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विवादों के चलते जमीन अधिग्रहण का काम भी बंद

एक वर्ष पहले
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बजट की कमी के चलते ही निर्णय लिया गया कि इस प्रोजेक्ट में 2500 हेक्टेयर भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया के दौरान यदि किसी व्यक्ति की निजी भूमि आती है, तो उसके बदले सरकारी जमीन दे दी जाए। इसे विनिमय कहते हैं और इस प्रक्रिया में भी लंबा समय लगता है। इसके अलावा इसमें कई विवाद भी सामने आएंगे। इस कारण भी इस मॉडल पर काम नहीं हो पा रहा है।

123 किमी का झंझट

इस प्रोजेक्ट को भिंड तक बढ़ाने के लिए अभी स्वीकृत अलाइनमेंट में 123 किलोमीटर का फेरा बढ़ेगा। इससे प्रोजेक्ट की कॉस्टिंग भी बढ़ेगी। चूंकि अभी बजट की व्यवस्था नहीं है, ऐसे में भिंड तक इसे बढ़ाने के लिए भी कोई निर्णय नहीं हो पाया है। अपनी तैयारी के लिए अफसरों ने अलाइनमेंट और प्रस्तावित बजट का होमवर्क जरूर किया है।

क्या है प्रोजेक्ट

चंबल एक्सप्रेस वे का प्रोजेक्ट मुरैना जिले के गड़ोरा गांव से शुरू होकर जौरा, कैलारस, सबलगढ़, गोरस, श्योपुर होते हुए राजस्थान के सवाई माधौपुर तक पहुंचेगा। वहां भी इसके विस्तार की योजना है। इसे चंबल नदी के पैरलल तैयार किया जाना है।

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