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1964 में एलबीटी से हुई शुरुआत, रंगमंच को दिलाई पहचान, अब 25 संस्थाएं तैयार कर रही हैं कलाकार

Gwalior News - world theater day तब: सादा परिधानों में होते थे नाटक, अब: सेटअप और ड्रेस पर ज्यादा खर्च परंपरा आगे बढ़ा रहे हैं 1979 में...

Mar 27, 2020, 07:15 AM IST
Gwalior News - mp news lbt started in 1964 gave recognition to theater now 25 institutions are producing artists

world theater day

तब: सादा परिधानों में होते थे नाटक, अब: सेटअप और ड्रेस पर ज्यादा खर्च

परंपरा आगे बढ़ा रहे हैं

{1979 में नाटक इंद्रजीत का मंचन करते वरिष्ठ कलाकार रवि उपाध्याय। दूसरे चित्र में नाटक मेघदूत का मंचन करते कलाकार।

शहर में हिंदी अाैर मराठी रंगमंच का स्वर्णिम इतिहास रहा है। मराठी रंगमंच को एक लंबा समय हो गया है, जबकि हिंदी रंगमंच का स्वर्णिम दौर 70 के दशक का दौर माना जाता है। तब झांसी रोड स्थित पटेल छात्रावास में रंगश्री लिटिल बैले ट्रुप (एलबीटी) की शुरुआत हुई। यह वह दौर था जब यहां प्रशिक्षण लेने वाले कलाकारों ने आज बॉलीवुड में ग्वालियर को अलग ही पहचान दिलाई है। इसी का परिणाम है वर्तमान में 25 के करीब नाट्य संस्थाएं कार्यरत हैं। जो हर माह तीन से चार नाटक का मंचन करती है। वरिष्ठ रंगकर्मी अशोक आनंद बताते हैं वर्ष 1964 में पटेल छात्रावास में रंगश्री लिटिल बैले ट्रुप की शुरुआत शांतिवर्धन की प|ी गुलवर्धन और कोरियोग्राफर प्रभात गांगुली ने की। इससे पहले यह संस्था मुंबई में चला करती थी और इसके संस्थापक शांतिवर्धन थे। वर्ष 1984 में रंगश्री लिटिल बैले ट्रुप भोपाल में शिफ्ट हो गया, जो कलाकार इस दल में नहीं गए उन्होंने कलासमूह संस्था की स्थापना की। कला समूह के महासचिव हौजाई गंबासिंह बताते हैं कि उस समय रंगश्री लिटिल बैले ट्रुप को एलबीटी के नाम से जाना जाता था। यह संस्था मुख्य रूप से नृत्य नाटिका का मंचन किया करती थी। कला समूह की ओर से देशभर में करीब 100 नाटकों का निर्देशन से लेकर मंचन किया जा चुका है।

कला समूह की ओर से शहर की नाट्य संस्थाओं को मंच देने के लिए 1985 से ग्रीष्मकालीन शिविर की शुरुआत की गई। इस शिविर में 35 प्रतिभागियों ने हिस्सा लिया था। उस समय आज के बॉलीवुड कलाकार पीयूष मिश्रा, वरिष्ठ रंगकर्मी रवि उपाध्याय और ईशान त्रिवेदी जैसे कलाकार प्रशिक्षण दिया करते थे।

{मंचन के लिए हर प्रकार के मंच: नाटकों के मंचन के लिए ओपन थिएटर में कला वीथिका, शिवाजी उद्यान और कला समूह हैं। इसी प्रकार बड़े सभागार में भगवत सहाय सभागार, एलएनआईपीई का टैगोर सभागार,जेयू का गालव सभागार और नाट्य मंदिर सभागार शामिल है।

{कोराना के कारण पहली बार मंच सूना: कोराेना वायरस के कारण यह पहला मौका है, जब रंगमंच सूने रहेंगे। इस दौरान कोई कार्यक्रम नहीं होगा।

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