्छा को देखते हुए वनवास मांगा। माता कैकई के वरदान मांगने के बाद जब प्रभु श्री राम वनवासी के भेष में मां कौशल्या के पास पहुंचे और उन्होंने कहा कि पिताश्री ने मुझे वन का राजा बना दिया है। तब माता कौशल्या ने कहा कि बेटा तुम्हारे पिता तुमसे इतना प्रेम करते थे फिर उन्होंने तुझे वन जाने का आदेश कैसे दे दिया। इस पर प्रभु श्रीराम ने कहा कि मां कैकई ने दो वरदान मांगे हैं। इसके चलते मैं वन जा रहा हूं। इस पर माता कौशल्या ने कहा कि यदि सिर्फ तेरे पिता की इच्छा होती तो शायद मैं तुझे रोक लेती। लेकिन यदि तेरी मां की इच्छा है तो तुम वन में अवश्य जाओ। माता कौशल्या ने यह भी कहा कि संसार में कोई भी मां अपने बच्चों के लिए गलत नहीं सोचती। इसके बाद प्रभु राम, माता जानकी और भाई लक्ष्मण के साथ वन के लिए निकल गए। महाराज दशरथ के निधन के बाद भरत अयोध्या आए और उन्होंने श्रीराम के वन गमन की खबर सुनते ही अपनी माता कैकई का परित्याग कर दिया। उन्होंने कहा कि जिसको राम-सीता प्रिय ना हों ऐसे व्यक्ति का परित्याग ही कर देना चाहिए। स्वामी तुलसीदास जी ने रामचरितमानस में कहा कि जो लोग भरत चरित्र की कथा का रसपान करते हैं उनको प्रभु श्रीराम की भक्ति प्राप्त होती है।

प्रवचन
श्रीरामकथा

शिंदे की छावनी स्थित पारदी मोहल्ले में चल रही श्रीमद् भागवत कथा में पं. घनश्यामदास शास्त्री के प्रवचन सुनते श्रद्धालु।

जैसा हम दूसरों को देंगे, वैसा ही हमें प्राप्त होगा: पं. घनश्याम

भागवत कथा

धर्म की स्थापना के लिए भगवान ने लिया था अवतार: पं. अंकितकृष्ण

प्रभु श्री कृष्ण ने धर्म की स्थापना अौर पापियों का अंत करने के लिए अवतार लिया था। उन्होंने बचपन से ही पापियों का अंत करना शुरू कर दिया था। उन्होंने युवावस्था में कंस का अंत कर मथुरा वासियों को उसके अत्याचारों से मुक्ति दिलवाई थी। यह बात समाधिया कॉलोनी के डी ब्लॉक स्थित पंचमुखी हनुमान मंदिर पर चल रही भागवत कथा में पं. अंकित कृष्ण शास्त्री ने कही। कथा के छठवें दिन कथा स्थल पर रुक्मिणी विवाह संपन्न हुआ। इस अवसर पर अाकर्षक झांकी निकाली गई।

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